मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के इटारसी स्थित मुस्कान बालिका गृह से तीन साल के भीतर पांच नाबालिग बालिकाओं के लापता होने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि अलग-अलग समय पर बालिकाओं के गायब होने के बावजूद तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। अब एक साथ पांच मामलों में गुमशुदगी और अपहरण से संबंधित प्रकरण दर्ज किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक ने पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। घटना ने बालिका गृह की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के अनुसार इटारसी स्थित मुस्कान बालिका गृह से वर्ष 2024 से जून 2026 के बीच पांच नाबालिग बालिकाएं अलग-अलग तिथियों में लापता हुईं। इनमें 17 वर्षीय एक किशोरी को 9 जुलाई 2024 को खंडवा बाल कल्याण समिति ने बालिका गृह भेजा था, लेकिन वह अगले ही दिन 10 जुलाई को गायब हो गई। दूसरी 16 वर्षीय किशोरी 20 सितंबर 2024 को संस्था में आई और 10 दिसंबर 2025 की सुबह लापता हो गई। 18 सितंबर 2025 को संस्था में लाई गई 17 वर्षीय किशोरी भी 10 दिसंबर 2025 को गायब हो गई। वहीं 24 जुलाई 2025 को बालिका गृह पहुंची 16 वर्षीय किशोरी उसी दिनांक 10 दिसंबर 2025 की शाम सात से आठ बजे के बीच लापता हो गई। इसके अलावा 13 वर्षीय अन्य बालिका 14 जून 2026 को संस्था से गायब हो गई। इन सभी मामलों में शुक्रवार रात बालिका गृह की केयरटेकर ने इटारसी थाने में आवेदन दिया, जिसके बाद भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 137(2) के तहत पांच अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं।
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बालिका गृह के संचालक मनीष ठाकुर ने बताया कि बालिकाओं के लापता होने की जानकारी समय-समय पर पुलिस, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और बाल कल्याण समिति को दी गई थी। उनका कहना है कि समीक्षा बैठकों में एफआईआर दर्ज नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया था। पुलिस अधीक्षक के निर्देश के बाद अब सभी मामलों में एक साथ एफआईआर दर्ज कराई गई है। इधर, इटारसी थाना प्रभारी सौरभ पांडे ने बताया कि आवेदन प्राप्त होने के बाद पांचों मामलों में अपराध दर्ज कर लिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने एसआईटी गठित की है, जो पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी। साथ ही लापता बालिकाओं की तलाश के लिए पुलिस ने अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक के बाद एक नाबालिग बालिकाएं बालिका गृह से लापता होती रहीं, तब नियमानुसार तत्काल एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कराई गई। एसआईटी की जांच से यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे मामले में लापरवाही किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।