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जिला अस्पताल में हो रहा कामचलाऊ इलाज

Tue, 10 May 2022 12:24 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 10 May 2022 12:24 AM IST
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improvised treatment in district hospital
जिला अस्पताल की पैथॉलाजी में जांच कराने के लिए लगी मरीजों की भीड़। -संवाद - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। जिला अस्पताल में इस समय विकल्प के सहारे इलाज चल रहा है। सर्दी, खांसी, जुकाम के मरीज सर्जन देख रहे हैं। फिजीशियन का काम बाल रोग विशेषज्ञ कर रहे हैं। अस्पताल में 16 चिकित्सकों के पद खाली हैं। इसके चलते जिस मर्ज के चिकित्सक की सलाह की जरूरत होती है वह नहीं मिल पाता। केवल कामचलाऊ तरीके से मरीजों को इलाज मिल रहा है। इससे मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। वह अपनी मर्ज के विशेषज्ञ को दिखाने के लिए महंगी फीस देकर बाहर से इलाज करवाते हैं।
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जिला अस्पताल में इस समय चिकित्सकों संकट है। पिछले पांच माह में सात विशेषज्ञ चिकित्सक सेवानिवृत्त होने के चलते इलाज की व्यवस्था बेपटरी हो गई है। नए डॉक्टर की तैनाती न होने का खामियाजा मरीज भुगत रहे है। अब हालत बहुत ही खराब है। जिला अस्पताल में रोजाना करीब दो हजार मरीज आ रहे हैं।
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इन मरीजों को अपनी मर्ज के चिकित्सक नहीं मिल रहे है। हाल ये है कि सर्दी, खांसी व जुकाम के मरीजों का इलाज फिजीशियन करते हैं। इनका इलाज सर्जन डॉ. गौरव मिश्रा कर रहे है। अस्पताल में केवल डॉ. अनुपम मिश्रा फिजीशियन होने से कभी वह ओपीडी तो कभी भर्ती मरीजों का इलाज करते हैं।
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इससे एक ही चिकित्सक पर अधिक भार आने से उनके सामने सभी मरीजों को देख पाना मुश्किल हो रहा है। दंत रोग विभाग में तो कोई चिकित्सक नहीं है। डॉक्टरों की यह कमी मरीजों के इलाज पर भारी पड़ रही है। मरीजों की मर्ज के अनुसार चिकित्सक न मिलने से केवल कामचलाऊ तरीके से अस्पताल में इलाज करवाया जा रहा है।
जिला अस्पताल में इस समय केवल सर्जन डॉ. गौरव मिश्रा हैं। यह सुबह ओपीडी में फिजीशियन सहित अपने मरीज देखते हैं। उसके बाद वह ऑपरेशन थियेटर में चले जाते हैं। रोजाना करीब 10 ऑपरेशन कर रहे हैं। शाम तक ऑपरेशन करने के बाद वह वार्ड में भर्ती मरीजों को देखते हैं। सीएमएस डॉ. आरके सिंह का कहना है डॉ. गौरव मिश्रा पर बहुत जिम्मेदारी है। दिन में ड्यूटी करते हैं अगर रात में जरूरत पड़ती है तो वह एक ही कॉल पर हाजिर हो जाते हैं।
नहीं मिले फिजीशियन
पिसावां इलाके के मूलचंद सोमवार को सुबह खांसी व सांस फूलने की समस्या से कारण जिला अस्पताल में इलाज करवाने पहुंच थे। पहले वह डॉ. जेएन सिंह को तलाशते रहे। पता चला कि वे छुट्टी पर हैं तो उन्होंने डॉ. गौरव मिश्रा को दिखाया। इसके बाद वह दवा लेकर घर चले गए। पेट में तेज दर्द होने पर राम प्रकाश अस्पताल आए थे। वह डॉ. अनुपम मिश्रा को दिखाना चाहते थे। जब ओपीडी में अनुपम मिश्रा नहीं मिले तो उन्होंने बाल रोग विशेषज्ञ को दिखवाया। राम प्रकाश ने बताया कि अगर पहले से पता होता तो जिला अस्पताल न आकर दूसरे चिकित्सक से इलाज करवा लेते।
चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा अस्पताल
जिला अस्पताल प्रशासन के मुताबिक एक सामान्य सर्जन व दो बर्न के सर्जन के पद खाली चल रहे हैं। इसी तरह दंत रोग विशेषज्ञ का पद काफी समय से खाली है। फिजीशियन के तीन पद खाली चल रहे हैं। रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली है। इसी तरह अन्य चिकित्सकों के पद खाली होने से अस्पताल चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है।

अस्पताल में इस समय चिकित्सकों की बेहद कमी है। शासन को नए चिकित्सकों की पोस्टिंग के लिए कई बार पत्र लिखा जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द चिकित्सक आ जाएंगे। जब तक चिकित्सक नहीं आते, तब तक काम चलाया जा रहा है।
- डॉ. आरके सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल
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