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Hindi News ›   World ›   PM Modi receives Uzbekistan's highest honor; Prime Minister speaks of  5 billion dollar trade target by 2030

भारत के लिए उज्बेकिस्तान अहम क्यों?: पीएम मोदी ने बताई वजह, दोनों देशों के बीच यूरेनियम सप्लाई पर बनी सहमति

Sun, 30 Aug 2026 03:44 PM IST
राहुल कुमार एएनआई, ताशकंद
एएनआई, ताशकंद Published by: राहुल कुमार Updated Sun, 30 Aug 2026 03:44 PM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘ओली दाराजली दोस्तलिक’ से सम्मानित किया गया। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने ताशकंद में प्रधानमंत्री को यह सम्मान प्रदान किया। इस सम्मान के बाद पीएम मोदी ने राष्ट्रपति को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि भारत के 1.4 अरब लोगों का सम्मान है।

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PM Modi receives Uzbekistan's highest honor; Prime Minister speaks of  5 billion dollar trade target by 2030
भारत-उज्बेकिस्तान संबंध पर क्या बोले पीएम मोदी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पीएम मोदी और मिर्जियोयेव की बातचीत में व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ बाजार तक पहुंच, बैंकिंग, भुगतान प्रणाली और कनेक्टिविटी से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन मुद्दों का समाधान एक व्यवस्थित तरीके से किया जाएगा, ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को और बढ़ाया जा सके।

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इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति
दोनों नेताओं की बातचीत में कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। इनमें शामिल हैं:

  • व्यापार और निवेश, बुनियादी ढांचा
  • महत्वपूर्ण खनिज और खनन, कृषि
  • रक्षा और सुरक्षा, फार्मास्यूटिकल्स
  • स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी, यूपीआई
  • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर,शिक्षा
  • संस्कृति, पर्यटन और आयुर्वेद


दोनों देशों ने इन क्षेत्रों से जुड़े कई समझौतों और सहमति पत्रों का भी आदान-प्रदान किया।
 



भारत को उज्बेकिस्तान से मिलेगा यूरेनियम
दोनों देशों ने सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इसके तहत उज्बेकिस्तान से भारत को लंबे समय तक यूरेनियम की आपूर्ति के लिए एक विशेष व्यवस्था तैयार की जाएगी। यह समझौता भारत की परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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रक्षा क्षेत्र में मिलकर हथियार बनाने पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग आपसी भरोसे को दर्शाता है। अब भारत और उज्बेकिस्तान की रक्षा कंपनियों को सैन्य उपकरणों के संयुक्त विकास और संयुक्त उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले समय में दोनों देशों की रक्षा कंपनियों के बीच सीधे संपर्क बढ़ाए जाएंगे और मिलकर रक्षा उपकरण विकसित और तैयार किए जाएंगे।

यह भी पढ़ें- पीएम मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान: अब तक 36 देशों ने किया सम्मानित; कब-कब बढ़ा भारत का मान?

पीएम मोदी ने उज्बेक राष्ट्रपति की तारीफ की
राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के विकास मॉडल का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'मेरे मित्र और उज्बेकिस्तान के आर्थिक विकास के जनक ने इस पूरे क्षेत्र में एक रोल मॉडल के तौर पर काम करके दिखाया है। ये दो दिन की मेरी यात्रा हमेशा याद रहेगी। मेरा और डेलिगेशन का स्वागत जिस गर्मजोशी के साथ किया गया है, उससे अपनापन महसूस हो रहा था। इसके लिए मैं राष्ट्रपति का आभार व्यक्त करता हूं'।

हमारे संबंध लगातार मजबूत हुए हैं- पीएम मोदी
उन्होंने आगे कहा, आपकी दूरदर्शी लीडरशिप और भारत के प्रति आपकी दोस्ती से हमारे संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। ये संबंध नई ऊंचाइयां छू रहे हैं और इसी का नतीजा है कि आज हमारे संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' का नया स्तर दिया गया है। पुरस्कार से गौरव और सम्मान लाता है, लेकिन मैं अच्छी तरह जानता हूं कि यह अपने साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी आता है। उज्बेकिस्तान की इस ऐतिहासिक धरती से, मैं उज्बेकिस्तान के लोगों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि भारत अपनी जिम्मेदारियों से कभी पीछे नहीं हटेगा और इस दोस्ती को निभाएगा।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, ताशकंद में मेरा और मेरे प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी और स्नेह के साथ स्वागत करने के लिए मैं उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति और यहां के लोगों का दिल से धन्यवाद करता हूं । यह उज्बेकिस्तान की मेरी चौथी यात्रा है; यह हमारे करीबी संबंधों, करीबी समन्वय और हमारी गहरी दोस्ती को दर्शाता है। मुझे लगभग एक दशक से राष्ट्रपति के साथ काम करने का सौभाग्य मिला है, और इस दौरान मैं उनसे दस से अधिक बार मिल चुका हूं। उनकी सकारात्मकता, दूरदर्शी सोच और निरंतर कुछ नया सीखने की लगातार इच्छा वाकई प्रेरणादायक है। भारत के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए मैं उनका हार्दिक अभिनंदन करता हूं।



'दोनों देशों की सोच और आकांक्षाओं में गहरी समानताएं'
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, उज्बेकिस्तान मध्य एशिया और इस क्षेत्र के साथ भारत के जुड़ाव के केंद्र में है। भारत और उज्बेकिस्तान की सोच और आकांक्षाओं में गहरी समानताएं हैं। युवा, इनोवेशन, समावेशी विकास और आधुनिक तकनीक 'युवा उज्बेकिस्तान' और 'विकसित भारत 2047' दोनों के मूल में हैं। इसी साझा विजन को अपनाते हुए, हम दोनों देशों के लोगों की भलाई के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इस साल हमारी रणनीतिक साझेदारी के 15 साल पूरे हो रहे हैं। इस खास मौके पर, हमने अपने संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक ले जाने का फैसला किया है। आज, हमने अपनी साझेदारी के इस नए स्वरूप में तेजी और ठोस नतीजों के साथ आगे बढ़ने के लिए एक महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार किया है। हमारा द्विपक्षीय व्यापार एक बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर चुका है। अब, हमने 2030 तक पांच बिलियन डॉलर के व्यापार का लक्ष्य रखा है।

राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने भी पीएम मोदी की तारीफ
वहीं राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने कहा, 'हम आपको न केवल एक बेहतरीन राजनेता और समझदार राजनीतिक लीडर के तौर पर जानते हैं, जिन्हें भारत के लोगों का गहरा भरोसा और सम्मान हासिल है, बल्कि एक ऐसे लीडर के तौर पर भी जानते हैं जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत बड़ी पहचान है। हाल के वर्षों में भारत का तेजी से विकास और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसका लगातार बढ़ता प्रभाव सीधे तौर पर आपके नाम और लीडरशिप से जुड़ा है। देश को आधुनिक बनाने की आपकी असरदार रणनीति और कार्यक्रमों की वजह से, आज का भारत हर क्षेत्र में शानदार उपलब्धियां हासिल कर रहा है। सच्चे भाइयों के तौर पर, हमें आपकी शानदार उपलब्धियों पर हमेशा बहुत खुशी होती है और हम आपको एक बार फिर बधाई देना चाहते हैं'।



व्यापार लक्ष्यों पर क्या बोले राष्ट्रपति मिर्जियोयेव?
उन्होंने आगे कहा, 'आज की ऐतिहासिक यात्रा और हमारी सार्थक बातचीत के नतीजे के तौर पर, हमने अपने दोस्ताना देशों के बीच संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक पहुंचाया है। यह वाकई ऐतिहासिक है, और यह कहना बिल्कुल भी बढ़ा-चढ़ाकर कहना नहीं होगा कि भारत के प्रधानमंत्री ने इस अहम पड़ाव तक पहुंचने में बहुत बड़ा व्यक्तिगत योगदान दिया है। आज हमारे द्विपक्षीय संबंधों के विकास में एक यादगार और ऐतिहासिक दिन है। एक अरब अमेरिकी डॉलर का मौजूदा व्यापार टर्नओवर कोई सीमा नहीं है। हम अभी भी अपने लक्ष्यों को हासिल करने से काफी दूर हैं। हमारा लक्ष्य पहले बेंचमार्क के तौर पर पांच अरब अमेरिकी डॉलर है, और मुझे पूरा भरोसा है कि भविष्य में हम आसानी से दस अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार टर्नओवर हासिल कर सकते हैं'।

'हमने भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयार किया'
राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने कहा, 'मैं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उनकी राजकीय यात्रा के लिए दिल से आभार व्यक्त करना चाहता हूं। हमने आज बहुत ही सार्थक बैठक की और महत्वपूर्ण निर्णय लिए। आज हमारी सीधी और ठोस बातचीत हमारे बीच की गहरी दोस्ती और रणनीतिक साझेदारों के रूप में हमारी स्थिति का प्रमाण है, जिसमें अपार आपसी संभावनाएं हैं। हमने कई संभावनाओं पर चर्चा की और हर क्षेत्र पर विचार-विमर्श करते हुए भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयार किया... हमें खुशी है कि भारत ने डिजिटल इनोवेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्टार्टअप्स में प्रगति की है और खुद को सतत विकास में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित किया है। हम अपने व्यापक सहयोग को इन प्रगतिशील बदलावों के साथ जोड़ना चाहते हैं। हमने अब तक की अपनी प्रगति की बारीकी से समीक्षा की है और नए लक्ष्य निर्धारित किए हैं। मैं इन सभी क्षेत्रों को कवर करने वाले रोडमैप को अपनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता हूं'।

यह भी पढ़ें- पीएम मोदी की विदेश नीति: 12 महीने में 20 देशों का दौरा, नए साझीदार बनाने में जुटा भारत; US पर घटेगी निर्भरता?


'हमारी साझेदारी गुणवत्ता के एक नए स्तर पर पहुंच गई'
हमारी साझेदारी गुणवत्ता के एक नए स्तर पर पहुंच गई है और एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में उभरी है। हमने हुए समझौतों के पूर्ण कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित तंत्र स्थापित किया है। व्यापार और आर्थिक सहयोग के संबंध में, हमने इन मामलों पर काम करने के लिए समर्पित टीमें तैनात करने का निर्णय लिया है। हमने पिछले दो दिनों में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की है, और हमने अपने-अपने विदेश मंत्रियों की देखरेख में काम करने वाले ढांचों के प्रभावी कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए तंत्र स्थापित किए हैं। हमने उन मुद्दों पर भी चर्चा की जो हमें नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे - ऐसे लक्ष्य जिन्हें हम अपनी टीमों के साथ करीबी समन्वय के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। यह विशेष रूप से प्रमुख भारतीय कंपनियों द्वारा शुरू की गई निवेश परियोजनाओं के लिए प्रासंगिक है।

योग और संस्कृति से भी जुड़े हैं दोनों देश
उज्बेक राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री सेंटर फॉर इंडियन कल्चर और महात्मा गांधी सेंटर फॉर इंडियन स्टडीज की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान में योग भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। वर्ष 2018 से वहां एक अलग योग महासंघ काम कर रहा है। इसी साल जून में पूरे उज्बेकिस्तान में योग महोत्सव भी आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों के लिए 30 दिन की वीजा-मुक्त व्यवस्था शुरू करने से दोनों देशों के बीच पर्यटन, कारोबार और लोगों के आपसी संपर्क को बढ़ावा मिलेगा। पीएम मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान ताशकंद में उज्बेकिस्तान की योग फेडरेशन की ओर से आयोजित एक योग कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया।

1992 में स्थापित हुए थे राजनयिक संबंध
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच राजनयिक संबंध 18 मार्च 1992 को स्थापित हुए थे। उज्बेकिस्तान की आजादी के बाद भारत उसके संप्रभु अस्तित्व को मान्यता देने वाले शुरुआती देशों में शामिल था। दोनों देशों ने वर्ष 2011 में अपने संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया था। अब इसे 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' में बदलने से दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदा यात्रा 2015 के बाद उज्बेकिस्तान की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। ताशकंद के बाद पीएम मोदी अब किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक जाएंगे, जहां वह 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस साल एससीओ की स्थापना के 25 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं।

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