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परविंदर सिंह झोटा: 26 दिन बाद अंतिम संस्कार, पैतृक गांव में दी विदाई; पिता का भूख हड़ताल जारी रखने का एलान

Sun, 08 Nov 2026 04:04 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, मानसा
अमर उजाला नेटवर्क, मानसा Published by: Sharukh Khan Updated Sun, 08 Nov 2026 04:04 PM IST
सार

नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा  का हत्या के 26 दिन बाद अंतिम संस्कार किया गया। उनके पैतृक गांव में नम आंखों से विदाई दी गई। पिता का एसएसपी के तबादले तक भूख हड़ताल जारी रखने का एलान किया है। मानसा के एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्तूबर को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार और उसकी पत्नी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

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Parvinder Singh Jhota Cremated After 26 Days in Mansa; Father Vows to Continue Hunger Strike
Parvinder Singh Jhota - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पंजाब के मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा को आज 26 दिन बाद अंतिम विदाई दी गई। दिवाली के दिन चकेरिया रोड स्थित उनके पैतृक खेतों में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग पहुंचे और नम आंखों से झोटा को श्रद्धांजलि दी। 
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अंतिम संस्कार से पहले उनके पार्थिव शरीर को घर लाया गया, जहां परिवार, रिश्तेदारों और लोगों ने अंतिम दर्शन किए। इसके बाद फूलों से सजी ट्रैक्टर-ट्राली में पार्थिव शरीर रखकर शहर में अंतिम यात्रा निकाली गई।
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झोटा की पार्थिव देह को 7 नवंबर को पीजीआई चंडीगढ़ में पोस्टमार्टम के बाद आज सुबह फूलों से सजी विशेष एंबुलेंस के माध्यम से मानसा लाया गया। एंबुलेंस पर झोटा की तस्वीरें लगाई गई थीं। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए एकत्र हुए। मानसा पहुंचने पर पार्थिव शरीर को सबसे पहले धरना स्थल से होते हुए उनके पैतृक घर लाया गया। यहां परिवार के सदस्यों और लोगों ने अंतिम दर्शन किए।

 
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इसके बाद अंतिम यात्रा चकेरिया रोड स्थित उनके पैतृक खेतों तक पहुंची, जहां अंतिम संस्कार की तैयारियां की गई थीं। खेतों तक जाने वाली सड़क भी तैयार करवाई गई। धार्मिक रस्मों के तहत पाठ और कीर्तन किया गया तथा अरदास के बाद अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की गईं।

 
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इस दौरान झोटा की पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था, वहीं बच्चों की आंखों से भी आंसू थम नहीं रहे थे। बच्चों ने भावुक होकर अपने पिता को अंतिम विदाई दी और ‘परविंदर सिंह झोटा अमर रहे’ के नारे लगाए। विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने भी नारे लगाकर झोटा को श्रद्धांजलि दी। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में युवा, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और शहरवासी शामिल हुए।

पिता भीम सिंह ने लोगों से संघर्ष में साथ देने की अपील की

परविंदर सिंह झोटा की पार्थिव देह घर पहुंचने के बाद उनके पिता भीम सिंह ने मानसा के लोगों से एकजुट होकर मांगों को पूरा करवाने और संघर्ष में साथ देने की अपील की। उन्होंने एसएसपी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यदि लोग आवाज नहीं उठाएंगे तो युवाओं को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है, उनके परिवारों से पैसे वसूले जा सकते हैं और उन्हें जेल भेजा जा सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि युवाओं पर गोलियां चलाए जाने का खतरा बना रहेगा।

भीम सिंह ने कहा कि यदि संबंधित अधिकारी का तबादला किया जाता है तो भविष्य में आने वाला एसएसपी झूठे मामले दर्ज करने से पहले सोचेगा। उन्होंने करीब एक महीने से लगातार संघर्ष कर रही एक्शन कमेटी के सदस्यों और एंटी ड्रग टास्क फोर्स के युवाओं का धन्यवाद किया।

एसएसपी के तबादले तक भूख हड़ताल जारी रखने का एलान

पत्रकारों से बातचीत करते हुए भीम सिंह ने कहा कि उन्होंने 5 नवंबर से कुछ नहीं खाया है और केवल पानी पी रहे हैं। उन्होंने एलान किया कि जब तक एसएसपी का तबादला नहीं हो जाता, तब तक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी।

 

नशा बेचने वालों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य पंजाब की जवानी को नशे से बचाना है। इसी उद्देश्य के लिए उन्होंने अपने इकलौते बेटे को संघर्ष में आगे किया। उन्होंने बताया कि झोटा का वजन 160 किलो से अधिक था और वह घर में जिम बनाकर कसरत भी करता था।

 

झोटा की अंतिम यात्रा और संस्कार के दौरान लोगों की भारी मौजूदगी ने इस मामले को लेकर शहर में बनी भावनात्मक स्थिति को दर्शाया। 26 दिनों तक पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार नहीं होने के बाद आज परिवार और समर्थकों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।

यह था पूरा मामला
मानसा के एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्तूबर को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार और उसकी पत्नी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। झोटा की हत्या के बाद पूरे पंजाब में आक्रोश फैल गया था। परिवार इंसाफ की मांग पर अड़ गया था। पंजाब सरकार ने केस की जांच सीबीआई को साैंपी है। 

दो करोड़ मुआवजा और नाैकरी का भरोसा
परविंदर सिंह झोटा को इंसाफ दिलाने के लिए चल रहे संघर्ष के 23वें दिन पंजाब सरकार और एक्शन कमेटी के बीच सहमति बनी थी। परिवार को 2 करोड़ रुपये मुआवजा और नौकरी देने का भरोसा दिया गया। दलजीत सिंह भम्मे के परिवार को भी नौकरी और मुआवजा देने का भरोसा दिया गया है। 

 

धरने के 24वें दिन गुरुवार को इरादतन हत्या के मामले में गिरफ्तार लक्खा सिधाना और मोहनजीत शेरो को नाभा जेल से रिहा कर दिया गया। इसके बाद गुरुवार आधी रात को परिवार की सहमति के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए पीजीआई भेज दिया गया।

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