फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   action shoul be taken against elegal doctors

अवैध डॉक्टरों पर कार्रवाई के लिए यहां मरना जरूरी है!

Mon, 26 Sep 2022 09:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 26 Sep 2022 09:51 PM IST
विज्ञापन
action shoul be taken against elegal doctors
अवैध डॉक्टरों पर कार्रवाई के लिए यहां मरना जरूरी है!
विज्ञापन

- बिना कोई मौत हुए हरकत में नहीं आते स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार
- मौत या हंगामा होने पर सील कर दिए जाते हैं अस्पताल, मुकदमे भी दर्ज हुए
अमर उजाला ब्यूरो
सोनभद्र। स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से अति पिछड़े जिले में अवैध अस्पतालों का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। ग्रामीण अंचलों में बिना डिग्री और लाइसेंस के क्लीनिक खोलकर मरीजों का उपचार किया जा रहा है। बीमारी साधारण हो या फिर गंभीर। बिना डिग्री वाले कथित डॉक्टर उसका सटीक इलाज करने का दावा करने से नहीं चूकते। मरीजों की जान से खेलते हुए उनसे मोटी रकम भी ऐंठते हैं। स्वास्थ्य विभाग इन पर शिकंजा कसने में नाकाम है। विभाग की आंखें तभी खुलती हैं, जब इन अस्पतालों में भर्ती किसी मरीज की जान जाती है और तब परिजन हंगामा शुरू करते हैं। मामला सुर्खियों में आता है तो हरकत में आए जिम्मेदार कथित डॉक्टर और उसकी क्लीनिक के कागजात खंगालने में जुट जाते हैं। क्लीनिक सील होता है, मुकदमा दर्ज कराया जाता है और फिर कुछ दिनों बाद ही सब कुछ सामान्य हो जाता है। एक-दो नहीं, ऐसे कई मामले महज कुछ महीनों में ही सामने आए हैं। तेजी से बढ़ते अवैध अस्पतालों की संख्या विभागीय जिम्मेदारों के कार्यप्रणाली की पोल खोल रही है। यह सवाल भी उठा रही है कि आम लोगों की जिंदगी से खेलने वाले इन अवैध डॉक्टरों पर कार्रवाई के लिए विभाग को आखिर किसी के मरने का ही इंतजार क्यों रहता है...
----
केस एक::
मधुपुर कस्बे के नौगढ़ रोड पर संचालित एक अस्पताल में उपचार कराने वाली गर्भवती प्रियंका पत्नी रिशु मौर्य की पिछले दिनों वाराणसी में मौत हो गई। परिजनों ने गर्भवती का दो दिनों तक यहीं उपचार कराया और फिर बाद में उसकी हालत गंभीर होने पर रेफर कर दिया गया था। महिला के परिजनों ने आरोप लगाया कि कथित डॉक्टर की लापरवाही से गर्भवती की मौत हुई। हंगामे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच की तो क्लीनिक का पंजीकरण नहीं था। उपचार करने वाले के पास कोई मान्य डिग्री नहीं थी। लिहाजा क्लीनिक सील करते हुए कथित डॉक्टर पर गैर इरादतन हत्या व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया। मजेदार बात है कि इस अस्पताल का जिक्र पिछले कई दिनों से वायरल होती अवैध अस्पतालों की सूची में शुमार था, लेकिन विभाग इससे बेपरवाह बना रहा।
विज्ञापन

---
केस दो::
दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के कटौली गांव में 13 सिंतबर को विनोद गोंड (30) की मौत हो गई। परिजनों का आरोप रहा कि गांव में ही क्लीनिक चलाने वाले अवैध डॉक्टर के यहां पांच दिनों तक बुखार का उपचार चलता रहा, मगर कोई राहत नहीं मिली। बाद में स्थिति गंभीर होने पर उसे रेफर कर दिया गया। सीएचसी पहुंचने तक विनोद की मौत हो गई। अगले दिन स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की कथित डॉक्टर का क्लीनिक अवैध मिला, लिहाजा उसे भी सील कर दिया गया। संचालक फरार है। इसी क्षेत्र के पिपरहार गांव में भी निमोनिया से दो माह के मासूम की मौत हुई, लेकिन विभाग परिजनों की शिकायत का इंतजार करता रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन

----
केस तीन:::
बभनी थाना क्षेत्र के डूभा गांव में संचालित एक निजी अस्पताल में 10 जून को बीजपुर निवासी वीरेंद्र विश्वकर्मा की पत्नी की प्रसव के दौरान मौत हो गई थी। एक आशा के कहने पर वीरेंद्र अपनी पत्नी को लेकर वहां पहुंचे थे। मौत के बाद कथित डॉक्टर फरार हो गया। उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए वीरेंद्र ने थाने में तहरीर दी। पुलिस ने अस्पताल संचालक के खिलाफ केस दर्ज किया। यहां भी क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग के मानकों के विपरीत चल रहा था।
---
केस चार::
जून माह में ही म्योरपुर कस्बे से सटे एक गांव में संचालित क्लीनिक में उपचार के दौरान पड़री गांव निवासी अधेड़ की मौत हो गई थी। मृतक के परिजन शव लेकर थाने पहुंचे और जमकर हंगामा मचाया। तहरीर पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। म्योरपुर सीएचसी के अधीक्षक ने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर जांच के बाद मानक विहीन क्लीनिक को सील करा दिया था। मुकदमा दर्ज करने की बजाय पीड़ित पक्ष के साथ मिलकर मामले का पंचायत में समाधान कर दिया गया। पीड़ित पक्ष के शिकायत वापस लेने के बाद क्लीनिक के शटर दोबारा खुल गए।
---
केस पांच::
करमा थाना क्षेत्र के पगिया गांव के पास संचालित एक क्लीनिक के खिलाफ सीएम पोर्टल पर शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग के निजी अस्पतालों के पंजीकरण प्रभारी डॉ. जीएस यादव ने जांच की। मानक के विपरीत संचालित क्लीनिक को पुलिस की मौजूदगी में सील कराते हुए मेडिकल स्टेबलिसमेंट एक्ट के तहत केस दर्ज करने के लिए थाने में तहरीर दी थी।

----
वर्जन...
कुछ दिन पहले ही मुझे नोडल अधिकारी का चार्ज मिला है। अपने स्तर से जांच कर कार्रवाई का पूरा किया जाता है। कई बार कानूनी अड़चनें भी आती हैं। जहां से शिकायत आती है वहां पहले कार्रवाई करनी होती है। मानक के विपरीत और अवैध रूप से संचालित क्लीनिक व अस्पतालों के विरुद्ध आगे नियमित अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. गुरु प्रसाद, नोडल अधिकारी, निजी अस्पताल पंजीकरण।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed