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अपना समय 'अपनी जिंदगी' को भी दें, ये हैं एक्सपर्ट्स के कुछ टिप्स
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 22 Jan 2018 04:25 PM IST
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डॉ. अवध दुबे ने दिए जीवन को उत्सव बनाने के टिप्स
जीवन को उत्सव बनाने के लिए रोज अपना एक प्रतिशत समय अपनी जिंदगी को भी दीजिए। अपने व्यवसायिक कार्यों-नौकरी के साथ परिवार के लिए, व्यक्तिगत जिंदगी के लिए भी नियमित रूप से समय देना आवश्यक है। हमें पूरे वर्ष व्यवस्थित रहने के लिए जीवन के प्रत्येक दिन को संतुलित रखना होगा। यह संदेश ‘द यंग एचीवर्स ग्रुप’(त्याग) संस्था के संस्थापक डॉ. अवध दुबे ने दिया।
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कोई न कोई प्रेरणात्मक कहानी होती है
डॉ. अवध दुबे
कानपुर के मर्चेंट्स चैंबर आफ उत्तर प्रदेश (एमसीयूपी), त्याग, रोटरी क्लब आफ कानपुर मेट्रो की तरफ से मर्चेंट चैंबर में ‘डिजायन योर ईयर-सेलीब्रेट लाइफ’ विषय पर आयोजित प्रेरक सत्र में मोटीवेशनल स्पीकर व वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. अवध दुबे ने जीवन को व्यवस्थित, आनंदमय और सफल बनाने के टिप्स वीडियो के माध्यम से दिए। उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति के जीवन से जुड़ी या घटित कोई न कोई प्रेरणात्मक कहानी होती है। आप दूसरे से मिलें और उस कहानी को साझा करें। ध्यान रखें कि कुछ वक्त सकारात्मक वातावरण में जरूर बिताएं, जिसमें स्वस्थ और प्रेरणात्मक परिचर्चाएं हों।
सकारात्मक पहलुओं को सोचें
मर्चेंट्स चैंबर आफ उत्तर प्रदेश, त्याग, रोटरी क्लब आफ कानपुर मेट्रो का प्रेरक सत्र
मुख्य अतिथि एसबीआई के उप महाप्रबंधक श्याम प्रसाद अंकाला ने बताया कि हम सकारात्मक पहलुओं को सोचें और उन पर चर्चा करें। संचालन महेंद्र मोदी ने किया। इसमें एमसीयूपी के अध्यक्ष बीके लाहोटी, जेएन गुप्ता, पीसी शुक्ला, डॉ. एएस प्रसाद, विजय पांडेय, योगेश अग्रवाल, एससी गर्ग, शेष नारायण त्रिवेदी, डॉ. आईएम रोहतगी, डॉ. आरजी बागला, अविनाश चौबे, प्रेम मनोहर गुप्ता आदि शामिल रहे।
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ये हैं कुछ खास टिप्स
अपना समय अपनी जिंदगी को भी दें
-सुबह एक घंटा ‘मेरा समय’ रखना चाहिए, जिसमें व्यायाम, योग, ध्यान, चिंतन, प्रेरणात्मक साहित्य या वीडियो देखें।
-घर से काम करने के लिए प्रसन्नचित्त होकर निकलें, इसमें परिजनों का सहयोग भी महत्वपूर्ण है।
-कार्यालय पहुंचने पर सीनियर, जूनियर व समकक्ष के साथ टीम भावना से कार्य करें। खुश रहें और उनको भी खुश देखें
-सप्ताह में एक बार अभिन्न मित्र या निकट के व्यक्ति, जिनसे आप बहुत कम मिल पाते हों, से जरूर मिलें। चर्चा करें, सुख-दुख बांटे, हंसी-खुशी समय बिताएं
-वर्ष में लगभग 4 दिन या एक हफ्ते का समय अपने परिजनों, मित्रजनों के साथ अवश्य बिताएं ताकि नई ऊर्जा का संचार हो।
-प्रत्येक दिन में 1440 मिनट का एक प्रतिशत समय सुबह और एक प्रतिशत समय रात में विश्राम से पहले दें तो दिन के कार्य और रात में आराम, दोनों ठीक रहेंगे।
-घर से काम करने के लिए प्रसन्नचित्त होकर निकलें, इसमें परिजनों का सहयोग भी महत्वपूर्ण है।
-कार्यालय पहुंचने पर सीनियर, जूनियर व समकक्ष के साथ टीम भावना से कार्य करें। खुश रहें और उनको भी खुश देखें
-सप्ताह में एक बार अभिन्न मित्र या निकट के व्यक्ति, जिनसे आप बहुत कम मिल पाते हों, से जरूर मिलें। चर्चा करें, सुख-दुख बांटे, हंसी-खुशी समय बिताएं
-वर्ष में लगभग 4 दिन या एक हफ्ते का समय अपने परिजनों, मित्रजनों के साथ अवश्य बिताएं ताकि नई ऊर्जा का संचार हो।
-प्रत्येक दिन में 1440 मिनट का एक प्रतिशत समय सुबह और एक प्रतिशत समय रात में विश्राम से पहले दें तो दिन के कार्य और रात में आराम, दोनों ठीक रहेंगे।