मां दुर्गा के नौ रातों का पर्व नवरात्रि वर्ष में दो बार आता है। इस साल वासंतिक नवरात्र 6 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। यह वासंतिक नवरात्र आठ दिन का होगा। इस बार वासंतिक नवरात्र को लेकर बहुत ही अद्भुत संयोग बन रहा है। जानिए आगे की स्लाइड्स में...
चैत्र शुक्ल पक्ष का बड़ा धार्मिक महत्व है। इसमें नौ दिनों तक मां शक्ति भगवती का व्रत और दुर्गा शप्तशती का पाठ करने से आध्यात्मिक और भौतिक दोषों पर विजय प्राप्त होती है। इस नवरात्र को वासंतिक नवरात्र कहा जाता है। आठ दिन का नवरात्र होने के चलते शक्ति की उपासना के लिए यह नवरात्र बेहद शुभ है।
मान्यता के अनुसार शनिवार को दुर्गापूजा का लाख नहीं करोड़ गुना फल मिलता है। ग्रह स्थिति के अनुसार में स्वगृही गुरु, उच्च स्थान का राहु आदि योग से नवरात्र अत्यंत शुभ माना जा रहा है। अश्व पर आने से राज भंग और भैंसे पर गमन से रोग-शोक की आशंका बनी रहती है।
इस लिए माना जा रहा है कि 2019 में वासंतिक नवरात्र में माता का आगमन अश्व पर और उनका गमन भैंसे पर होगा। लेकिन शनिवार से शुरू होकर शनिवार को समाप्त होने के कारण इस बार यह असर ना के बराबर रहेगा। इसलिए इस बार का नवरात्र विशेष फलदायी माना जा रहा है। इसको लेकर मंदिरों में तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि शनिवार 6 अप्रैल को दिनभर वैधृति योग है। वैधृति योग में कलश स्थापन आदि का निषेध है। ऐसे में दिन में 11:35 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक अभिजित मुहूर्त में कलश स्थापन किया जाएगा। चैत्र शुक्ल नवमी को रामनवमी होती है। मध्याह्न में भगवान राम का जन्म होता है। इसलिए रामनवमी व्रत किया जाता है। इस वर्ष अष्टमी शनिवार 13 अप्रैल को दिन में 8 बजकर 16 मिनट तक ही है। उसके बाद नवमी लग रही है जो दोपहर में है और दूसरे दिन रविवार को नवमी सुबह 6 बजे तक ही है। जबकि सोमवार को एकादशी व्रत भी है। इस कारण से महाष्टमी और रामनवमी दोनों व्रत शनिवार को ही किया जाएगा और व्रत का पारण 14 अप्रैल को सुबह 6 बजे के बाद होगा।