फेसबुक पर हुए प्रेम के चक्कर में 'हत्यारी' बनी थी महिला, पति और मासूम बेटे को दी थी दर्दनाक मौत
घटना 20 जनवरी 2016 की है, जब रात में ओम प्रकाश यादव और उनके पुत्र शिवा उर्फ नितिन की घर की ऊपरी मंजिल पर ही हत्या की गई थी। पुलिस ने मृतक ओम प्रकाश की मां बागेश्वरी देवी की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू की तो पता चला कि कातिल कोई और नहीं बल्कि ओम प्रकाश यादव की पत्नी अर्चना ही है। उसने शाहजहांपुर के फिरोजाबाद निवासी अपने प्रेमी अजय यादव के साथ मिलकर पहले पति की हत्या की थी फिर बचने के लिए गोद में आए बेटे को भी गला दबाकर मौत के घाट उतार दिया था।
शहर का चर्चित हत्याकांड, उलझ गई थी पुलिस
जिस वक्त यह घटना हुई थी, उस समय जनपद में सनसनी फैल गई थी। पुलिस को केस की विवेचना फूंक-फूंक कर करनी थी, क्योंकि मामला पूरी तरह से हाईप्रोफाइल था। अर्चना के पिता उस समय सीएम सिक्योरिटी में तैनात थे तो मृतक ओम प्रकाश के बड़े भाई यूपी पुलिस में इंस्पेक्टर। इस वजह से पुलिस को केस सुलझाने में थोड़ा समय जरूर लगा था, मगर साक्ष्यों के साथ आरोपी पकड़े गए थे जिस वजह से शनिवार को सजा हो गई।
देखने को कचहरी के अंदर-बाहर जुट गई थी भीड़
दोनों आरोपियों को 23 जनवरी 2016 को कोर्ट में पुलिस ने पेश किया था। इसके पहले प्रेस कांफ्रेंस की जा चुकी थी और लोग जान चुके थे कि मासूम बेटे और पति की कातिल अर्चना ही है। उसे और उसके प्रेमी को देखने के लिए अधिवक्ता ही नहीं, आम लोगों में भी होड़ मच गई थी। कचहरी के अंदर अधिवक्ताओं ने घेर लिया तो पांच थाने की फोर्स बुलानी पड़ी थी। बाहर लोगों की भीड़ को रोक पाना मुश्किल हो रहा था। तब पुलिस ने दोनों आरोपियों का चेहरा लोगों को दिखाया और फिर लोग वहां से हटे।
अजय यादव से अर्चना की दोस्ती फेसबुक के जरिए हुई थी। दोनों में प्रेम इस कदर बढ़ गया था कि बात अर्चना के पति और बेटे की हत्या तक पहुंच गई थी। हत्या वाले दिन अर्चना पति से सिर दर्द का बहाना बनाकर अलग कमरे में सोने चली गई थी। रात में प्रेमी के आने पर उसने ही दरवाजा खोला था। दोनों ने मिलकर मुंह दबाया था और फिर सिर पर हमला कर पति ओमप्रकाश को मौत के घाट उतार दिया था। इस घटना के दौरान बेटा जग गया था और डर कर मां की गोद में आ गया था। बेटा सबकुछ किसी को बता न दे इस वजह से अर्चना ने ही उसकी गला दबाकर हत्या कर दी थी। हालांकि अजय ने बच्चे की हत्या का विरोध भी किया था, लेकिन अर्चना नहीं मानी।