बाबा महाकाल की पहली सवारी के दौरान पालकी के 30 मिनट देरी से मंदिर पहुंचने को लेकर मंदिर प्रशासन ने पुजारी और कहारों को जिम्मेदार ठहराया था। अधिकारियों का कहना था कि इन्हीं की वजह से बाबा महाकाल की सवारी निर्धारित समय पर मंदिर नहीं पहुंच सकी। हालांकि, अब इस बयान का पुजारी और कहारों ने विरोध किया है। उन्होंने आरोप को निराधार बताते हुए माफी की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही माफी नहीं मांगी गई, तो अगली सवारी में वे काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे।
इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर पुजारियान समिति के महामंत्री पं. महेश पुजारी ने कहा कि पालकी को उठाने वाले कहार और उसके साथ चलने वाले पुजारी पूरी श्रद्धा और मेहनत से सवारी में सहभागी होते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी होती है कि अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के पालकी स्वरूप के दर्शन हो सकें। ना तो पुजारी और ना ही कहार सवारी में किसी तरह की देरी कर सकते हैं, क्योंकि सवारी के दौरान पुलिस द्वारा नियंत्रित गति से ही पालकी आगे बढ़ती है, और हमें भी उसी गति के साथ चलना पड़ता है।
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पंडित महेश पुजारी ने बताया कि पुजारी और कहारों पर लगाए गए आरोपों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति के अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज करवाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के बेबुनियाद आरोप न केवल आहत करने वाले हैं, बल्कि उन लोगों की भावना का भी अपमान है जो निःस्वार्थ सेवा में लगे रहते हैं।
माफी नहीं तो विरोध में उतरेंगे पुजारी और कहार
मंदिर के पुजारी और कहारों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सवारी में देरी के लिए उन्हें दोषी ठहराना पूरी तरह अनुचित है। उनका कहना है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलकर पूरी घटना से अवगत कराएंगे। यदि दोषारोपण करने वाले अधिकारी शीघ्र ही सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो अगली सवारी के दौरान सभी पुजारी, पुरोहित और कहार काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराएंगे।