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Sonebhadra News: एक साल में वृद्धाश्रम में बढ़ गए 30 बुजुर्ग

Mon, 30 Sep 2024 11:08 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 30 Sep 2024 11:08 PM IST
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30 elderly people increased in old age home in one year
समाज कल्याण विभाग से संचालित वृद्धाश्रम में पिछले एक साल में 30 नए बुजुर्ग बढ़ गए हैं। इनमें ज्यादातर ऐसे हैं, जिनका भरा-पूरा परिवार है। खेत, मकान सब कुछ होने के बाद भी वह बेसहारा होकर वृद्धाश्रम में शरण लिए हुए हैं।
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आपस में मिलकर एक-दूसरे का दर्द बांट रहे हैं। अपनों से ढेरों जख्म खाने के बाद भी ज्यादातर बुजुर्ग अपने परिवार के लिए दुआएं ही मांग रहे हैं। उनका कहना है कि वह अपनी जिंदगी तो जैसे-तैसे काट लेंगे, लेकिन उनकी संतानें सुखी रहें, अब बस यही कामना है।
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प्रयागराज की संस्था के माध्यम से छपका में संचालित वृद्धाश्रम में वर्ष 2023 में 100 बुजुर्ग शरण लिए हुए थे। इनमें से 10 बुजुर्गों की मौत हो गई या लोगों के समझाने के बाद परिजन उन्हें घर ले जा चुके हैं। वर्तमान में यहां 120 बुजुर्गों का पंजीकरण है।
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आश्रम में शरण लिए ज्यादातर बुजुर्ग दो-तीन साल से यहां रह रहे हैं। उनके मन में अंतहीन पीड़ा है। अपनों की उपेक्षा का दर्द है। बावजूद वह उसे जुबां पर लाने से कतराते हैं। वह अकेले बैठकर रोते हैं, तब आश्रम में ही रहने वाले उनके दूसरे साथी सहारा बनते हैं।
बुजुर्ग अपनों के पास जाना भी चाहते हैं, लेकिन वहां मिलने वाली उपेक्षा हर बार उनके पैर थाम देती है। वृद्धाश्रम के संचालक नवीन कुमार शुक्ल ने बताया कि आश्रम में बुजुर्गों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। उनके खान-पान, मनोरंजन आदि की व्यवस्था की गई है। कभी-कभी कुछ बुजुर्ग अपने घर जाते भी हैं, लेकिन चंद दिनों में ही फिर लौटकर आ जाते हैं।

ओबरा परियोजना में करते थे नौकरी, अब वृद्धाश्रम में सहारा
वृद्धाश्रम में रह रहे 68 वर्षीय बब्बन सिंह मूल रूप से बक्सर के रहने वाले हैं। ओबरा परियोजना में टेक्निशियन की नौकरी करने आए और यहीं बस गए। उनकी दो शादियां हुई हैं। आठ संतानें हैं। बावजूद वह वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद मिले पैसे घरवालों ने ले लिए। उन्हें करीब 28 हजार रुपये पेंशन मिलती है, इस पर भी घर वालों की नजर रहती है। उनकी जेब में फूटी कौड़ी नहीं छोड़ते थे। उलाहना और उपेक्षा अलग होती थी। आजिज होकर वृद्धाश्रम में चले आए। कुछ दिन पहले घर गए थे, लेकिन वहां किसी ने भी उनका हाल जानने तक की जरूरत नहीं समझी। लिहाजा वापस वृद्धाश्रम में ही आ गए।


सात बीघा जमीन, दो मकान, फिर भी वृद्धाश्रम में ठौर
सदर तहसील के एक गांव निवासी 80 वर्षीय बुजुर्ग चुर्क सीमेंट फैक्ट्री में काम करते थे। अपनी नौकरी से उन्होंने करीब दस बीघा जमीन खरीदी। मकान बनवाया। बावजूद खुद वृद्धाश्रम में सहारा लिए हुए हैं। उनके तीन बेटों में एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी करता है, जबकि दो खेती और मजदूरी में लगे हैं। बताया कि घर में रोज-रोज का क्लेश और ताने सुनकर वहां से चला आया। बीच-बीच में जाते भी हैं, मगर वहां मन नहीं लगता। खैर मन तो यहां भी रहने का नहीं करता, लेकिन घर की अपेक्षा यहां थोड़ा सुकून मिलता है। बताया कि अब
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