UP Nikay Chunav 2023: क्या बनारस में इस बार सपा की नैया लगेगी पार, जानिए मेयर प्रत्याशी ओपी सिंह के बारे में
UP Nikay Chunav 2023: यूपी निकाय चुनाव के पहले चरण के नामांकन 17 अप्रैल का आखिरी दिन है। समाजवादी पार्टी ने वाराणसी से डॉक्टर ओपी सिंह को मेयर पद उम्मीदवार बनाया है। प्रदेश की प्रतिष्ठित वाराणसी नगर निगम के मेयर सीट पर 1995 से भाजपा का कब्जा है।
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उत्तर प्रदेश की प्रतिष्ठित वाराणसी नगर निगम के मेयर सीट पर कब्जा जमाने की रणनीति बनाने में सियासी दल जुटे हैं। शनिवार को समाजवादी पार्टी ने मेयर पद पर डॉ. ओपी सिंह को प्रत्याशी घोषित किया है। वाराणसी में वर्ष 1995 से मेयर पद पर भाजपा का कब्जा बना हुआ है। इस वर्ष चुनाव के लिए भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
पार्टी के पास लंबी सूची हैं, जिनमें से किसी एक को टिकट दिए जाने की चर्चा है। जानकारों के अनुसार इस बार गैर राजनीतिक व्यक्ति को टिकट देने पर विचार चल रहा है। वहीं कांग्रेस ने अनील श्रीवास्तव पर दांव खेला है। सपा और कांग्रेस ने सवर्ण प्रत्याशी उतारकर चुनौती पेश कर दी है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि क्या सपा या कांग्रेस निकाय चुनाव में भाजपा का वर्चस्व तोड़ पाएगी।
कौन हैं डॉ. ओपी सिंह
डॉक्टर ओमप्रकाश सिंह भूमिहार समाज से आते हैं। सपा प्रत्याशी ने छात्र राजनीति भी की है। बीएचयू से बीए, एमए व एलएलबी किया, फिर पीएचडी की डिग्री हासिल की। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से एमएसडब्ल्यू भी किया है। पार्षद भी रहे हैं।
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1995 से अब स्वयं या फिर परिवार के सदस्य पार्षद का चुनाव जीतते चले आ रहे हैं। वर्ष 2001 में सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से प्रदेश में चुनाव जीतने का रिकार्ड भी ओपी के पास है। 2001 में वाराणसी नगर निगम में उपसभापति भी रह चुके हैं। वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी वाराणसी के महानगर अध्यक्ष रहे।
इसके बाद वर्ष 2014 में समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव रहे। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने शहर उत्तरी विधानसभा से इन्हें पार्टी का प्रत्याशी बनाया था। लेकिन, यह सीट कांग्रेस से गठबंधन होने के बाद कांग्रेस पार्टी के खाते में चली गई थी। इस कारण ये विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ पाए थे।
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2017 के चुनाव परिणाम पर एक नजर
2017 के वोट प्रतिशत पर गौर करें तो भाजपा की मृदुला जायसवाल को 42.63 प्रतिशत वोट मिले थे। प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस की प्रत्याशी शालिनी यादव को 25.08 प्रतिशत वोट पड़े थे। इसके अलावा 21.97 प्रतिशत वोट अन्य उम्मीदवारों को मिले थे। 1.18 प्रतिशत नोटा वोट पड़े थे। विजयी पार्टी भाजपा जहां अपना वोट प्रतिशत बढ़ाने में जुटी है। वहीं विपक्षी दल बिखरे वोटों को समेटने में लगे हैं। अन्य उम्मीदवारों को मिले वोट प्रतिशत को हासिल करने में विपक्षी दल कामयाब होंगे तो बड़ा उलटफेर कर सकेंगे। इसके लिए विपक्षी दलों ने रणनीतिकारों को लगाया है।