{"_id":"675a841e99dc3e2382092c46","slug":"auspicious-yog-in-kundali-dhan-yog-in-kundli-make-rich-and-successful-2024-12-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dhan Yog : जिनकी कुंडली में बने जब यह धन योग, जीवन में व्यक्ति को खूब मिलता है धन और प्रसिद्धि","category":{"title":"Predictions","title_hn":"बोले तारे","slug":"predictions"}}
Dhan Yog : जिनकी कुंडली में बने जब यह धन योग, जीवन में व्यक्ति को खूब मिलता है धन और प्रसिद्धि
Thu, 12 Dec 2024 12:06 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 12 Dec 2024 12:06 PM IST
सार
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में कई तरह के शुभ योगों का निर्माण होता है, जिसमें धन योग का खास महत्व होता है। जिन लोगों की कुंडली में धन योग होता है, उस व्यक्ति की आर्थिक स्थिति बहुत ही मजबूत होती है।
विज्ञापन
कुंडली में कब-कब बनता है धन योग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Dhan Yog : ज्योतिष शास्त्र को वेदों का नेत्र कहा गया है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब किसी जातक या जातिका का जन्म होता है तो उस समय आकाश मंडल में मौजूद ग्रहों और नक्षत्रों के संयोग से कुंडली का निर्धारण होता है। जन्म के समय कुंडली में मौजूद ग्रह कई तरह के राजयोगों का निर्माण करते हैं। कुंडली में शुभ योग बनने से व्यक्ति बहुत ही धनी, सुखी, समृद्धिशाली, वैभवशाली और प्रसिद्धि को प्राप्त करता है। कुंडली में राजयोग बनने से व्यक्ति जीवन में हर तरह की सफलता को हासिल करता है। शुभ योग बनने से व्यक्ति के जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं रहती हैं। आइए जानते हैं कौन-कौन से शुभ योग होते हैं और कैसे बनते हैं।
कुंडली में बनने वाले शुभ योग
1- वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में लग्न और लग्नेश को बहुत शक्तिशाली माना जाता है। कुंडली के पहले भाव के स्वामी को लग्नेश कहते हैं और जब लग्नेश का संबंध धनेश, चतुर्थेश, पंचमेश, भाग्येश, दशमेश और लाभेश से हो तो व्यक्ति के जीवन में कभी भी धन की कोई कमी नहीं होती है। ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में हमेशा आर्थिक रूप से मजबूत रहता है।
2- वैदिक ज्योतिष शास्त्र के एक सूत्र के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में भाग्येश यानी नवम भाव के स्वामी का संबंध लग्नेश, धनेश, चतुर्थेश, पंचमेश, दशमेश और लाभेश से हो जाय तो ऐसा व्यक्ति बड़ा ही भाग्यशाली होता है। भाग्य के सहारे व्यक्ति खूब धन-दौलत, ऐशोआराम और सुख-सुविधा की प्राप्ति करता है। ऐसा व्यक्ति अपनी अच्छी किस्मत के बल पर खूब आगे बढ़ता और तरक्की करता है।
विज्ञापन
3- वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली का दशम भाव बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में अगर किसी जातक की कुंडली में दशमेश यानी कर्म स्थान के स्वामी का योग लग्नेश, धनेश, चतुर्थेश, पंचमेश, भाग्येश या लाभेश के साथ हो जातक बहुत ही धनवान और गुणी होता है। जीवन में लगातार धन कमाते रहते हैं और संचय भी करते हैं।
4- जब किसी जातक की जन्मपत्री में लाभेश यानी कुंडली के ग्यारहवें भाव के स्वामी का संबंध लग्नेश, चतुर्थेश, द्वितीयेश, पंचमेश, नवमेश और दशमेश के साथ बने तो धन योग का निर्माण होता है। इस तरह की कुंडली के जातक का जीवन सुखी और संपन्नता से भरा हुआ होता है। ऐसे लोग जीवन के सभी भौतिक सुखों का आनंद प्राप्त करने में कामयाब होते हैं।
5- इसके अलावा कुंडली में कई अन्य तरह के योग भी बनते हैं जिससे व्यक्ति धनवान होता है। ये योग हैं पंचमहापुरुष योग, लक्ष्मी योग और श्रीयोग। इस तरह के योग बनने पर व्यक्ति का जन्म अगर गरीब परिवार में भी होता है तो वह आगे चलकर खूब धन-दौलत और मान-सम्मान को प्राप्त करता है।
यह भी पढ़ें- आज का राशिफल और वार्षिक राशिफल 2025
विज्ञापन
कुंडली में बनने वाले शुभ योग
1- वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में लग्न और लग्नेश को बहुत शक्तिशाली माना जाता है। कुंडली के पहले भाव के स्वामी को लग्नेश कहते हैं और जब लग्नेश का संबंध धनेश, चतुर्थेश, पंचमेश, भाग्येश, दशमेश और लाभेश से हो तो व्यक्ति के जीवन में कभी भी धन की कोई कमी नहीं होती है। ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में हमेशा आर्थिक रूप से मजबूत रहता है।
विज्ञापन
2- वैदिक ज्योतिष शास्त्र के एक सूत्र के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में भाग्येश यानी नवम भाव के स्वामी का संबंध लग्नेश, धनेश, चतुर्थेश, पंचमेश, दशमेश और लाभेश से हो जाय तो ऐसा व्यक्ति बड़ा ही भाग्यशाली होता है। भाग्य के सहारे व्यक्ति खूब धन-दौलत, ऐशोआराम और सुख-सुविधा की प्राप्ति करता है। ऐसा व्यक्ति अपनी अच्छी किस्मत के बल पर खूब आगे बढ़ता और तरक्की करता है।
विज्ञापन
3- वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली का दशम भाव बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में अगर किसी जातक की कुंडली में दशमेश यानी कर्म स्थान के स्वामी का योग लग्नेश, धनेश, चतुर्थेश, पंचमेश, भाग्येश या लाभेश के साथ हो जातक बहुत ही धनवान और गुणी होता है। जीवन में लगातार धन कमाते रहते हैं और संचय भी करते हैं।
4- जब किसी जातक की जन्मपत्री में लाभेश यानी कुंडली के ग्यारहवें भाव के स्वामी का संबंध लग्नेश, चतुर्थेश, द्वितीयेश, पंचमेश, नवमेश और दशमेश के साथ बने तो धन योग का निर्माण होता है। इस तरह की कुंडली के जातक का जीवन सुखी और संपन्नता से भरा हुआ होता है। ऐसे लोग जीवन के सभी भौतिक सुखों का आनंद प्राप्त करने में कामयाब होते हैं।
5- इसके अलावा कुंडली में कई अन्य तरह के योग भी बनते हैं जिससे व्यक्ति धनवान होता है। ये योग हैं पंचमहापुरुष योग, लक्ष्मी योग और श्रीयोग। इस तरह के योग बनने पर व्यक्ति का जन्म अगर गरीब परिवार में भी होता है तो वह आगे चलकर खूब धन-दौलत और मान-सम्मान को प्राप्त करता है।
यह भी पढ़ें- आज का राशिफल और वार्षिक राशिफल 2025