सपा नेता हरीश हुए रिहा: करणी सेना के सदस्यों से हुई थी मारपीट, कागजी कार्रवाई में लग गए चार दिन
समाजवादी पार्टी के नेता हरीश मिश्रा को चार दिन पहले ही कोर्ट से राहत मिल गई थी। उन्हें एक-एक लाख का बंधपत्र देने पर रिहाई दे दी गई थी। आरोप है कि हरीश को दो युवकों ने पीटा था। इस पर उन्होंने ये भी आरोप लगाया था कि करणी सेना के लोगों ने उन पर हमला किया था।
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समाजवादी पार्टी के नेता हरीश मिश्रा उर्फ बनारस वाले मिश्राजी की सोमवार की शाम जिला जेल चौकाघाट से रिहाई हो गई। चार दिन पहले कोर्ट ने जमानत अर्जी मंजूर कर ली थी। कागजी कार्रवाई पूरा करने में चार दिन लग गए। परवाना पहुंचने पर जिला जेल प्रशासन ने हरीश मिश्रा को रिहा किया। समर्थकों ने जिला जेल गेट के बाहर फूल मालाओं से स्वागत किया।
12 अप्रैल को सिगरा क्षेत्र में करणी सेना के सदस्यों अविनाश मिश्रा और स्वास्तिक उपाध्याय के संग सपा नेता हरीश मिश्रा की मारपीट हुई थी। इस मामले में हरीश मिश्रा ने पुलिस से कहा था कि करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया था, जबकि गंभीर रूप से घायल दोनों युवकों ने इसे सपा नेता हरीश मिश्रा और उनके समर्थकों द्वारा मारपीट करना बताया था।
दोनों पक्ष ने एक दूसरे के खिलाफ सिगरा थाने में केस दर्ज कराया था। सपा नेता को पुलिस ने अस्पताल से गिरफ्तार किया था। बीते 24 अप्रैल को विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) देवकांत शुक्ला की कोर्ट ने एक-एक लाख रुपये की दो जमानतें व बंधपत्र देने पर रिहा करने का आदेश दिया था।
सपा नेता ने करणी सेना पर लगाए थे आरोप
Harish Mishra Varanasi News: इस मामले में हरीश मिश्रा ने कहा था कि करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया था, जबकि दोनों गंभीर युवकों ने इसे सपा नेता हरीश मिश्रा और उनके समर्थकों द्वारा मारपीट करना बताया था। इस मामले में हरीश मिश्रा व करणी सेना के दो सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ सिगरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। बाद में सिगरा पुलिस ने सपा नेता हरीश मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए अस्पताल से गिरफ्तार किया था।
बीते दिनों अदालत में वादी मुकदमा अविनाश मिश्रा की ओर से कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज और आरोपी का आपराधिक इतिहास तलब करने की अपील की गई थी। जिस पर हरीश मिश्रा के अधिवक्ता ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद अदालत ने इस मामले में पुलिस द्वारा संकलित साक्ष्य और केस डायरी के आधार पर ही जमानत अर्जी पर सुनवाई करने का आदेश दिया था।