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एमपी: छात्रों की गूंज का प्लान ‘डीकोड’, एक तीर से कई निशाने साधेंगे राहुल गांधी, जानें इंदौर को ही क्यों चुना?
Wed, 16 Sep 2026 10:06 AM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 16 Sep 2026 10:06 AM IST
सार
19 सितंबर को इंदौर में राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्रों से संवाद करेंगे। कार्यक्रम के लिए इंदौर के चयन के पीछे युवा वोटरों के साथ मालवा-निमाड़ और राष्ट्रीय राजनीति को साधने की रणनीति भी देखी जा रही है।
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छात्रों की गूुुंज से राहुल गांधी साधेंगे युवा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में 19 सितंबर को होने जा रहे राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस तैयारियों में जुटी है। पार्टी इस कार्यक्रम के जरिए सिर्फ छात्रों और युवाओं से संवाद तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि मालवा-निमाड़ के राजनीतिक समीकरण, इंदौर के कारोबारी वर्ग और राष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश की छवि से जुड़े मुद्दों को भी साधने की तैयारी में है। यही वजह है कि कार्यक्रम के लिए इंदौर का चयन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले मध्य प्रदेश में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिनकी चर्चा प्रदेश के बाहर भी हुई है। ऐसे में चर्चा है कि छात्रों और युवाओं के सवालों के साथ राहुल गांधी मंच से प्रदेश से जुड़े इन मुद्दों को भी उठा सकते हैं।
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आर्थिक राजधानी से कारोबारी वर्ग तक पहुंच
इंदौर को मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी माना जाता है। शहर में बड़ा कारोबारी और औद्योगिक वर्ग है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था, निवेश और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर इंदौर का प्रभाव है। ऐसे में राहुल गांधी का यहां छात्रों के बीच कार्यक्रम करना युवाओं के साथ-साथ शहर के कारोबारी और मध्यम वर्ग तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने के माध्यम के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इंदौर का राजनीतिक प्रभाव केवल शहर तक सीमित नहीं है। मालवा क्षेत्र में होने वाली राजनीतिक गतिविधियों का असर आसपास के जिलों पर भी दिखाई देता है।
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यूथ सेंटर के रूप में इंदौर
इंदौर लंबे समय से शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बड़े केंद्र के रूप में पहचान बना चुका है। यहां आईआईटी और आईआईएम जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान हैं। मध्य प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों से भी विद्यार्थी यहां पढ़ने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं। ऐसे में ‘छात्रों की गूंज’ के लिए इंदौर का चयन कर कांग्रेस को सीधे उस युवा वर्ग से संवाद का अवसर देता है, जो शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती और भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर सक्रिय है। यही युवा वर्ग 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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मालवा-निमाड़ को साधने की कोशिश
इंदौर को चुनने का एक बड़ा राजनीतिक कारण मालवा-निमाड़ भी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में इंदौर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी के नाम वापसी के बाद मुकाबला एकतरफा हो गया था। विधानसभा चुनाव 2023 में भी इंदौर जिले की विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसे में कांग्रेस के लिए इंदौर सिर्फ एक कार्यक्रम स्थल नहीं, बल्कि मालवा-निमाड़ में राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश भी माना जा रहा है। राहुल गांधी का छात्रों से संवाद शहर के युवाओं के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों को राजनीतिक संदेश से पार्टी की जमीन मजबूत करने के रूप में देखा जा रहा है।
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प्रदेश के इन मुद्दों को उठाएंगे राहुल
मध्य प्रदेश में दूषित पानी से मौत की घटना ने भी प्रदेश की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं। इंदौर को स्वच्छता के क्षेत्र में देश में अलग पहचान मिली है। ऐसे शहर में दूषित पानी से मौत जैसी घटना का मुद्दा उठा कर सरकार को घेर सकते हैं। इसके अलावा राहुल गांधी यहां से छिंदवाड़ा में कफ सिरप कांड, बालाघाट में बैगा बच्चों की मौत, सागर जहरीली शराब से हुई मौत के मुदे भी अपने भाषण में उठा कर सरकार को घेरेंगे। साथ ही शिक्षा और रोजगार से लेकर शहर की व्यवस्थाओं, मालवा-निमाड़ की राजनीति और मध्य प्रदेश की मौजूदा घटनाओं तक कई मुद्दों को राहुल गांधी अपने भाषण में उठाने की चर्चा हैं।
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आर्थिक राजधानी से कारोबारी वर्ग तक पहुंच
इंदौर को मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी माना जाता है। शहर में बड़ा कारोबारी और औद्योगिक वर्ग है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था, निवेश और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर इंदौर का प्रभाव है। ऐसे में राहुल गांधी का यहां छात्रों के बीच कार्यक्रम करना युवाओं के साथ-साथ शहर के कारोबारी और मध्यम वर्ग तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने के माध्यम के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इंदौर का राजनीतिक प्रभाव केवल शहर तक सीमित नहीं है। मालवा क्षेत्र में होने वाली राजनीतिक गतिविधियों का असर आसपास के जिलों पर भी दिखाई देता है।
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यूथ सेंटर के रूप में इंदौर
इंदौर लंबे समय से शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बड़े केंद्र के रूप में पहचान बना चुका है। यहां आईआईटी और आईआईएम जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान हैं। मध्य प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों से भी विद्यार्थी यहां पढ़ने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं। ऐसे में ‘छात्रों की गूंज’ के लिए इंदौर का चयन कर कांग्रेस को सीधे उस युवा वर्ग से संवाद का अवसर देता है, जो शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती और भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर सक्रिय है। यही युवा वर्ग 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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मालवा-निमाड़ को साधने की कोशिश
इंदौर को चुनने का एक बड़ा राजनीतिक कारण मालवा-निमाड़ भी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में इंदौर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी के नाम वापसी के बाद मुकाबला एकतरफा हो गया था। विधानसभा चुनाव 2023 में भी इंदौर जिले की विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसे में कांग्रेस के लिए इंदौर सिर्फ एक कार्यक्रम स्थल नहीं, बल्कि मालवा-निमाड़ में राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश भी माना जा रहा है। राहुल गांधी का छात्रों से संवाद शहर के युवाओं के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों को राजनीतिक संदेश से पार्टी की जमीन मजबूत करने के रूप में देखा जा रहा है।
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प्रदेश के इन मुद्दों को उठाएंगे राहुल
मध्य प्रदेश में दूषित पानी से मौत की घटना ने भी प्रदेश की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं। इंदौर को स्वच्छता के क्षेत्र में देश में अलग पहचान मिली है। ऐसे शहर में दूषित पानी से मौत जैसी घटना का मुद्दा उठा कर सरकार को घेर सकते हैं। इसके अलावा राहुल गांधी यहां से छिंदवाड़ा में कफ सिरप कांड, बालाघाट में बैगा बच्चों की मौत, सागर जहरीली शराब से हुई मौत के मुदे भी अपने भाषण में उठा कर सरकार को घेरेंगे। साथ ही शिक्षा और रोजगार से लेकर शहर की व्यवस्थाओं, मालवा-निमाड़ की राजनीति और मध्य प्रदेश की मौजूदा घटनाओं तक कई मुद्दों को राहुल गांधी अपने भाषण में उठाने की चर्चा हैं।
