दिल्ली: ढांसा बॉर्डर से वजीराबाद तक बनेगा 61 किमी लंबा कॉरिडोर, पीडब्ल्यूडी ने शुरू की प्रक्रिया
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने इसके लिए एक्सपर्ट कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। करीब 19.62 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली कंसल्टेंसी के तहत 61 किलोमीटर क्षेत्र का ट्रैफिक और तकनीकी अध्ययन कराया जाएगा।
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राजधानी के एक छोर से दूसरे छोर तक आवाजाही सुगम बनाने के लिए नजफगढ़ ड्रेन के दोनों किनारों पर 61 किलोमीटर लंबे सड़क कॉरिडोर की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। ढांसा बॉर्डर से वजीराबाद तक प्रस्तावित इस कॉरिडोर में जगह और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कहीं एलिवेटेड तो कहीं एट-ग्रेड (सतह पर) सड़क विकसित करने के विकल्पों का अध्ययन किया जाएगा। इसका उद्देश्य मौजूदा सड़कों पर यातायात का दबाव घटाने के साथ विभिन्न इलाकों के बीच सीधी कनेक्टिविटी बढ़ाना है।
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने इसके लिए एक्सपर्ट कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। करीब 19.62 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली कंसल्टेंसी के तहत 61 किलोमीटर क्षेत्र का ट्रैफिक और तकनीकी अध्ययन कराया जाएगा। यह काम 120 दिन में पूरा किया जाना है। अध्ययन के आधार पर सड़क के स्वरूप, लेन की संख्या, जंक्शन और सर्विस रोड की जरूरत समेत निर्माण से जुड़े प्रमुख पहलुओं पर फैसला होगा।
माइक्रो-सिमुलेशन भी कराया जा सकता है
परियोजना में प्रमुख इंटरसेक्शन और मिड-सेक्शन का विस्तृत डिजाइन भी तैयार होगा। जरूरत पड़ने पर यातायात की वास्तविक स्थिति और संभावित सुधारों को समझने के लिए माइक्रो-सिमुलेशन कराया जा सकता है। धीमी गति वाले वाहनों और अलग-अलग दिशाओं से होने वाले क्रॉस मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए जंक्शन पर यातायात प्रबंधन के समाधान सुझाए जाएंगे।
जमीन और यूटिलिटी की भी होगी पड़ताल
कॉरिडोर के लिए उपलब्ध जमीन का आकलन अध्ययन का अहम हिस्सा होगा। कंसल्टेंट को यह पता लगाना होगा कि कहां अतिरिक्त जमीन की जरूरत पड़ेगी और संभावित भूमि अधिग्रहण पर कितना खर्च आएगा। सड़क निर्माण की राह में आने वाली मौजूदा यूटिलिटी की पहचान कर उनके स्थानांतरण और उससे जुड़ी लागत का भी आकलन किया जाएगा।
मौजूदा मार्गों का दबाव घटाने की उम्मीद
नजफगढ़ और आसपास के इलाकों में मौजूदा सड़क नेटवर्क पर यातायात दबाव एक बड़ी चुनौती है। नजफगढ़-फिरनी रोड पर अतिक्रमण से प्रभावी सड़क चौड़ाई कम होने, बसों और बस डिपो के कारण जाम तथा कई जगह पार्किंग से यातायात बाधित होने की समस्याएं सामने आती रही हैं। ऐसे में ड्रेन के दोनों किनारों पर नया सड़क नेटवर्क विकसित होने से वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो सकते हैं। इससे विभिन्न इलाकों के बीच संपर्क बेहतर होने और प्रमुख व्यस्त सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होने की उम्मीद है।
विकल्पों से तलाशे जाएंगे व्यावहारिक समाधान
कंसल्टेंट को पहले ट्रैफिक और स्थल सर्वे करना होगा। इसके बाद दो से तीन वैकल्पिक कॉन्सेप्चुअल प्लान तैयार किए जाएंगे। इनमें प्रत्येक विकल्प की अनुमानित लागत और निर्माण अवधि बताने के साथ सबसे व्यावहारिक योजना की सिफारिश करनी होगी। फिलहाल यह तय नहीं है कि पूरा कॉरिडोर एलिवेटेड होगा या जमीन पर। अलग-अलग हिस्सों की परिस्थितियों के मुताबिक दोनों विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है।