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डंपर की जगह कंटेनर से होगी कोयले की ढुलाई
Updated Mon, 20 Nov 2017 11:34 PM IST
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सड़क से कोल परिवहन पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सख्ती के बाद अधिकारियों ने सोमवार को नई राह तलाशने का काम किया। अब ट्रक टेलर ( बड़े डंपर) के जगह बंद कंटेनर से कोयले की ढुलाई होगी। इसके लिए संबंधित पक्ष शपथ पत्र दाखिल करेंगे।
प्रदूषण, सड़क हादसों पर गंभीर एनजीटी ने यूपी-एमपी के सीमांचल इलाके में सड़क से हो रहे कोल परिवहन पर रोक लगा चुका है। इसके बाद भी परिवहन बंद नहीं हुआ। एनजीटी के आदेश का अनुपालन नहीं होने और प्रदूषण के ग्राफ में बृद्धि के साथ बढ़ रहे हादसों का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी दुबे ने पूर्ववर्ती आदेश का हवाला देते हुए अधिकरण के जस्टिस स्वतंत्र कुमार को बताया कि आदेश की अवहेलना हो रही है। इसके बाद एनजीटी ने यूपी व एमपी सरकार से जबाब तलब कर लिया। एनजीटी के सख्त रूख के बाद सोमवार को मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोयला, पावर समेत प्रदूषण के कारक बनने वाले सभी उद्योगों के अधिकारियों की एक बैठक बुला लिया। सिंगरौली डीएम अनुराग चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में एनजीटी के आदेश पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद निर्णय लिया गया कि खुले डंपरों के बजाय बंद कंटेनरों से सड़क मार्ग से कोयले की ढुलाई की जाएगी। कोल कंपनी के अधिकारियों ने पक्ष रखते हुए दलील दिया कि तत्काल सड़क परिवहन बंद नहीं किया जा सकता। यह भी जानकारी दिया कि रेल रैक व कनवेयर के जरिए कोल परिवहन करने के लिए कार्य किए जा रहे है। लेकिन सड़क के जरिए कोल परिवहन से हादसे कैसे थमेगें इस का जबाब कोई नहीं दे पाया। सिंगरौली के क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी पीआर देव ने बताया कि कोल परिवहन से जुड़े पक्षों को नोटिस जारी की जाएगी और उनसे शपथ पत्र लिया जाएगा कि कितने दिन में डंपर से परिवहन बंद कर कंटेनर से शुरू करेंगे। डीएम अनुराग चौधरी ने बताया कि एनजीटी की गाइड लाइन के मुताबिक कार्य कराने के लिए प्रशासन गंभीर है।
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प्रदूषण, सड़क हादसों पर गंभीर एनजीटी ने यूपी-एमपी के सीमांचल इलाके में सड़क से हो रहे कोल परिवहन पर रोक लगा चुका है। इसके बाद भी परिवहन बंद नहीं हुआ। एनजीटी के आदेश का अनुपालन नहीं होने और प्रदूषण के ग्राफ में बृद्धि के साथ बढ़ रहे हादसों का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी दुबे ने पूर्ववर्ती आदेश का हवाला देते हुए अधिकरण के जस्टिस स्वतंत्र कुमार को बताया कि आदेश की अवहेलना हो रही है। इसके बाद एनजीटी ने यूपी व एमपी सरकार से जबाब तलब कर लिया। एनजीटी के सख्त रूख के बाद सोमवार को मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोयला, पावर समेत प्रदूषण के कारक बनने वाले सभी उद्योगों के अधिकारियों की एक बैठक बुला लिया। सिंगरौली डीएम अनुराग चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में एनजीटी के आदेश पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद निर्णय लिया गया कि खुले डंपरों के बजाय बंद कंटेनरों से सड़क मार्ग से कोयले की ढुलाई की जाएगी। कोल कंपनी के अधिकारियों ने पक्ष रखते हुए दलील दिया कि तत्काल सड़क परिवहन बंद नहीं किया जा सकता। यह भी जानकारी दिया कि रेल रैक व कनवेयर के जरिए कोल परिवहन करने के लिए कार्य किए जा रहे है। लेकिन सड़क के जरिए कोल परिवहन से हादसे कैसे थमेगें इस का जबाब कोई नहीं दे पाया। सिंगरौली के क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी पीआर देव ने बताया कि कोल परिवहन से जुड़े पक्षों को नोटिस जारी की जाएगी और उनसे शपथ पत्र लिया जाएगा कि कितने दिन में डंपर से परिवहन बंद कर कंटेनर से शुरू करेंगे। डीएम अनुराग चौधरी ने बताया कि एनजीटी की गाइड लाइन के मुताबिक कार्य कराने के लिए प्रशासन गंभीर है।
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