गोरखपुर: दुष्कर्म के अभियुक्त को पीड़ित लड़की के पिता ने मारी गोली, बोला- घुट-घुट कर जीने से अच्छा है जेल

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 22 Jan 2022 10:30 AM IST
गोरखपुर दीवानी कचहरी हत्याकांड
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‘मुझे दिलशाद की हत्या करने का कोई पछतावा नहीं है। घुट-घुटकर जीने से अच्छा है जेल में रहना। फांसी चढ़ जाना।’ पुलिस को यह बयान दिया है दीवानी कचहरी में शुक्रवार दोपहर दुष्कर्म के अभियुक्त की हत्या करने के आरोपी दुष्कर्म पीड़िता के पिता ने। उसने दावा किया कि समाज के ताने और दिलशाद की हरकतों से आजिज आकर यह कदम उठाया।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने हत्यारोपी दुष्कर्म पीड़िता के पिता का बयान दर्ज किया है। बयान के मुताबिक, हत्यारोपी ने कहा है कि समाज के ताने सुन-सुनकर वह इतना परेशान हो गया था कि आत्महत्या करने की सोचने लगा था। इस बीच जमानत पर छूटे दिलशाद की हरकतों ने मेरी परेशानी को गुस्से में बदल दिया। खुदकुशी करने से परिवार का भविष्य खराब होने के डर से इरादा बदल दिया। सोचा क्यों न परेशानी की वजह को ही जड़ से खत्म कर दिया जाए और उसकी हत्या कर दी।  
 
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हत्यारोपी ने बताया कि एक समय था कि घर में कोई काम पड़ने पर दिलशाद मदद करता था, लेकिन समय के साथ उसके तौर तरीके बिगड़ते गए। दिलशाद उसके घर के सामने ही पंचर की दुकान लगाता था। उसे समझाया और डांटा भी। इसके बाद वह दुकान बंद कर गोला जाकर काम करने लगा था। लेकिन, उसकी हरकतों में सुधार नहीं आया। एक दिन बेटी कॉलेज से घर आ रही थी, तभी उसे जबरन लेकर हैदराबाद चला गया। पुलिस ने छह दिन बाद केस दर्ज किया था। लड़की को हैदराबाद से बरामद किया। दिलशाद जेल गया। मैं दो साल पहले ही सेना से सेवानिवृत्त हुआ था। जब भी कहीं जाता था, बेटी के बारे में लोग कानाफूसी करते थे। इस कारण घर से बाहर भी नहीं निकलता था। किसी तरह परिवार वालों ने संभाला।

जब तक दिलशाद जेल में था, तब तक तो ठीक था। जेल से बाहर आते ही वह मुझे और बेटी को परेशान करने लगा। कभी घर के बाहर आकर जोर-जोर से चिल्लाता तो कभी कुछ और हरकत करता था। इससे मुझे गुस्सा आता था, लेकिन लड़की की गलती भी लगती थी। इसी बीच खुदकुशी का ख्याल मन में आया, लेकिन फिर सोचा कि मेरे बाद परिवार का क्या होगा? दिलशाद सबका जीना मुश्किल कर देगा। इसके बाद कांटे को ही रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया। बेटी के अपमान व प्रताड़ना का बदला ले लिया है। अब बेटी या परिवार को कोई परेशान नहीं करेगा।  
 
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मृतक की फाइल फोटो
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धर्म छुपाकर बढ़ाई थी नाबालिग से नजदीकी

नाबालिग लड़की हिंदू थी। इस वजह से आरोपी ने धर्म छुपाकर नजदीकी बढ़ाई थी। इसकी चर्चा होती थी। हालांकि, नाबालिग के पिता ने दर्ज कराए मुकदमे में इसका जिक्र नहीं किया था। यही वजह थी कि पुलिस ने मामले में इस धारा के तहत केस नहीं दर्ज किया था। पुलिस बहला-फुसला कर भगाने का केस दर्ज किया था। लड़की के मिलने के बाद नाबालिग होने के चलते दुष्कर्म और पॉक्सो की धारा बढ़ाई गई थी।

किशोरी को भागाया था दिलशाद ने

पुलिस की जांच में पता चला है कि दिलशाद नाबालिग को बड़हलगंज से हैदराबाद ले जाने के लिए हवाई जहाज का इस्तेमाल किया था। वह एयर टिकट लेकर आया था, फिर किशोरी को बहला कर लखनऊ ले गया था। वहां से हवाई जहाज से हैदराबाद गया था। यही वजह थी कि कई दिनों तक, पुलिस कोई सुराग नहीं लगा सकी थी। बाद में पिता ने ही पुलिस को बताया था। पुलिस के साथ हैदराबाद भी गया था। हैदराबाद में दिलशाद जहां पर रहता था, वहां से उसे पकड़ने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। स्थानीय लोगों से पुलिस घिर गई थी। इसके बाद हैदराबाद पुलिस की मदद से बड़हलगंज पुलिस, आरोपी को पकड़ पाई थी।
 
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लाइसेंसी असलहा क्यों नहीं जमा कराया, यह भी सवाल

घटना के बाद पुलिस की लाइसेंसी असलहों को जमा कराने की मुहिम का सच भी सामने आ गया है। घटना में हत्यारोपी पिता ने लाइसेंसी पिस्टल का इस्तेमाल किया है, जो उसके नाम पर थी। चुनाव आचार संहिता के तहत, पुलिस मुहिम चलाकर लाइसेंसी असलहों को जमा करा रही है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। इसे लेकर बड़हलगंज पुलिस पर सवाल उठ रहा है।

नवंबर में बंद करा दिया गया था गेट, फिर खुल गया

एसपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि पार्किंग के पास सुरक्षा की वजह से अधिवक्ता को छोड़कर अन्य लोगों के लिए मुख्य गेट को नवंबर में बंद कराया गया था। सुरक्षा के लिहाज से लिए गए इस फैसले के बाद, तीन दिन तक गेट बंद था, लेकिन बाद में अधिवक्ताओं के विरोध पर गेट खुल गया।

अधिवक्ता ने मांगी सुरक्षा

दिलशाद के अधिवक्ता शंकर शरण शुक्ला ने अपनी सुरक्षा की मांग की है। खबर है कि जिला जज ने अधिवक्ता को सुरक्षा देने के लिए एसएसपी को निर्देशित किया है।
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सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी है, अधिवक्ताओं में आक्रोश

बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट के अध्यक्ष भानु प्रताप पांडेय ने घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि सिविल कोर्ट में जो सुरक्षा व्यवस्था है, वह नाकाफी है। अपराधी असलहे के साथ कैसे आ गया, यह जांच का विषय है। इसकी जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए। इससे अधिवक्ताओं में आक्रोश है। एसोसिएशन के अध्यक्ष भानु पांडेय व मंत्री अनुराग दुबे ने संयुक्त रूप से कहा कि अधिवक्ता नाराज हैं। सोमवार सुबह 11 बजे एसोसिएशन के सभागार में साधारण सभा की बैठक बुलाई गई है। इसमें आगे की रणनीति का एलान किया जाएगा।

कचहरी की सुरक्षा में तैनात हैं 48 पुलिसकर्मी, लगेगा स्कैनर

कचहरी परिसर की सुरक्षा में एक इंस्पेक्टर, चार एसआई, दो हेड कांस्टेबल सहित 48 पुलिसकर्मी तैनात हैं। एसपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि मुख्य गेट के पास पार्किंग के पास भी स्कैनर लगाने और सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी है। इसे जल्द पूरा कर दिया जाएगा।

गुस्साए अधिवक्ताओं ने एक घंटे तक नहीं उठाने दिया शव

कचहरी पार्किंग में सरेआम हुई हत्या की घटना के बाद गुस्साए, अधिवक्ताओं ने एक घंटे तक प्रदर्शन किया। सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए, उन्होंने शव उठाने से रोक दिया। सूचना के बाद एडीजी, डीआईजी और एसएसपी सहित अन्य अधिकारी फोरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जिला जज के हस्तक्षेप के बाद अधिवक्ता शांत हुए और पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।


 
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