सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों ने मध्यप्रदेश में अवैध शराब के कारोबार और प्रशासनिक निगरानी पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, सागर की यह त्रासदी अलीराजपुर के लिए कोई नई चेतावनी नहीं है। आदिवासी बहुल अलीराजपुर में पहले भी जहरीली ताड़ी के सेवन से मौतों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में सागर कांड के बाद जिले में ताड़ी और अवैध शराब के ठिकानों पर प्रशासन की सख्ती ने पुराने मामलों और उनसे लिए गए सबक पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी बीच आबकारी आयुक्त के विशेष निर्देश और कलेक्टर नीतू माथुर के आदेश पर अलीराजपुर में अवैध एवं संभावित जहरीली मदिरा के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है। शनिवार तड़के आबकारी और पुलिस की संयुक्त टीम ने नानपुर, अजंदा और खरपाई क्षेत्र में दबिश दी। कार्रवाई के दौरान कुल सात प्रकरण दर्ज किए गए।
नानपुर क्षेत्र में चार आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(1)(क) के तहत कार्रवाई की गई। टीम ने 132 लीटर ताड़ी और 40 लीटर हाथ भट्ठी मदिरा, कुल 172 बल्क लीटर अवैध मदिरा जब्त की। इसके अलावा शराब निर्माण में इस्तेमाल होने वाला 200 किलोग्राम महुआ लहान और निर्माण सामग्री मौके पर नष्ट की गई।वहीं, भाभरा वृत्त क्षेत्र में तीन प्रकरण दर्ज किए गए। यहां से 4.32 बल्क लीटर व्हिस्की, 6 बल्क लीटर बीयर और 12 लीटर हाथ भट्ठी मदिरा जब्त की गई।
जून 2025 में पटेल फलिया में मचा था हड़कंप
अलीराजपुर में जहरीली ताड़ी का मामला नया नहीं है। जून 2025 में आम्बुआ थाना क्षेत्र के पटेल फलिया में ताड़ी पीने के बाद कई ग्रामीणों के बीमार पड़ने का मामला सामने आया था। इलाज के दौरान मौतों का आंकड़ा तीन तक पहुंच गया था। पुलिस ने ताड़ी बेचने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। ताड़ी के नमूने जांच के लिए एफएसएल भेजे गए थे।
2023 में भी सामने आया था मौतों का मामला
इससे पहले 2023 में अलीराजपुर-धार सीमा क्षेत्र में ताड़ी पीने के बाद तीन लोगों की मौत और कई लोगों के बीमार होने की घटना सामने आई थी। उस समय ताड़ी में कीटनाशक मिलाए जाने की आशंका भी जताई गई थी और मामले की जांच शुरू की गई थी।
अब सवाल, अगली त्रासदी से पहले कितनी सख्ती?
अलीराजपुर में ताड़ी का पारंपरिक उपयोग होता है, लेकिन अवैध तरीके से तैयार की गई या मिलावटी ताड़ी और हाथ भट्ठी शराब लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। सागर की घटना के बाद अब निगाहें अलीराजपुर प्रशासन की कार्रवाई पर हैं।
सवाल यह भी है कि जिले में पुराने मामलों के बाद उठाए गए कदमों की समीक्षा होगी या नहीं? क्या गांव-गांव बिकने वाले संदिग्ध पेय पदार्थों के ठिकानों की नए सिरे से जांच की जाएगी? और क्या अवैध शराब के खिलाफ मौजूदा अभियान केवल कार्रवाई तक सीमित रहेगा या स्थायी निगरानी व्यवस्था भी बनाई जाएगी?
सागर कांड ने एक बार फिर खतरे की ओर ध्यान खींचा है। अलीराजपुर में पहले भी जहरीली ताड़ी से मौतों के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अगली त्रासदी होने से पहले अवैध और संदिग्ध शराब के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाना है।