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गंगा में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर, अस्सी से आदिकेशव घाट तक जल आचमन के योग्य नहीं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 22 Feb 2018 02:16 PM IST
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जलस्तर में कमी से सामनेघाट के पास मध्य धारा में भी जगह जगह रेत के टीले उभर आये हैं
- फोटो : अमर उजाला
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ज्यों-ज्यों दवा की, मर्ज बढ़ता गया। कुछ ऐसा ही हाल गंगा का भी हो गया है। घाटों को छोड़ चुकी गंगा अब आचमन के लायक भी नहीं रह गई हैं। गंगा में प्रदूषण की बात करें तो प्रवाह बंद होने के कारण अस्सी से लेकर आदिकेशव घाट तक लिए गए जल के नमूनों की जांच के परिणाम बेहद चौंकाने वाले आए हैं।
डिजाल्व ऑक्सीजन की मात्रा वरुणा संगम पर खतरनाक स्तर तक कम होने के कारण जलचरों के जीवन पर भी संकट खड़ा हो गया है। साथ ही गंगा में डुबकी लगाने वाले भी पानी से आने वाली बदबू से परेशान और चिंतित हैं।
गंगा में पानी कम होने के साथ ही प्रदूषण का स्तर खतरनाक ढंग से बढ़ रहा है। कुछ साल पहले गंगा में घुलनशील ऑक्सीजन का स्तर पांच या छह मिलीग्राम प्रति लीटर होता था लेकिन अस्सी घाट पर यह स्थिति एक मिलीग्राम और आदिकेशव घाट पर घुलनशील ऑक्सीजन की स्थिति शून्य तक पहुंच गई है।
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पढ़ेंः फरवरी में अस्सी घाट से 60 फीट दूर हुईं गंगा, अप्रेल-मई अभी बाकी है
संकटमोचन फाउंडेशन की ओर से 12 फरवरी को शाम छह बजे तुलसी घाट पर की गई गंगाजल की जांच में यहां घुलनशील आक्सीजन की मात्रा 1.8 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई थी। कुछ महीने पहले यह स्तर पांच मिलीग्राम प्रति लीटर था। आंकड़े बताते हैं कि गंगा में रोजाना 350 एमएलडी सीवेज गिराया जा रहा है।
अस्सी घाट पर अस्सी नाला और वरुणा संगम पर सीवेज लगातार गिर रहा है। पहले गंगा में प्रवाह के कारण मलजल घुल जाता था लेकिन पानी और प्रवाह कम होने के कारण सीवेज घुल नहीं पा रहा है।
अस्सी घाट पर रहने वाले संजू गिरी, कमलेश मांझी और संजय कुशवाहा ने बताया कि अब गंगा में डुबकी लगाने पर बदबू भी आती है। इसी तरह गंगा में फीकल कॉलीफार्म 500 के अंदर होना चाहिए लेकिन तुलसी घाट पर यह आंकड़ा 70 हजार और दशाश्वमेध घाट पर 50 हजार पहुंच गया है।
उधर, वरुणा संगम पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। यहां फीकल कॉलीफार्म की स्थिति तो छह करोड़ के पास पहुंच चुकी है। गंगा के बीओडी लेवल की तो आदर्श स्थिति तीन मिलीग्राम प्रति लीटर की है, जबकि तुलसी घाट पर सात मिलीग्राम, दशाश्वमेध घाट पर छह मिलीग्राम और वरुणा के संगम पर 45 मिलीग्राम के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। बीओडी का खतरनाक स्तर बताता है कि गंगा में आर्गेनिक लोड कितना है।
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डिजाल्व ऑक्सीजन की मात्रा वरुणा संगम पर खतरनाक स्तर तक कम होने के कारण जलचरों के जीवन पर भी संकट खड़ा हो गया है। साथ ही गंगा में डुबकी लगाने वाले भी पानी से आने वाली बदबू से परेशान और चिंतित हैं।
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गंगा में पानी कम होने के साथ ही प्रदूषण का स्तर खतरनाक ढंग से बढ़ रहा है। कुछ साल पहले गंगा में घुलनशील ऑक्सीजन का स्तर पांच या छह मिलीग्राम प्रति लीटर होता था लेकिन अस्सी घाट पर यह स्थिति एक मिलीग्राम और आदिकेशव घाट पर घुलनशील ऑक्सीजन की स्थिति शून्य तक पहुंच गई है।
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संकटमोचन फाउंडेशन की ओर से 12 फरवरी को शाम छह बजे तुलसी घाट पर की गई गंगाजल की जांच में यहां घुलनशील आक्सीजन की मात्रा 1.8 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई थी। कुछ महीने पहले यह स्तर पांच मिलीग्राम प्रति लीटर था। आंकड़े बताते हैं कि गंगा में रोजाना 350 एमएलडी सीवेज गिराया जा रहा है।
अस्सी घाट पर अस्सी नाला और वरुणा संगम पर सीवेज लगातार गिर रहा है। पहले गंगा में प्रवाह के कारण मलजल घुल जाता था लेकिन पानी और प्रवाह कम होने के कारण सीवेज घुल नहीं पा रहा है।
अस्सी घाट पर रहने वाले संजू गिरी, कमलेश मांझी और संजय कुशवाहा ने बताया कि अब गंगा में डुबकी लगाने पर बदबू भी आती है। इसी तरह गंगा में फीकल कॉलीफार्म 500 के अंदर होना चाहिए लेकिन तुलसी घाट पर यह आंकड़ा 70 हजार और दशाश्वमेध घाट पर 50 हजार पहुंच गया है।
उधर, वरुणा संगम पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। यहां फीकल कॉलीफार्म की स्थिति तो छह करोड़ के पास पहुंच चुकी है। गंगा के बीओडी लेवल की तो आदर्श स्थिति तीन मिलीग्राम प्रति लीटर की है, जबकि तुलसी घाट पर सात मिलीग्राम, दशाश्वमेध घाट पर छह मिलीग्राम और वरुणा के संगम पर 45 मिलीग्राम के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। बीओडी का खतरनाक स्तर बताता है कि गंगा में आर्गेनिक लोड कितना है।
नदियां मैली हैं...हमारा जीवन कितना कंडम होगा
घुलनशील आक्सीजन की मात्रा कम होने से जलचरों पर भी संकट
- फोटो : अमर उजाला
भोले की नगरी में गंगा की दुर्दशा पर अमर उजाला में सोमवार को प्रकाशित समाचार पर सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म पर गंगा प्रेमियों में बहस शुरू हो गई है। गंगा प्रेमी गंगा के दर्द को महसूस करते हुए अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति दे रहे हैं।
रंगकर्मी व्यमोमेश शुक्ला ने जब अपनी फेसबुक वाल पर लिखा कि अगर हमारी नदियां इतनी मैली हैं तो हमारा जीवन कितना कंडम होगा लेकिन हम ही हैं कि कुछ मध्यमवर्गीय सुख-सुविधाएं जुटाकर अपनी गफलत का स्वर्ग सुख भोगते रहते हैं।...मुख्यधारा के राजनीतिक दलों को जाने दीजिये, आरएसएस, कम्युनिस्ट पार्टियों, आप, अलग-अलग लेखक संघों और ग़ैर सरकारी संगठनों तक के पास नदियों के लिए कोई नीति नहीं है।
देश में शायद कोई नदी नीति नहीं है। नदियों का हाल भी संस्कृति वाला है। ज़ाहिर है, देश की कोई संस्कृति नीति भी नहीं है। औपचारिकता को हिसाब में न लें तो संविधान में भी संस्कृति और नदी के लिए कोई जगह नहीं है। कोई सरकार कभी नदियों के हाल पर श्वेतपत्र जारी नहीं करती।
इसके बाद उनकी फेसबुक वाल पर प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई। ज्यादातर लोगों ने उनके मत से सहमति व्यक्त की। शुभनीत कौशिक ने जल विज्ञानी अनुपम मिश्र का जिक्र करते हुए लिखा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कभी भी अकाल अकेले नहीं आता।
सुधेंदु ने प्रतिक्रिया दी-गंगा पर सभी बस पाखंड करते हैं। अभिषेक का मानना है कि देश की ज्यादातर नदियां अब घातक रूप से प्रदूषित हो चुकी हैं। मिहिर पंड्या ने दिल्ली का जिक्र करते हुए लिखा कि आधुनिक दिल्ली का नींव का पत्थर ही नदी से हमेशा के लिए विच्छेद कर रखा गया था।
रंगकर्मी व्यमोमेश शुक्ला ने जब अपनी फेसबुक वाल पर लिखा कि अगर हमारी नदियां इतनी मैली हैं तो हमारा जीवन कितना कंडम होगा लेकिन हम ही हैं कि कुछ मध्यमवर्गीय सुख-सुविधाएं जुटाकर अपनी गफलत का स्वर्ग सुख भोगते रहते हैं।...मुख्यधारा के राजनीतिक दलों को जाने दीजिये, आरएसएस, कम्युनिस्ट पार्टियों, आप, अलग-अलग लेखक संघों और ग़ैर सरकारी संगठनों तक के पास नदियों के लिए कोई नीति नहीं है।
देश में शायद कोई नदी नीति नहीं है। नदियों का हाल भी संस्कृति वाला है। ज़ाहिर है, देश की कोई संस्कृति नीति भी नहीं है। औपचारिकता को हिसाब में न लें तो संविधान में भी संस्कृति और नदी के लिए कोई जगह नहीं है। कोई सरकार कभी नदियों के हाल पर श्वेतपत्र जारी नहीं करती।
इसके बाद उनकी फेसबुक वाल पर प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई। ज्यादातर लोगों ने उनके मत से सहमति व्यक्त की। शुभनीत कौशिक ने जल विज्ञानी अनुपम मिश्र का जिक्र करते हुए लिखा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कभी भी अकाल अकेले नहीं आता।
सुधेंदु ने प्रतिक्रिया दी-गंगा पर सभी बस पाखंड करते हैं। अभिषेक का मानना है कि देश की ज्यादातर नदियां अब घातक रूप से प्रदूषित हो चुकी हैं। मिहिर पंड्या ने दिल्ली का जिक्र करते हुए लिखा कि आधुनिक दिल्ली का नींव का पत्थर ही नदी से हमेशा के लिए विच्छेद कर रखा गया था।
दो फरवरी, 2018 को गंगाजल की जांच रिपोर्ट
अस्सी घाट से 60 फीट दूर हुईं गंगा
- फोटो : अमर उजाला
वैज्ञानिकों के पैरामीटर
फीकल कॉलीफार्म 500 मिली से नीचे
बीओडी तीन मिलीग्राम प्रति मिली
डीओ पांच मिलीग्राम प्रति लीटर से ऊपर
घुलनशील आक्सीजन (मानक पांच मिलीग्राम से ऊपर)
वर्तमान
नगवां घाट 2.8 मिलीग्राम
तुलसी घाट 6.4 मिलीग्राम
आरपी घाट 7.2 मिलीग्राम
वरुणा संगम 1.6 मिलीग्राम
बीओडी (मानक तीन मिलीग्राम प्रति लीटर)
वर्तमान
नगवां घाट 4.2 मिलीग्राम
तुलसी घाट 7 मिलीग्राम
आरपी घाट 4.6 मिलीग्राम
वरुणा संगम 5.8 मिलीग्राम
फीकल कॉलीफार्म (प्रति सौ मिली लीटर पांच सौ के अंदर)
वर्तमान
नगवां घाट 38 लाख
तुलसी घाट 81 हजार
आरपी घट 49 हजार
वरुणा संगम 3.60 करोड़