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बनारस का दशाश्वमेध घाटः यहां की आरती है विश्वप्रसिद्ध लेकिन गंगाजल से उठ रही बदबू

Sun, 04 Mar 2018 05:29 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 04 Mar 2018 05:29 PM IST
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varanasi Dashashwamedh Ghat where aarti is world famous ganga jal is vey bad
दशाश्वमेध घाटः - फोटो : अमर उजाला
विश्वप्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट, जहां से काशी की पहचान है, लहां का भी कोई पुरसाहाल नहीं है। यह गंगा प्रदूषण की स्थिति सबसे खतरनाक है। पर्यटन और आस्था के केंद्र के रूप में स्थापित दशाश्वमेध घाट पर बदबू और गंदगी के कारण लोग स्नान करने से भी कतरा रहे हैं।
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 सुबह ए बनारस और शाम की गंगा आरती का नजारा लेने के लिए देश और विदेश से पर्यटक इसी घाट पर पहुंचते हैं। घाट की बदहाली देख देख श्रद्धालुओं की आस्था आहत हो रही है और सैलानियों का उत्साह भी। गंगा स्वच्छता से जुड़े अधिकारी हों या वीवीआईपी, शायद ही कोई ऐसा हो जो काशी आने के बाद यहां न आए। बावजूद इसके यहां घाट और गंगा की बदहाली हैरान कर देने वाली है।
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घाट पड़ताल के तह आज पढ़ें दशाश्वमेध घाट का हाल...

सोमवार को जब हम मानमंदिर घाट से आरपीघाट होते हुए दशाश्वमेध घाट पहुंचे तो नदी के किनारे चलने की स्थिति नहीं थी। वहां नाले के अवजल से आने वाली बदबू आपको दो मिनट से ज्यादा खड़ा नहीं रहने दे सकती है।
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गंगा में चढ़ाए गए फूल और पूजन सामग्री भी तैरती हुई नजर आई। एक बूंद सीवेज गंगा में नहीं गिरने देने के लिए संकल्पित अधिकारियों को शायद यह पता ही नहीं कि राजेंद्र प्रसाद घाट के सीवेज पंपिंग स्टेशन आधे शहर का अवजल रोज गंगा में गिराया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि देर रात तो नाले को गंगा में पूरा खोल दिया जाता है। पर्यटन के बूते करोड़ों रुपये के राजस्व से सरकारी खजाना भरने वाला गंगा का दशाश्वमेध घाट ही सबसे अधिक प्रदूषित हो गया है। सुबह-ए-बनारस का खूबसूरत नजारा हो या फिर शाम की गंगा आरती।

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दोनों के लिए विश्व भर में यह घाट जाना जाता है। अब तो दशाश्वमेध से लेकर शीतला घाट के बीच का नदी क्षेत्र प्रदूषण के जमा के रूप में विकसित हो गया है। विशेषज्ञों की मानें तो पिछले साल की तुलना में दशाश्वमेध में दो गुना प्रदूषण जमा है। इसके कारण घाट पर सड़न जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। हालत यह है कि स्नान करने वाले भी अब हिचकने लगे हैं। 

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दशाश्वमेध घाट पर गंगाजल में घुलनशील आक्सीजन, बीओडी और फीकल कॉलीफार्म का स्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुका है। घुलनशील आक्सीजन की मात्रा 7.2 मिलीग्राम, बीओडी 4.6 और फीकल कॉलीफार्म 49 हजार के पार पहुंच चुका है। 
 

varanasi Dashashwamedh Ghat where aarti is world famous ganga jal is vey bad
चौंकिए मत, यहां गिर रही है होटलों की गंदगी - फोटो : अमर उजाला

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डा. कुलपति तिवारी ने कहा कि गंगा हमारी संस्कृति और सभ्यता के लिए बेहद अहम है। सनातनधर्मी गंगा के बिना स्वयं की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। गंगा की हालत के लिए हमलोग स्वयं जिम्मेदार हैं।

समय रहते अगर हम नहीं चेते तो स्थितियां बद से बदतर हो चुकी हैं। आम जनमानस को गंगा की दुर्दशा पर संज्ञान लेना होगा। अब नहीं चेते तो बहुत देर हो जाएगी। गंगा को हमें किताबों में ही पढ़ने के लिए मिलेंगी। इस भयावह स्थिति की कल्पना भी आत्मा को झकझोर देती है। 

रंगभरी एकादशी पर नमामि गंगे के सदस्यों ने गायघाट पर देवाधिदेव महादेव और मां गंगे की आरती उतारकर गायघाट की सफाई व आम लोगों को जागरूक करने का संकल्प लिया। संयोजक राजेश शुक्ला ने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि गंगा तो भारत की शाश्वत पहचान, आजीविका का उपक्रम और देश की मर्यादा है। हमें गंगा का संरक्षण करना होगा। 
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