बरेली में बृहस्पतिवार रात डेलापीर फल मंडी में भीषण आग से 28 दुकानों में रखा माल जलकर राख हो गया। मंडी में पानी की व्यवस्था न होने की वजह से करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू जा सका। शुक्रवार सुबह को दुकानों में बर्बादी का मंजर देख आढ़तियों के आंसू छलक पड़े। करोड़ों रुपये के फल जलकर राख हो गए थे। राख से धुआं उठ रहा था। व्यापारियों का कहना था कि मंडी में अगर पानी का इंतजाम होता तो आग हम ही आगे नहीं बढ़ने देते और करोड़ों रुपये के नुकसान से बच जाते।
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डेलापीर मंडी में लगी भीषण आग
- फोटो : अमर उजाला
डेलापीर फल मंडी में बृहस्पतिवार की रात करीब 11 बजे आग लग गई थी। उस वक्त ज्यादातर व्यापारी दुकानें बंद कर घर जा चुके थे। जो लोग वहां मौजूद थे, उन्होंने व्यापारियों को सूचना देने के साथ आग बुझाने के प्रयास किए, लेकिन तब तक आग विकराल हो गई। सूचना देने के 45 मिनट बाद दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। मंडी में पानी न होने की वजह से दमकल को बाहर से पानी लाना पड़ा। देर रात करीब दो बजे आग पर काबू पाया जा सका था।
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मंडी में जले पड़े फल
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार सुबह जब लोग मंडी पहुंचे तो बर्बादी का मंजर देख सन्न रह गए। दुकानों के लिंटर चटके हुए थे। क्षतिग्रस्त हो चुकी दीवारें व्यापारियों की बढ़ने वाली परेशानियों को उजागर कर रही थीं। दुकानों में जले हुए फलों का ढेर लगा हुआ था। व्यापारी और कर्मचारी दिनभर राख और जले फल हटाने में जुटे रहे।
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मंडी में जले पड़े फल
- फोटो : अमर उजाला
व्यापारियों का कहना था कि मंडी में अगर पानी का इंतजाम होता तो आग हम ही आगे नहीं बढ़ने देते और करोड़ों रुपये के नुकसान से बच जाते। उन्होंने कहा कि हम पीने का पानी भी मोल लेकर आते हैं, मंडी परिसर में कई वर्षों से एक नल तक नहीं लगाया गया है। यही वजह है जिसके कारण से आग से करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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मंडी में बिखरे पड़े फल
- फोटो : अमर उजाला
व्यापारियों की नाराजगी और करोड़ों रुपये का नुकसान होने की सूचना पर लखनऊ से मंडी परिषद के डायरेक्टर भी पहुंचे और उन्होंने दौरा कर अधिकारियों को जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं। वहीं जल्द से जल्द आंकलन कर नुकसान का आंकड़ा भी मुहैया कराने को कहा है, जिससे मुआवजा देने की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सके।