IIT BHU : पानी में जहरीले तत्वों की खोज करने वाली डिवाइस बनाई, मिला अवॉर्ड; जानें कैसे करता है काम
आईआईटी बीएचयू के शोध छात्र को जम्मू में सम्मानित किया गया है। उन्होंने एक डिवाइस बनाई है। इसकी तकनीक के माध्यम से नदी में रहने वाले जहरीले तत्वों की खोज की जा सकेगी।
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Research in BHU : आईआईटी बीएचयू के शोध छात्र सुप्रतिम महापात्रा को आईआईटी जम्मू में बेस्ट इनोवेशन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उन्होंने 18-19 जनवरी को वर्कशॉप में लेजर-गाइडेड इलेक्ट्रोकेमिकल पेपर एनालिसिस डिवाइस का प्रजेंटेशन दिया था।
'माइक्रोफैब्रिकेशन और बायोसेंसर: एडवांसेज इन डायग्नोस्टिक्स' की थीम पर कार्यक्रम में उन्हें अवॉर्ड दिया गया। उन्होंने आईआईटी बीएचयू के बायो केमिकल वैज्ञानिक डॉ. प्रांजल चंद्रा और शोध छात्रा रोहिणी कुमारी के साथ डिवाइस बनाई है।
संस्थान के बायो-फिजियोसेंसर और नैनो बायो इंजीनियरिंग लैब में शोध के दौरान देखा गया कि डिवाइस का इस्तेमाल किसी भी मिलावट या नुकसान देने वाले तत्वों की पहचान में किया जा सकता है। नदी के पानी में जहरीले तत्वों की खोज में किया जा सकता है।
खाद्य पदार्थों के मिलावट के हानिकारक तत्वों की जांच, इलाज के दौरान ब्लड या अन्य सैंपल में नुकसानदेह फ्री रेडिकल्स को जानने के अलावा अल्कलाइन फॉस्फेटेज जैसी बीमारी फैलाने वाले बायोमार्कर्स की पहचान की जा सकती है। आईआईटी बीएचयू ने तकनीक का पेटेंट भी कराया है।
रिसर्च को जापान में भी मिली सराहना
डॉ. चंद्रा ने बताया कि क्लीनिकल डायग्नोस्टिक के साथ ही इकोलॉजी मॉनिटरिंग में तकनीक कारगर सिद्ध होने वाली है। यह शोध प्रतिष्ठित अकादमिक पत्रिका केमिकल इंजीनियरिंग जर्नल में प्रकाशित हो चुका है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खासकर जापान के कोबे में ऑर्गेनिक मॉलिक्यूलर इलेक्ट्रॉनिक्स कॉन्फ्रेंस में सराहना मिली थी।
सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इस्तेमाल
डॉ. चंद्रा ने बताया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों या पॉइंट ऑफ केयर सेटिंग्स में इस डिवाइस को लगाया जा सकता है। अलग-अलग चीजों की जांच के लिए अलग-अलग डिवाइस तैयार होती थी, लेकिन यह कई तरह के मैटेरियल की पहचान करने में सक्षम है। इसमें कई तरह के एंजाइम का इस्तेमाल किया जाता है। जो कि एनालिटिकल सिग्नल देते हैं। इस डिवाइस से सटीक और बेहतर रिजल्ट के लिए इसके पेपर बेस्ड प्लेटफॉर्म में तीन इलेक्ट्रोड सिस्टम का उपयोग किया गया है।