{"_id":"66e327da973fd7a84e027a18","slug":"a-school-where-there-are-three-teachers-and-only-seven-children-sonbhadra-news-c-194-1-svns1040-117867-2024-09-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonebhadra News: एक स्कूल ऐसा, जहां शिक्षक तीन और बच्चे सिर्फ सात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonebhadra News: एक स्कूल ऐसा, जहां शिक्षक तीन और बच्चे सिर्फ सात
विज्ञापन
वैनी। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार हरसंभव जतन कर रही है, मगर कुछ विद्यालयों में इसका कोई असर नहीं दिख रहा। नगवां ब्लॉक का प्राथमिक विद्यालय कुरवल इसकी नजीर है। पांचवीं तक के इस विद्यालय में कुल सात बच्चे हैं। इसमें भी चार-पांच ही नियमित स्कूल आते हैं। सात बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल में तीन शिक्षकों की तैनाती है। भोजन बनाने के लिए दो रसोइया भी हैं। गौर फरमाने वाली बात यह है कि 50 बच्चों से कम संख्या वाले स्कूलों के समायोजन वाली सूची में इस विद्यालय का नाम भी नहीं है।
पिछले तीन वर्षों के दौरान जिले के परिषदीय विद्यालयों में 60 हजार से अधिक नामांकन कम हुए हैं। इसके पीछे एक बच्चे का एक से अधिक विद्यालय में नामांकन बड़ी वजह माना जा रहा है। प्रेरणा पोर्टल पर हर बच्चे का डाटा अपलोड किए जाने के बाद डुप्लीकेसी खत्म हो गई है। नतीजा नामांकन में कमी आई है। बावजूद इसके विभाग हर बच्चे को शिक्षित करने के संकल्प के साथ स्कूलों में नामांकन बढ़ाने पर पूरा जोर दे रहा है। शिक्षकों को हिदायत दी गई है कि वह हर घर में संपर्क कर बच्चों का नामांकन सुनिश्चित कराएं। प्राथमिक विद्यालय कुरवल के शिक्षकों पर इसका कोई असर नहीं है। करीब आठ सौ आबादी वाले इस गांव के विद्यालय में पहली से पांचवीं तक सिर्फ सात बच्चों का नामांकन ही हो पाया है। बृहस्पतिवार को इसमें भी सिर्फ चार बच्चे ही कक्षा में मौजूद मिले। विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक, दो शिक्षामित्र और दो रसोइयाें की तैनाती है। बीआरसी कार्यालय से मात्र सात किमी दूर स्थित विद्यालय की यह दशा चौंकाने वाली है। इस संबंध में प्रधानाध्यापक रामसुधारक चौबे का कहना था कि बच्चे यहां से नाम कटवा कर दूसरे स्कूलों में जा रहे हैं। हालांकि इसका कारण वह नहीं बता पाए। दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना था कि इस स्कूल के अध्यापक समय से नहीं आते और न ही पढ़ाई कराते हैं। ऐसे में बच्चों को विद्यालय कौन भेजेगा।
प्राथमिक विद्यालय कुरवल का मामला संज्ञान में है। प्रधानाध्यापक को पूर्व में भी नामांकन व उपस्थिति बढ़ाने की हिदायत दी जा चुकी है। समायोजन की सूची में यह विद्यालय नहीं है। उच्चधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया गया है। -बृजेश कुमार सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी, नगवां।
विज्ञापन
विज्ञापन
पिछले तीन वर्षों के दौरान जिले के परिषदीय विद्यालयों में 60 हजार से अधिक नामांकन कम हुए हैं। इसके पीछे एक बच्चे का एक से अधिक विद्यालय में नामांकन बड़ी वजह माना जा रहा है। प्रेरणा पोर्टल पर हर बच्चे का डाटा अपलोड किए जाने के बाद डुप्लीकेसी खत्म हो गई है। नतीजा नामांकन में कमी आई है। बावजूद इसके विभाग हर बच्चे को शिक्षित करने के संकल्प के साथ स्कूलों में नामांकन बढ़ाने पर पूरा जोर दे रहा है। शिक्षकों को हिदायत दी गई है कि वह हर घर में संपर्क कर बच्चों का नामांकन सुनिश्चित कराएं। प्राथमिक विद्यालय कुरवल के शिक्षकों पर इसका कोई असर नहीं है। करीब आठ सौ आबादी वाले इस गांव के विद्यालय में पहली से पांचवीं तक सिर्फ सात बच्चों का नामांकन ही हो पाया है। बृहस्पतिवार को इसमें भी सिर्फ चार बच्चे ही कक्षा में मौजूद मिले। विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक, दो शिक्षामित्र और दो रसोइयाें की तैनाती है। बीआरसी कार्यालय से मात्र सात किमी दूर स्थित विद्यालय की यह दशा चौंकाने वाली है। इस संबंध में प्रधानाध्यापक रामसुधारक चौबे का कहना था कि बच्चे यहां से नाम कटवा कर दूसरे स्कूलों में जा रहे हैं। हालांकि इसका कारण वह नहीं बता पाए। दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना था कि इस स्कूल के अध्यापक समय से नहीं आते और न ही पढ़ाई कराते हैं। ऐसे में बच्चों को विद्यालय कौन भेजेगा।
विज्ञापन
प्राथमिक विद्यालय कुरवल का मामला संज्ञान में है। प्रधानाध्यापक को पूर्व में भी नामांकन व उपस्थिति बढ़ाने की हिदायत दी जा चुकी है। समायोजन की सूची में यह विद्यालय नहीं है। उच्चधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया गया है। -बृजेश कुमार सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी, नगवां।
विज्ञापन