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गंगा में प्रदूषणः जहां भगवान विष्णु ने पखारे थे पांव, वहां खड़ा होना भी मुश्किल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 21 Feb 2018 12:43 PM IST
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विष्णुपादोदित तीर्थ के रूप में मशहूर वरुणा गंगा का संगम
- फोटो : अमर उजाला
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शिव की नगरी काशी में गंगा की हालत बेहद खराब है। घाटों से दूर हुई गंगा के जल से उठ रही बदबू तो गंगा किनारे खड़े होने भी नहीं होने दे रही है। वरुणा गंगा के संगम पर गंगा की दशा देखकर कोई नहीं कह सकता है कि कभी भगवान विष्णु ने यहीं अपने पद पखारे होंगे।
विष्णुपादोदित तीर्थ के रूप में मशहूर वरुणा गंगा के संगम पर अब सिर्फ शहर के सीवेज से लबालब वरुणा का पानी गंगा में निरंतर प्रवाहित हो रहा है। हालत ऐसी है कि इसके आसपास खड़ा होना भी मुश्किल है। आदिकेशव से लेकर गायघाट तक स्थितियां बेहद भयावह हो चुकी हैं। कहीं जानवर मरे पड़े हैं तो कहीं शहर के नाले का पानी गंगा में गिर रहा है।
आदिकेशव घाट के थोड़ा पहले स्थित वरुणा गंगा के संगम पर शहर की पूरी गंदगी, सीवर और नालों के पानी को समेटे हुए वरुणा बेेधड़क, बेलौस होकर गंगा में गिर रही है। गंदगी का आलम यह है कि इसके आसपास जलीय जीवों और आम लोगों की आवाजाही पूरी तरह से बंद हो चुकी है।
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बदबू के कारण वहां पर दो मिनट खड़ा होना भी बेहद मुश्किल है। आदिकेशव घाट से पर गंगा की दूरी 70 फीट से अधिक हो चुकी है। दोनों तरफ से सूख रही गंगा के किनारे सिमटते जा रहे हैं। आदिकेशव घाट पर से सीधा नाला गंगा में आकर मिल रहा है।
इसके आगे जब हम खिड़किया घाट की तरफ बढ़ते हैं तो तेज आवाज करता हुआ नाला भी तेजी से गंगा में गिर रहा है। भैंसासुर घाट, रानी घाट, प्रहलाद घाट, सक्का घाट, तेलियानाला घाट, नदेंश्वर घाट, गोला घाट और गायघाट तक छोटे-छोटे नालों से पानी होकर सीधे गंगा में गिर रहा है।
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विष्णुपादोदित तीर्थ के रूप में मशहूर वरुणा गंगा के संगम पर अब सिर्फ शहर के सीवेज से लबालब वरुणा का पानी गंगा में निरंतर प्रवाहित हो रहा है। हालत ऐसी है कि इसके आसपास खड़ा होना भी मुश्किल है। आदिकेशव से लेकर गायघाट तक स्थितियां बेहद भयावह हो चुकी हैं। कहीं जानवर मरे पड़े हैं तो कहीं शहर के नाले का पानी गंगा में गिर रहा है।
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आदिकेशव घाट के थोड़ा पहले स्थित वरुणा गंगा के संगम पर शहर की पूरी गंदगी, सीवर और नालों के पानी को समेटे हुए वरुणा बेेधड़क, बेलौस होकर गंगा में गिर रही है। गंदगी का आलम यह है कि इसके आसपास जलीय जीवों और आम लोगों की आवाजाही पूरी तरह से बंद हो चुकी है।
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बदबू के कारण वहां पर दो मिनट खड़ा होना भी बेहद मुश्किल है। आदिकेशव घाट से पर गंगा की दूरी 70 फीट से अधिक हो चुकी है। दोनों तरफ से सूख रही गंगा के किनारे सिमटते जा रहे हैं। आदिकेशव घाट पर से सीधा नाला गंगा में आकर मिल रहा है।
इसके आगे जब हम खिड़किया घाट की तरफ बढ़ते हैं तो तेज आवाज करता हुआ नाला भी तेजी से गंगा में गिर रहा है। भैंसासुर घाट, रानी घाट, प्रहलाद घाट, सक्का घाट, तेलियानाला घाट, नदेंश्वर घाट, गोला घाट और गायघाट तक छोटे-छोटे नालों से पानी होकर सीधे गंगा में गिर रहा है।
आंकड़ों और हकीकत में जमीन आसमान का अंतर
चौबीसों घंटे नालों से गिरते मल-जल से हालात भयावह
- फोटो : अमर उजाला
आदिकेशव घाट के महंत ओमप्रकाश तिवारी का कहना है कि गंदगी और बदबू के कारण तो अब लोगों ने गंगा में स्नान करना भी छोड़ दिया है। फरवरी में ही गंगा ने घाट छोड़ना शुरू कर दिया है तो गर्मी के मौसम में हालत और भी ज्यादा खराब हो जाएगी।
सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो यह दावा करता है कि गंगा में रोजाना 250 एमलडी सीवेज गिराया जा रहा है लेकिन वरुणा संगम और खिड़किया घाट पर गिर रहे नाले को देखकर समझा जा सकता है कि आंकड़ों और हकीकत में जमीन आसमान का अंतर है।
स्वतंत्र जांच एजेंसियों के अनुसार आंकड़े बताते हैं कि गंगा में रोजाना 350 एमएलडी से अधिक सीवेज गिराया जा रहा है। घुलनशील आक्सीजन की मात्रा वरुणा संगम पर खतरनाक स्तर तक कम होने के कारण जलचरों के जीवन पर भी संकट खड़ा हो गया है।
कुछ साल पहले गंगा में घुलनशील आक्सीजन का स्तर पांच या छह मिलीग्राम प्रति लीटर होता था लेकिन अस्सी घाट पर यह स्थिति एक मिलीग्राम और आदिकेशव घाट पर घुलनशील आक्सीजन की स्थिति शून्य तक पहुंच गई है।
वरुणा संगम पर फीकल कॉलीफार्म की स्थिति तो छह करोड़ के पास पहुंच चुकी है। वरुणा के संगम पर बीओडी लेवल 45 मिलीग्राम के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। बीओडी का खतरनाक स्तर बताता है कि गंगा में आर्गेनिक लोड कितना है।
सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो यह दावा करता है कि गंगा में रोजाना 250 एमलडी सीवेज गिराया जा रहा है लेकिन वरुणा संगम और खिड़किया घाट पर गिर रहे नाले को देखकर समझा जा सकता है कि आंकड़ों और हकीकत में जमीन आसमान का अंतर है।
स्वतंत्र जांच एजेंसियों के अनुसार आंकड़े बताते हैं कि गंगा में रोजाना 350 एमएलडी से अधिक सीवेज गिराया जा रहा है। घुलनशील आक्सीजन की मात्रा वरुणा संगम पर खतरनाक स्तर तक कम होने के कारण जलचरों के जीवन पर भी संकट खड़ा हो गया है।
कुछ साल पहले गंगा में घुलनशील आक्सीजन का स्तर पांच या छह मिलीग्राम प्रति लीटर होता था लेकिन अस्सी घाट पर यह स्थिति एक मिलीग्राम और आदिकेशव घाट पर घुलनशील आक्सीजन की स्थिति शून्य तक पहुंच गई है।
वरुणा संगम पर फीकल कॉलीफार्म की स्थिति तो छह करोड़ के पास पहुंच चुकी है। वरुणा के संगम पर बीओडी लेवल 45 मिलीग्राम के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। बीओडी का खतरनाक स्तर बताता है कि गंगा में आर्गेनिक लोड कितना है।
आदिकेशव से गायघाट तक सीवेज और गाद से काला हुआ गंगा जल
- फोटो : अमर उजाला
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक एसके वर्मा ने कहा कि गंगा में गिर रहे नालों को रोकने के लिए दीनापुर और गोइठहां में 260 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है। काम अंतिम चरण में है और मार्च तक काम पूरा कर नालों को गंगा में गिरने से रोक दिया जाएगा।
कबीर मठ महंत विवेक दास ने कहा , संत कबीर ने कहा था कि मन को गंगा की तरह निर्मल करिए लेकिन वर्तमान में कबीर होते तो गंगा की हालत देखकर वह ये बात नहीं कहते। सरकारी प्रयास से गंगा की सफाई नहीं हो सकती है।
इसके लिए आम जनमानस को भी आगे आना होगा। गंगा अब आचमन लायक नहीं रह गई हैं और यह बेहद चिंता की बात है। आज गंगा को बचाने की बात करने वाले लोग ही गंगा में सबसे ज्यादा गंदगी कर रहे हैं।
अनिल पांडेय ने फेसबुक पर लिखा, नदियों की अविरलता, शुद्धता पर हर उस शहर में चिंतन, मंथन हो रहा है जो नदियों के किनारे बसे हैं। सिर्फ सरकार के बलबूते नदियों का निर्मलीकरण संभव नहीं है। जनांदोलन के साथ जनजुड़ाव भी जरूरी है।
कबीर मठ महंत विवेक दास ने कहा , संत कबीर ने कहा था कि मन को गंगा की तरह निर्मल करिए लेकिन वर्तमान में कबीर होते तो गंगा की हालत देखकर वह ये बात नहीं कहते। सरकारी प्रयास से गंगा की सफाई नहीं हो सकती है।
इसके लिए आम जनमानस को भी आगे आना होगा। गंगा अब आचमन लायक नहीं रह गई हैं और यह बेहद चिंता की बात है। आज गंगा को बचाने की बात करने वाले लोग ही गंगा में सबसे ज्यादा गंदगी कर रहे हैं।
अनिल पांडेय ने फेसबुक पर लिखा, नदियों की अविरलता, शुद्धता पर हर उस शहर में चिंतन, मंथन हो रहा है जो नदियों के किनारे बसे हैं। सिर्फ सरकार के बलबूते नदियों का निर्मलीकरण संभव नहीं है। जनांदोलन के साथ जनजुड़ाव भी जरूरी है।
अस्सी घाट से 60 फीट दूर हुईं गंगा
- फोटो : अमर उजाला
गंगा के तेजी से घट रहे जल स्तर को लेकर सरकारी मशीनरी भी चिंतित है। अमर उजाला में खबर छपने के बाद डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने शासन को इसकी रिपोर्ट भेज दी है। उन्होंने भू, जल वैज्ञानिक समेत विशेषज्ञों की टीम से गंगा के दोनों किनारों का अध्ययन कराने को कहा है।
इस संबंध में जल्द ही एक टीम वाराणसी आ सकती है। बताया गया है कि गंगा में एक किनारे से दूसरे किनारे तक असमान जल स्तर है। ड्रेजिंग की भी आवश्यकता बताई है।
बता दें कि 2014 में ही वैज्ञानिकों एवं जिले के विभिन्न विभागों की एक टीम ने जल स्तर घटने एवं असमान जल स्तर को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की थी। ये रिपोर्ट प्रदेश सरकार से लेकर केंद्र तक को भेजी गई थी। रिपोर्ट के आधार पर आगे कोई कार्यवाही नहीं की गई।
इस संबंध में जल्द ही एक टीम वाराणसी आ सकती है। बताया गया है कि गंगा में एक किनारे से दूसरे किनारे तक असमान जल स्तर है। ड्रेजिंग की भी आवश्यकता बताई है।
बता दें कि 2014 में ही वैज्ञानिकों एवं जिले के विभिन्न विभागों की एक टीम ने जल स्तर घटने एवं असमान जल स्तर को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की थी। ये रिपोर्ट प्रदेश सरकार से लेकर केंद्र तक को भेजी गई थी। रिपोर्ट के आधार पर आगे कोई कार्यवाही नहीं की गई।