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कोयला परत में आग, मलबा खिसकने का डर

Sat, 21 May 2022 10:00 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 21 May 2022 10:00 PM IST
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Fire in the coal layer, fear of debris slipping
शक्तिनगर। एनसीएल खड़िया खदान में कोयले की मोटी परत में लगी आग से कोल प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है। आग का दायरा लगातार बढ़ने से कोयला परत के ऊपर मौजूद पहाड़ के मलबे को खिसकने की आशंका जताई जा रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि आग से अब तक कई हजार टन कोयला राख हो चुका है। खदान के पुरेवा बाटम में आग की वजह प्राकृतिक बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि गर्मी बढ़ने के साथ कुछ अन्य कारणों से कोयला खदान में इस तरह की घटना कोई नई बात नहीं। इस तरह की आग पर काबू पाने में आधुनिक संसाधनों का अभाव बड़ा कारण है। कोयला प्रोजेक्ट के कर्मचारियों की मानें तो पुरेवा बाटम के जिस परत (सीम) में आग लगी है वह करीब दस मीटर मोटी है। इसकी लंबाई कई किलोमीटर है। आग कब व कैसे लगी इसको लेकर अलग अलग तर्क हैं, लेकिन बताया जा रहा है तेज धूप व गर्मी से पैदा आक्सीकरण इसके लिए जिम्मेदार है। चिंता आग के दायरा बढ़ने व दिन रात सुलग रही कोयला परत की वजह से रिक्त हो रहे स्थान को लेकर है। इस प्रक्रिया को रोका नहीं गया तो परत के ऊपर मौजूद लाखों टन वजनी पहाड़ का मलबा खिसक सकता है। खदानों में इस तरह की स्लाइडिंग (खिसकने) की घटना हो चुकी है अलग बात है कि हर बार कारण जुदा रहे। बताया जा रहा है कि पुरेवा बाटम से खड़िया खदान का सर्वाधिक उत्पादन होता है। इस क्षेत्र से निकलने वाले कोयले की श्रेणी भी उम्दा मानी जाती है। कोल प्रोजेक्ट के अधिकारियों का दावा है कि हालिया समस्या से निबटने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
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