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काशी के गंगा घाटों पर आज और कल दिखेगा विहंगम नजारा, लोक आस्था के महापर्व पर उमड़ेगी भीड़

Tue, 13 Nov 2018 03:42 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Tue, 13 Nov 2018 03:42 PM IST
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panoramic visuals will be seen on ganga ghat in kashi on the  occasion of chhath puja
chhath - फोटो : अमर उजाला
आस्था के महापर्व छठ की संध्या पर काशी के सात किलोमीटर लंबे घाटों की श्रृंखला पर मंगलवार शाम और बुधवार की सुबह विहंगम नजारा देखने को मिलेगा। ढोल-नगाड़ों की थाप, आतिशबाजी और जगह-जगह मंगलगान होगा। वेदियों पर सर्व मंगल की कामना से जले अखंड दीपों की लौ जन-जन के तन-मन को प्रकाशमान करेगी। मौका होगा, सूर्योपासना के डाला षष्ठी व्रत पर अस्ताचलगामी सूर्य और उगते सूर्य को अर्घ्यदान के लिए अरुणोदय की घड़ियां गिनने का। इस बार इस पूजा में दुर्लभ संयोग बन रहा है। इसलिए इस बार व्रत करने का एक अलग ही माहात्म्य है।  आगे की स्लाइड्स में देखें....
panoramic visuals will be seen on ganga ghat in kashi on the  occasion of chhath puja
varanasi - फोटो : अमर उजाला

काशी में गंगा तट पर राजघाट से विश्वसुंदरी पुल तक व्रतियों की अटूट कतार ऐसे ही भक्तिभावों में रम रहेंगी। गंगा-वरुणा तटों से कुंडों-सरोवरों तक ब्रह्म मुहूर्त में बाजे-गाजे के बीच लोकोत्सव की अनूठी छटा निखरेगी।  लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा रविवार से शुरू हो गया। पहले दिन व्रती महिलाओं ने दिन भर व्रत रखकर पूजा पाठ किया और शाम को परंपरा अनुसार प्रसाद ग्रहण किया। वहीं छठ पूजा के लिए में फल और सामान की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी रही। शाम को गंगा तट पर महिलाओं ने बेदी का पूजन कर दीपक जलाया।
 
panoramic visuals will be seen on ganga ghat in kashi on the  occasion of chhath puja
सूर्य को अर्ध्य देने के लिए उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला

कार्तिक माह में होने वाली छठ पूजा की शुरुआत शुक्ल पक्ष चतुर्थी से हुई। चार दिवसीय इस पर्व का पहला दिन महिलाओं ने नहाय खाय के रूप में मनाया। इसमें जिस घर से पूजा शुरू होने वाली है, सबसे पहले साफ सफाई कर उसे पूजा योेग्य बनाया। स्नान ध्यान के बाद व्रती महिलाओं ने भोजन के रूप में कद्दू दाल और चावल का भोजन किया। इसके बाद घर के सभी सदस्यों ने भोजन किया। वहीं कई महिलाओं ने गंगा स्नान कर वहां बनाई गई बेदी का पूजन किया और दीपक जलाकर आराधना की। 
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छठ पूजा 2018
मंगलवार की शाम पश्चिम के आसमान में लाली छाने के साथ ही हर-हर महादेव और छठी मइया के जयकारे गूंजगे लगेंगे। इसी के साथ अस्ताचलगामी सूर्यदेव को अर्घ्यदान देकर महिलाएं  सूर्योपासना के व्रत-अनुष्ठान को सविधि करेंगी। काशी के गंगा घाटों पर मेले की सतरंगी छटा होगी। हजारों की तादाद में नावों पर सवार होकर विदेशी सैलानी अस्सी से राजघाट तक अर्घ्य देने की व्रतियों की आस्था को निहारेंगे। 
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जानिए छठ पूजा का महत्व और शुभ मुहूर्त - फोटो : self
इस बार इस पूजा में दुर्लभ संयोग बन रहा है। इसलिए इस बार व्रत करने का एक अलग ही माहात्म्य है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह घटना कार्तिक तथा चैत्र मास की अमावस्या के छह दिन उपरांत आती है। ज्योतिषीय गणना पर आधारित होने के कारण इसका नाम और कुछ नहीं, बल्कि छठ पर्व ही रखा गया है। सूर्य षष्ठी व्रत वर्ष में दो बार होता है। 
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