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यूपी: काशी-पुरी कॉरिडोर बदलेगा देश के धार्मिक पर्यटन का नक्शा, राज्यों में 30% तक बढ़ेंगे पर्यटक; बनी नीति

Sun, 30 Aug 2026 02:01 PM IST
Aman Vishwakarma अभिषेक सेठ, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अभिषेक सेठ, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 30 Aug 2026 02:01 PM IST
सार

काशी-पुरी कॉरिडोर बनने से धार्मिक पर्यटन को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। इससे वाराणसी और ओडिशा में पर्यटकों की संख्या 30 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है। कॉरिडोर से दोनों राज्यों के प्रमुख धार्मिक स्थलों के साथ स्थानीय कला और हस्तशिल्प को भी नया बाजार मिलेगा। बनारसी साड़ी से पुरी की पट्टचित्र कला तक कारोबार बढ़ने की संभावना है।

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Kashi-Puri Corridor reshape landscape of religious tourism country tourist numbers states expected rise
वाराणसी का घाट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भगवान शिव की नगरी काशी और महाप्रभु जगन्नाथ के पावन धाम पुरी (भुवनेश्वर) के बीच सुगम कनेक्टिविटी की रूपरेखा तैयार की गई है। दोनों राज्यों के पर्यटन और संस्कृति विभाग ने इस रूट को देश के प्रमुख स्पिरिचुअल टूरिज्म सर्किट के रूप में विकसित करने की साझा रणनीति तैयार की है।

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तीन दिवसीय काॅफ्रेंस में शिरकत करने आईं ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रवती परिदा ने बताया कि ओडिशा कनेक्टिविटी में आगे बढ़ रहा है। अभी काशी से पुरी के लिए एक फ्लाइट और कई ट्रेनें हैं। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर केंद्र सरकार और रेलवे से पत्राचार करके ट्रेनों की संख्या बढ़वाई जाएगी। 
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उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग और ओडिशा पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर बनने के बाद वाराणसी में सालाना 14 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं। वहीं, ओडिशा में जगन्नाथ पुरी और भुवनेश्वर स्थित लिंगराज मंदिर व कोणार्क में प्रतिवर्ष दो करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु व पर्यटक आते हैं।
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काशी में तीन दिवसीय ओडिशा परब महोत्सव के बाद ओडिशा में पर्यटकों की संख्या में 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने की संभावना है। पर्यटन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, दक्षिण और पूर्वी भारत के श्रद्धालु जो पुरी आते हैं, वे सीधे काशी पहुंचेंगे। वहीं, उत्तर भारत के पर्यटक आसानी से ओडिशा के तटीय और सांस्कृतिक स्थलों तक जाएंगे। इसके अलावा टूर ऑपरेटरों के लिए काशी-पुरी कंबाइंड पैकेज तैयार किया जाएगा। पुरी के साथ-साथ अन्य स्थलों को जोड़ने से पर्यटकों का स्टे-टाइम (रुकने की अवधि) बढ़ेगा। इससे स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। 

अभी तक ओडिशा आने वाले पर्यटक केवल जगन्नाथ मंदिर दर्शन करने के बाद लौट जाते हैं। लेकिन, अब उन्हें कोणार्क सूर्य मंदिर, बौद्ध विरासत स्थलों में प्रसिद्ध रत्नागिरी, उदयगिरि, ललितगिरि तथा चिल्का, भीतर्कनिका और सिमिलिपाल जैसे वन्यजीव व पर्यावरण-पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण कराने की तैयारी है। इससे रोजगार से लेकर पर्यटन को रफ्तार मिलेगी। 

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश की बहार
ओडिशा पर्यटन निदेशक (आईएएस) दीपांकर महापात्रा ने बताया कि दोनों राज्यों में पर्यटकों की संख्या में 25% से 30% तक की वार्षिक वृद्धि होगी। इस कनेक्टिविटी से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा। बनारस और भुवनेश्वर-पुरी में होटल ऑक्यूपेंसी 80% से ऊपर रहने का अनुमान है। बजट से लेकर 5-स्टार और होमस्टे कारोबार में निवेश बढ़ेगा। ट्रांसपोर्ट, गाइड, हस्तशिल्प (बनारसी साड़ी, ओडिशा की पट्टचित्र कला व हैंडीक्राफ्ट्स) और स्थानीय खानपान (प्रसाद, स्ट्रीट फूड) से जुड़े लाखों लोगों का रोजगार बढ़ेगा।

पुरी में पर्यटन की कई संभावनाएं विकसित हो रही हैं। ओडिशा कनेक्टिविटी में आगे बढ़ रहा है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर केंद्र सरकार और रेलवे से पत्राचार करके ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। - प्रवती परिदा, उपमुख्यमंत्री

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