काशी में बढ़ रहीं गंगा: तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार, घाट किनारे और निचले इलाकों में दहशत; अलर्ट जारी
काशी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नदी का पानी करीब तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ने से घाट किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। घाटों पर निगरानी भी बढ़ाई गई है।
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गंगा का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, बीती रात तक जलस्तर 68.50 मीटर दर्ज किया गया। 24 घंटे में 0.74 मीटर की बढ़ोतरी हुई है। गंगा लगातार 3 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही हैं, जिससे घाटों पर जलभराव का दायरा बढ़ने लगा है।
बढ़ते जलस्तर का असर दशाश्वमेध घाट समेत कई प्रमुख घाटों पर दिखाई दे रहा है। घाटों की निचली सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। जल पुलिस चौकी के आसपास भी पानी भरने लगा है। प्रशासन और जल पुलिस लगातार निगरानी कर रही है। प्रशासन ने लोगों से गहरे पानी में जाने से बचने की अपील की है। जलस्तर में लगातार वृद्धि के चलते तटीय क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
बारिश से गिरा तापमान, अगले सप्ताह ऐसे ही रहेगा मौसम
वाराणसी। पिछले 24 घंटे में रुक-रुक कर हुई बारिश से शनिवार को मौसम का मिजाज बदला नजर आया। भोर में 15 मिनट की तेज बारिश के बाद शाम तक कहीं हल्की तो तेज बारिश हुई। इस वजह से लोगों ने उमस से राहत महसूस की। अधिकतम तापमान जो कि शुक्रवार को 33.5 डिग्री सेल्सियस था, वह 1.2 डिग्री सेल्सियस कम होकर 32.3 पहुंच गया जबकि न्यूनतम तापमान 26.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि मानसून की सक्रियता अभी बनी हुई है।
किनारे पहुंचीं डॉल्फिन, वन विभाग ने किया अलर्ट
गंगा नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण गांगेय डॉल्फिन मुख्य धारा से किनारों और सहायक नदियों की ओर आ रही हैं। इस स्थिति को देख वन विभाग, भारतीय वन्यजीव संस्थान और डॉल्फिन मित्रों ने चौबेपुर क्षेत्र के ढाका गांव और गंगा-गोमती संगम (कैथी) में नाविकों, मछुआरों और ग्रामीणों के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाया।
डॉल्फिन मित्र और वन अधिकारियों ने मछुआरों को निर्देश दिया कि मछली पकड़ने के दौरान कोई डॉल्फिन गलती से जाल में फंस जाए तो बिना देर किए जाल काटकर उसे तुरंत मुक्त कर दें ताकि उसकी जान बचाई जा सके। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि आपात स्थिति में तुरंत वन विभाग या गंगा प्रहरियों को सूचित करें। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंचकर डॉल्फिन का प्राथमिक उपचार करेगी।