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Sonebhadra News: भौमिक अधिकार के लिए बड़े आंदोलन की राह पर मूल निवासी
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अगोरी और सिंगरौली परगना के मूल निवासी भौमिक अधिकार की मांग को लेकर 30 अगस्त को अगोरी किला पर जुटेंगे। मूल निवासी अधिकार मंच के आह्वान पर होने वाली गैर-राजनीतिक बैठक में ग्रामीणों की भूमि संबंधी समस्याओं पर चर्चा कर आगे के आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
मंच से जुड़े अधिवक्ता धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि 433 गांवों के किसानों और मूल निवासियों के भौमिक अधिकार का मुद्दा लंबे समय से लंबित है। स्वतंत्रता के बाद भूमि मिलने के करीब 80 वर्ष बीत जाने के बावजूद ग्रामीणों को अपनी जमीन पर पूर्ण अधिकार नहीं मिल सका है। इसे लेकर गांव-गांव जनजागरण अभियान भी चलाया जा रहा है।
मंच के अनुसार भूमि अभिलेखों में गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट और वर्ग 1-ख के रूप में दर्ज जमीन के कारण ग्रामीणों को भूमि संबंधी कई अधिकारों और सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने में कठिनाई होती है। खाद-बीज, कृषि सुविधाओं और बैंकिंग कार्यों समेत कई जरूरी प्रक्रियाओं में खतौनी की स्थिति बाधा बन रही है।
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समस्या के समाधान के लिए लंबे समय से मांग उठाई जा रही है, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीण अब आंदोलन की तैयारी में हैं। 30 अगस्त को अगोरी किला पर होने वाली बैठक में गवर्नमेंट ग्रांट एवं वर्ग 1-ख की भूमि पर भौमिक अधिकार, भूमि अभिलेखों में आवश्यक सुधार और किसानों को खतौनी उपलब्ध कराने समेत अन्य मांगों पर विचार किया जाएगा।
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मंच से जुड़े अधिवक्ता धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि 433 गांवों के किसानों और मूल निवासियों के भौमिक अधिकार का मुद्दा लंबे समय से लंबित है। स्वतंत्रता के बाद भूमि मिलने के करीब 80 वर्ष बीत जाने के बावजूद ग्रामीणों को अपनी जमीन पर पूर्ण अधिकार नहीं मिल सका है। इसे लेकर गांव-गांव जनजागरण अभियान भी चलाया जा रहा है।
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मंच के अनुसार भूमि अभिलेखों में गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट और वर्ग 1-ख के रूप में दर्ज जमीन के कारण ग्रामीणों को भूमि संबंधी कई अधिकारों और सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने में कठिनाई होती है। खाद-बीज, कृषि सुविधाओं और बैंकिंग कार्यों समेत कई जरूरी प्रक्रियाओं में खतौनी की स्थिति बाधा बन रही है।
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समस्या के समाधान के लिए लंबे समय से मांग उठाई जा रही है, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीण अब आंदोलन की तैयारी में हैं। 30 अगस्त को अगोरी किला पर होने वाली बैठक में गवर्नमेंट ग्रांट एवं वर्ग 1-ख की भूमि पर भौमिक अधिकार, भूमि अभिलेखों में आवश्यक सुधार और किसानों को खतौनी उपलब्ध कराने समेत अन्य मांगों पर विचार किया जाएगा।