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मोम रंगों के जरिए एक बीज, द्वि-बीज पौधों की कराई पहचान
Updated Mon, 26 Nov 2018 11:47 PM IST
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म्योरपुर। बनवासी सेवा आश्रम में चल रही प्रकृति अध्ययन कार्यशाला के तीसरे दिन सोमवार को सहभागियों ने प्रकृति भ्रमण करके पेड़ पौधों की पत्तियों, तना, डाली का विभिन्न पहलुओं से अवलोकन किया। यहां न सिर्फ उनका तुलनात्मक अध्ययन किया गया बल्कि पेड़ पौधों को हानि पहुंचाए बिना उनके नमूने भी लिए गए। सहभागी छात्र-छात्राओं ने विभिन्न आकार व रंगों वाले पत्तों व फूलों को कागज पर चिपका कर विभिन्न पशुओं व पक्षियों की आकृतियां बनाई।
प्रशिक्षक संध्या वर्मा एवं बनवारीलाल मलैया ने पत्तों के भिन्न-भिन्न आकार का प्रकाश संश्लेषण क्रिया पर पड़ने वाले प्रभावों के विषय में भी बताया। प्रतिभागी अपने हाथ से बनाए उपकरणों से विभिन्न कीट पतंगों को भी हानि पहुंचाए बिना पकड़ कर अपने साथ लाए और उनकी बनावट व रंग को देखा। प्रशिक्षकों ने कीट पतंगों की गतिविधियों व उनके पर्यावरणीय महत्व की जानकारी प्रतिभागियों को दी। बताया कि यह सारे जीव जंतु और पेड़ पौधे हमारे पर्यावरण को समृद्ध बनाते हैं। हमें अपनी आवश्यकताओं के लिए विभिन्न संसाधन उपलब्ध होते हैं। प्रतिभागियों ने समूहों में विभिन्न पत्तों का मोम रंगों के जरिए कागज पर प्रिंट लेकर एक बीज एवं द्विबीज पत्ती पेड़ पौधों की पहचान की। छालों का प्रिंट लेकर उसके जरिए पेड़ों को पहचानने की विधि को सीखा। सरल प्रक्रिया से दोमट, बलुई व चिकनी मिट्टी की पहचान की। उसकी जल धारण क्षमता का पता लगाकर उसमें उपजने वाली फसलों के विषय में जानकारी ली। प्रकृति भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों के मार्गदर्शन के लिए रमेश कुमार, आदित्य, प्रमोद कुमार, कुंजबिहारी, इंदुबाला सिंह, अमरदेव पांडे, लक्ष्मी, अनीता व विजय प्रताप सिंह मौजूद रहे।
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प्रशिक्षक संध्या वर्मा एवं बनवारीलाल मलैया ने पत्तों के भिन्न-भिन्न आकार का प्रकाश संश्लेषण क्रिया पर पड़ने वाले प्रभावों के विषय में भी बताया। प्रतिभागी अपने हाथ से बनाए उपकरणों से विभिन्न कीट पतंगों को भी हानि पहुंचाए बिना पकड़ कर अपने साथ लाए और उनकी बनावट व रंग को देखा। प्रशिक्षकों ने कीट पतंगों की गतिविधियों व उनके पर्यावरणीय महत्व की जानकारी प्रतिभागियों को दी। बताया कि यह सारे जीव जंतु और पेड़ पौधे हमारे पर्यावरण को समृद्ध बनाते हैं। हमें अपनी आवश्यकताओं के लिए विभिन्न संसाधन उपलब्ध होते हैं। प्रतिभागियों ने समूहों में विभिन्न पत्तों का मोम रंगों के जरिए कागज पर प्रिंट लेकर एक बीज एवं द्विबीज पत्ती पेड़ पौधों की पहचान की। छालों का प्रिंट लेकर उसके जरिए पेड़ों को पहचानने की विधि को सीखा। सरल प्रक्रिया से दोमट, बलुई व चिकनी मिट्टी की पहचान की। उसकी जल धारण क्षमता का पता लगाकर उसमें उपजने वाली फसलों के विषय में जानकारी ली। प्रकृति भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों के मार्गदर्शन के लिए रमेश कुमार, आदित्य, प्रमोद कुमार, कुंजबिहारी, इंदुबाला सिंह, अमरदेव पांडे, लक्ष्मी, अनीता व विजय प्रताप सिंह मौजूद रहे।
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