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पुलिस की नाक के नीचे चोरी हुआ खजाना
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 15 Oct 2016 11:32 PM IST
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पुलिस की नाक के नीचे चोरों ने एक करोड़ 15 लाख रुपये उड़ा दिए और किसी को भी कानों-कान खबर तक नहीं लगी। ट्रेजरी की सुरक्षा में तैनात दो सिपाहियों में मात्र एक ही ड्यूटी पर था, जबकि दूसरा एक हफ्ते के लिए बिना किसी अवकाश के घर गया था।
सुरक्षा का आलम यह है कि तहसील के एक तरफ कादीपुर कोतवाली है जबकि दो तरफ दुकानें बनी हैं। एक तरफ तहसीलदार समेत अन्य कर्मचारियों के आवास हैं। चोरों ने ट्रेजरी का डबल लॉक काटकर रुपयों पर हाथ साफ कर दिया और किसी को भनक तक नहीं लगी। जिले में अब तक की यह सबसे बड़ी चोरी की घटना है।
कादीपुर तहसील की स्थापना 1882 में हुई थी। तहसील में ही ट्रेजरी है। ट्रेजरी के उत्तर दिशा में चंद कदम पर कादीपुर कोतवाली है। पश्चिम और दक्षिण दिशा में तहसील से सटी कई दुकानें हैं।
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पूरब में तहसील में ही तहसीलदार समेत अन्य कर्मचारियों के आवास बने हैं। सरकारी आवास होने के बावजूद तहसीलदार रामचंद्र सरोज रोजाना मुख्यालय चले जाते हैं। ट्रेजरी की सुरक्षा में विशेषचंद्र राय और सर्वजीत सिंह की तैनाती है।
उनकी ड्यूटी की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घटना के दिन विशेषचंद्र राय ड्यूटी पर तैनात था, जबकि सर्वजीत सिंह कई दिनों से बिना बताए ड्यूटी से लापता है। सूत्रों के मुताबिक दोनों सिपाहियों ने एक-एक हफ्ते ट्रेजरी की सुरक्षा के लिए खुद ही दिन निर्धारित किया था।
एक हफ्ते विशेषचंद्र राय ड्यूटी करता था, जबकि सर्वजीत सिंह घर चला जाता था। सर्वजीत के लौटने पर विशेषचंद्र राय घर बिना छुट्टी लिए चला जाता था। दोनों सिपाहियों की ड्यूटी की जांच के लिए कोई अधिकारी नहीं आता था।
ट्रेजरी की सुरक्षा में तैनात सिपाही विशेषचंद्र राय ने बताया कि ट्रेजरी के गार्ड रूम में दो राइफल और 100 कारतूस रखी होती है। शुक्रवार रात करीब साढ़े नौ बजे वह गार्ड रूम के पास था। दुर्गा पूजा चल रही है। तेज आवाज में डीजे का साउंड बज रहा था।
जिसकी वजह से ट्रेजरी के डबल लॉक का ताला कटते समय उसे पता नहीं चला। रात में साढ़े 12 बजे उसने घटना की सूचना पुलिस को दी थी। उधर, प्रभारी कोतवाल कादीपुर अनिल सोनकर ने बताया कि उन्हें चोरी की जानकारी शनिवार सुबह साढ़े चार बजे गार्ड ने दी। ऐसे में गार्ड का जवाब किसी के गले से नीचे नहीं उतर रहा है।
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सुरक्षा का आलम यह है कि तहसील के एक तरफ कादीपुर कोतवाली है जबकि दो तरफ दुकानें बनी हैं। एक तरफ तहसीलदार समेत अन्य कर्मचारियों के आवास हैं। चोरों ने ट्रेजरी का डबल लॉक काटकर रुपयों पर हाथ साफ कर दिया और किसी को भनक तक नहीं लगी। जिले में अब तक की यह सबसे बड़ी चोरी की घटना है।
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कादीपुर तहसील की स्थापना 1882 में हुई थी। तहसील में ही ट्रेजरी है। ट्रेजरी के उत्तर दिशा में चंद कदम पर कादीपुर कोतवाली है। पश्चिम और दक्षिण दिशा में तहसील से सटी कई दुकानें हैं।
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पूरब में तहसील में ही तहसीलदार समेत अन्य कर्मचारियों के आवास बने हैं। सरकारी आवास होने के बावजूद तहसीलदार रामचंद्र सरोज रोजाना मुख्यालय चले जाते हैं। ट्रेजरी की सुरक्षा में विशेषचंद्र राय और सर्वजीत सिंह की तैनाती है।
उनकी ड्यूटी की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घटना के दिन विशेषचंद्र राय ड्यूटी पर तैनात था, जबकि सर्वजीत सिंह कई दिनों से बिना बताए ड्यूटी से लापता है। सूत्रों के मुताबिक दोनों सिपाहियों ने एक-एक हफ्ते ट्रेजरी की सुरक्षा के लिए खुद ही दिन निर्धारित किया था।
एक हफ्ते विशेषचंद्र राय ड्यूटी करता था, जबकि सर्वजीत सिंह घर चला जाता था। सर्वजीत के लौटने पर विशेषचंद्र राय घर बिना छुट्टी लिए चला जाता था। दोनों सिपाहियों की ड्यूटी की जांच के लिए कोई अधिकारी नहीं आता था।
ट्रेजरी की सुरक्षा में तैनात सिपाही विशेषचंद्र राय ने बताया कि ट्रेजरी के गार्ड रूम में दो राइफल और 100 कारतूस रखी होती है। शुक्रवार रात करीब साढ़े नौ बजे वह गार्ड रूम के पास था। दुर्गा पूजा चल रही है। तेज आवाज में डीजे का साउंड बज रहा था।
जिसकी वजह से ट्रेजरी के डबल लॉक का ताला कटते समय उसे पता नहीं चला। रात में साढ़े 12 बजे उसने घटना की सूचना पुलिस को दी थी। उधर, प्रभारी कोतवाल कादीपुर अनिल सोनकर ने बताया कि उन्हें चोरी की जानकारी शनिवार सुबह साढ़े चार बजे गार्ड ने दी। ऐसे में गार्ड का जवाब किसी के गले से नीचे नहीं उतर रहा है।