कुंभ के सबसे बड़े स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर पुण्य की डुबकी लगाने के लिए दो दिन पहले ही शुक्रवार को देश-दुनिया से श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। देर शाम तक लाखों की तादाद में श्रद्धालु प्रयागराज पहुंच गए। इससे संगम से लेकर शिविरों तक तांता लगा रहा। शहर के होटल, पेइंग गेस्ट से लेकर धर्मशालाओं, मठों, बाबाओं के शिविरों से लेकर टेंट सिटी तक सब फुल हो गया है।
कहीं जगह नहीं लग गई है। मेला प्रशासन ने शुक्रवार को मौनी अमावस्या पर तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया। अरैल से फाफामऊ के बीच 41 घाटों पर संगम स्नान होगा। नए घाटों के विस्तार के साथ ही सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
मौनी अमावस्या पर तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ आने के अनुमान के बाद प्रशासन चौक-चौबंद इंतजामों में जुट गया है। लाखों की तादाद में लोग बसों, ट्रेनों, निजी वाहनों से शुक्रवार को ही पहुंच गए। कुंभ मेला क्षेत्र जाने वाले पांटून पुलों पर लंबी कतारें लगी रहीं। लोग सिर पर गठरी, झोला और अन्य सामान लेकर शिविरों में पहुंचते रहे।
कल्पवासियों के शिविरों से लेकर आध्यात्मिक संस्थाओं और अखाड़ों से टेंट तक संतों-भक्तों की भारी भीड़ डेरा जमाने लगी है। टूरिज्म और होटल इंडस्ट्रीज से जुड़ी विभा मिश्रा ने बताया कि मौनी अमावस्या पर होटलों में बुकिंग फुल हो गई है। कहीं भी कमरे खाली नहीं हैं। होटल फुल होने से तमाम लोगों को शिविरों या परिचितों, रिश्तेदारों के यहां ठहराने की व्यवस्था की जा रही है।
होटल इंडस्ट्री के संचालक योगेश गोयल बताते हैं कि फरवरी लगते ही भीड़ बढ़ गई है। हालांकि बाहर से आने वाले यात्रियों की पहली पसंद टेंट सिटी ही है, फिर भी होटलों फुल हो गए हैं। यही हाल संतों के शिविरों का भी है। वहां पहले से ही अनुयायियों ने अपने से लिए कॉटेज सुरक्षित करा लिए हैं। कुंभ मेला प्रशासन के अनुसार इस बार अरैल से फाफामऊ के बीच 41 घाटों पर संगम स्नान की व्यवस्था की गई है। हर घाट पर चेंजिंग रूम के साथ ही जाल के साथ बैरीकेडिंग कराई गई है, ताकि कोई भी फिसलने या गहरे पानी में न जाने पाए।