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आवास तोड़ा नहीं, बेच कर लाखों कमाया
ब्यूरो,अमर उजाला/सोनभद्र
Updated Mon, 28 Mar 2016 12:11 AM IST
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क्राइम
ठेका मिला आवास तोडने का, लेकिन ठेकेदार ने आवास के साथ ही सरकारी जमीन भी बेच डाली। अब जब इस मामले का खुलासा हुआ तो हड़कंप मच गया। संबंधित अधिकारी प्रकरण के जांच की बात कह रहे हैं। बावजूद अभी भी कुछ आवासों को तोड़ने के बाद खाली हुई भूमि की भी बोली लगाई जा रही है।
सूत्रों की मानें तो कोटा इलाके में स्थानीय विद्युत परियोजना ने अपनी भूमि पर नेशनल प्रोजेक्ट कांस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (एनपीसीसी) को एक अनुबंध के तहत अस्थाई आवास, कार्यालय और स्टोर बनाने की अनुमति दी थी। अनुबंध समाप्ति के बाद एनपीसीसी से आवंटित भूमि खाली करने को कहा गया।
इसी के बाद पूरे खेल की शुरूआत हुई। एनपीसीसी ने अस्थायी आवासों के साथ अन्य निर्माण को तोड़ कर उसका संपूर्ण सामान ले जाने के लिए एक ठेका दिया। लगभग सौ विभिन्न श्रेणी के आवासों, अन्य निर्माण को तोड़ने और मलवा हटाने का यह ठेका करीब चार लाख रुपये में फाइनल हुआ।
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आवास तोड़ने की प्रक्रिया शुरू तो हुई लेकिन महज 22 से 25 आवासों को तोड़ने के बाद ठेकेदार ने शेष आवासों को बिना तोड़े बेचना शुरू कर दिया। शेष आवासों की श्रेणीवार रकम तय कर 60 हजार से लेकर सवा लाख तक में बेच दिया। बिकने वाले आवासों में 75 विभिन्न श्रेणी के आवास एवं गोदाम शामिल हैं।
अब आवास बेचने के बाद तोड़े जा चुके आवासों की वजह से खाली हुई भूमि का सौदा शुरू हो गया है। सूत्रों की माने तो ठेके में भी खेल हुआ। कंपनी के नजदीकी लोग बताते हैं कि पहले यहीं ठेका करीब सात लाख रूपये में फाइनल हुआ था लेकिन अधिकारियों ने इसे निरस्त कर चार लाख में फाइनल कर दिया।
वरिष्ठ प्रबंधक/इकाई प्रभारी, एनपीसीसी लिमिटेड अगम भार्गव ने बताया कि आवासों को तोडने संबंधित पूरी प्रक्रिया की देखरेख लखनऊ कार्यालय से हो रही है। कुछ गड़बड़ी जरूर है लेकिन ज्यादा कुछ बताया नहीं जा सकता।
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सूत्रों की मानें तो कोटा इलाके में स्थानीय विद्युत परियोजना ने अपनी भूमि पर नेशनल प्रोजेक्ट कांस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (एनपीसीसी) को एक अनुबंध के तहत अस्थाई आवास, कार्यालय और स्टोर बनाने की अनुमति दी थी। अनुबंध समाप्ति के बाद एनपीसीसी से आवंटित भूमि खाली करने को कहा गया।
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इसी के बाद पूरे खेल की शुरूआत हुई। एनपीसीसी ने अस्थायी आवासों के साथ अन्य निर्माण को तोड़ कर उसका संपूर्ण सामान ले जाने के लिए एक ठेका दिया। लगभग सौ विभिन्न श्रेणी के आवासों, अन्य निर्माण को तोड़ने और मलवा हटाने का यह ठेका करीब चार लाख रुपये में फाइनल हुआ।
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आवास तोड़ने की प्रक्रिया शुरू तो हुई लेकिन महज 22 से 25 आवासों को तोड़ने के बाद ठेकेदार ने शेष आवासों को बिना तोड़े बेचना शुरू कर दिया। शेष आवासों की श्रेणीवार रकम तय कर 60 हजार से लेकर सवा लाख तक में बेच दिया। बिकने वाले आवासों में 75 विभिन्न श्रेणी के आवास एवं गोदाम शामिल हैं।
अब आवास बेचने के बाद तोड़े जा चुके आवासों की वजह से खाली हुई भूमि का सौदा शुरू हो गया है। सूत्रों की माने तो ठेके में भी खेल हुआ। कंपनी के नजदीकी लोग बताते हैं कि पहले यहीं ठेका करीब सात लाख रूपये में फाइनल हुआ था लेकिन अधिकारियों ने इसे निरस्त कर चार लाख में फाइनल कर दिया।
वरिष्ठ प्रबंधक/इकाई प्रभारी, एनपीसीसी लिमिटेड अगम भार्गव ने बताया कि आवासों को तोडने संबंधित पूरी प्रक्रिया की देखरेख लखनऊ कार्यालय से हो रही है। कुछ गड़बड़ी जरूर है लेकिन ज्यादा कुछ बताया नहीं जा सकता।