करवा चौथ की तरह ही हरतालिका तीज का त्योहार भी महिलाओं के लिए आपसी प्रेम, विश्वास और आस्था का अनोखा उत्सव है। अखंड-सुखद दांपत्य की कामना का यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की कथा पर आधारित है। इस दिन सुहागिन महिलाएं और कुंवारी लड़कियां शिव-पार्वती की पूजा करके अपने वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। यदि आप पहली बार हरतालिका तीज का व्रत कर रही हैं, तो आपको कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि आपका व्रत सफल और फलदायी हो सके।
{"_id":"6aa547ad4bc5ca8c18081d46","slug":"hartalika-teej-2026-rules-for-women-know-important-puja-vidhi-rules-details-explained-in-hindi-2026-09-12","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"व्रत नियम: 14 सितंबर को हरतालिका तीज, पहली बार व्रत कर रही हैं तो इन बातों का रखें ध्यान","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
व्रत नियम: 14 सितंबर को हरतालिका तीज, पहली बार व्रत कर रही हैं तो इन बातों का रखें ध्यान
Sat, 12 Sep 2026 06:09 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 12 Sep 2026 06:09 PM IST
सार
Hartalika Teej 2026: सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अच्छी सेहत के लिए हर वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को व्रत रखती हैं।
विज्ञापन
Hartalika Teej 2026
- फोटो : अमर उजाला AI
Hartalika Teej 2026
- फोटो : अमर उजाला AI
भाव और श्रद्धा
यह व्रत काफी कठिन होता है, इसलिए इसे रखने से पहले अपने शरीर और मन को तैयार करें। इस व्रत में मन की शुद्धता और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास आवश्यक है। केवल शारीरिक रूप से व्रत रखने से इसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता, बल्कि मन से भी शुद्ध और श्रद्धालु रहना आवश्यक है।
मेडिटेशन करें
यदि आप नियमित रूप से एक्सरसाइज, वॉक या वर्कआउट करती हैं तो इस दिन ये सब न करें ताकि आपकी ऊर्जा बनी रहे। इस दिन डीप ब्रीदिंग और मेडिटेशन कर सकती हैं, इससे आप स्वयं को रिलैक्स महसूस कर सकेंगी। मेडिटेशन आपके शरीर में ऊर्जा के स्तर को संतुलित रखने में मदद करेगा।
पूजा की तैयारी
सबसे पहले, आपको पूजा के लिए आवश्यक सामग्री तैयार करनी चाहिए। इसमें रेत या शुद्ध मिट्टी से बने शिवलिंग, भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति, बेलपत्र, धतूरा, फल, फूल, धूप, दीपक, रोली, और चंदन शामिल हैं। इसके अलावा, पूजन स्थल को स्वच्छ और पवित्र रखें।
यह व्रत काफी कठिन होता है, इसलिए इसे रखने से पहले अपने शरीर और मन को तैयार करें। इस व्रत में मन की शुद्धता और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास आवश्यक है। केवल शारीरिक रूप से व्रत रखने से इसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता, बल्कि मन से भी शुद्ध और श्रद्धालु रहना आवश्यक है।
मेडिटेशन करें
यदि आप नियमित रूप से एक्सरसाइज, वॉक या वर्कआउट करती हैं तो इस दिन ये सब न करें ताकि आपकी ऊर्जा बनी रहे। इस दिन डीप ब्रीदिंग और मेडिटेशन कर सकती हैं, इससे आप स्वयं को रिलैक्स महसूस कर सकेंगी। मेडिटेशन आपके शरीर में ऊर्जा के स्तर को संतुलित रखने में मदद करेगा।
पूजा की तैयारी
सबसे पहले, आपको पूजा के लिए आवश्यक सामग्री तैयार करनी चाहिए। इसमें रेत या शुद्ध मिट्टी से बने शिवलिंग, भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति, बेलपत्र, धतूरा, फल, फूल, धूप, दीपक, रोली, और चंदन शामिल हैं। इसके अलावा, पूजन स्थल को स्वच्छ और पवित्र रखें।
हरितालिका तीज उपाय
- फोटो : AI
शुद्धता का पालन
हरतालिका तीज का व्रत शुद्धता से जुड़ा होता है। इसलिए, इस दिन शारीरिक और मानसिक शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। स्नान करने के बाद स्वच्छ और सुंदर वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
निर्जला व्रत का पालन
यह व्रत निर्जला होता है, इसलिए इस दिन जल भी नहीं पिया जाता है। हालांकि, अगर आपकी सेहत की वजह से यह संभव न हो, तो आप जल या फिर फल का सेवन कर सकती हैं, लेकिन अन्य किसी प्रकार का आहार लेने से बचना चाहिए।
ध्यान और मंत्र
व्रत के दौरान 'ऊँ नमः शिवाय' और 'ऊँ पार्वतीपतये नमः' मंत्रों का यथासंभव जप करना चाहिए। इससे मन को शांति मिलती है।
पूजा की दिशा
वास्तु के अनुसार पूजा करने के लिए उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा का चयन करना अच्छा माना गया है,शुभ फलों की प्राप्ति के लिए पूजा इसी दिशा में करें।
हरतालिका तीज का व्रत शुद्धता से जुड़ा होता है। इसलिए, इस दिन शारीरिक और मानसिक शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। स्नान करने के बाद स्वच्छ और सुंदर वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
निर्जला व्रत का पालन
यह व्रत निर्जला होता है, इसलिए इस दिन जल भी नहीं पिया जाता है। हालांकि, अगर आपकी सेहत की वजह से यह संभव न हो, तो आप जल या फिर फल का सेवन कर सकती हैं, लेकिन अन्य किसी प्रकार का आहार लेने से बचना चाहिए।
ध्यान और मंत्र
व्रत के दौरान 'ऊँ नमः शिवाय' और 'ऊँ पार्वतीपतये नमः' मंत्रों का यथासंभव जप करना चाहिए। इससे मन को शांति मिलती है।
पूजा की दिशा
वास्तु के अनुसार पूजा करने के लिए उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा का चयन करना अच्छा माना गया है,शुभ फलों की प्राप्ति के लिए पूजा इसी दिशा में करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
हरतालिका तीज
- फोटो : Ai
वस्त्रों का चयन
धार्मिक मान्यता है कि हरतालिका तीज की पूजा में लाल, गुलाबी,हरे,पीले या कोई भी शुभ रंगों के पारंपरिक वस्त्र पहनना अच्छा माना गया है। व्रत के दौरान काले,नीले,भूरे अथवा सफ़ेद रंग के कपडे पहनने से परहेज़ करना चाहिए।
रात्रि जागरण
हरतालिका तीज के दिन रात भर जागरण करने का विशेष महत्व है। इस दौरान आप भजन-कीर्तन कर सकती हैं और भगवान शिव और माता पार्वती की कथा का पाठ कर सकती हैं। इससे आपका मनोबल बढ़ेगा और व्रत का फल भी प्राप्त होगा।
धार्मिक मान्यता है कि हरतालिका तीज की पूजा में लाल, गुलाबी,हरे,पीले या कोई भी शुभ रंगों के पारंपरिक वस्त्र पहनना अच्छा माना गया है। व्रत के दौरान काले,नीले,भूरे अथवा सफ़ेद रंग के कपडे पहनने से परहेज़ करना चाहिए।
रात्रि जागरण
हरतालिका तीज के दिन रात भर जागरण करने का विशेष महत्व है। इस दौरान आप भजन-कीर्तन कर सकती हैं और भगवान शिव और माता पार्वती की कथा का पाठ कर सकती हैं। इससे आपका मनोबल बढ़ेगा और व्रत का फल भी प्राप्त होगा।
गणेश चतुर्थी 2026: गणपति की कृपा पाने के लिए राशि अनुसार करें ये उपाय, जानें किसके लिए क्या चढ़ाना शुभ
विज्ञापन
Lord Shiva and Goddess Parvati
- फोटो : Adobe stock
समय का पालन
व्रत का प्रारंभ और समापन निश्चित समय पर करना चाहिए। व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले और समाप्ति अगले दिन सूर्योदय के बाद की जाती है।
घर के सदस्यों का सहयोग
अगर आप पहली बार यह व्रत रख रही हैं, तो घर के सदस्यों का सहयोग लेना उचित रहेगा। इससे आप मानसिक और शारीरिक रूप से कम थकान महसूस करेंगी और पूजा में पूरी तरह से मन लगा सकेंगी।
व्रत का समापन और पारण
अगले दिन सूर्योदय के समय व्रत का पारण के लिए सबसे पहले भगवान शिव और मां पार्वती की आरती उतारें और उन्हें प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद स्वयं जल और फल का सेवन करके व्रत का पारण करें। इस समय अपने मन में अच्छे विचारों और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता का भाव रखें।
व्रत का प्रारंभ और समापन निश्चित समय पर करना चाहिए। व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले और समाप्ति अगले दिन सूर्योदय के बाद की जाती है।
घर के सदस्यों का सहयोग
अगर आप पहली बार यह व्रत रख रही हैं, तो घर के सदस्यों का सहयोग लेना उचित रहेगा। इससे आप मानसिक और शारीरिक रूप से कम थकान महसूस करेंगी और पूजा में पूरी तरह से मन लगा सकेंगी।
व्रत का समापन और पारण
अगले दिन सूर्योदय के समय व्रत का पारण के लिए सबसे पहले भगवान शिव और मां पार्वती की आरती उतारें और उन्हें प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद स्वयं जल और फल का सेवन करके व्रत का पारण करें। इस समय अपने मन में अच्छे विचारों और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता का भाव रखें।