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3.35 लाख पात्रों का नहीं बना गोल्डन कार्ड
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सीतापुर। डेढ़ साल से जिले में आयुष्मान योजना चल रही है। पर गोल्डन कार्ड वितरण की स्थिति खराब है। 3.35 लाख लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड नहीं मिल सका है। इसके पीछे स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि ये लोग इस योजना के प्रति जागरूक ही नहीं हैं। पात्र इलाज कराने पहुंचते हैं तो उनको बिना गोल्डन कार्ड के लौटना पड़ रहा है।
अप्रैल 2018 से जिले में आयुष्मान योजना शुरू हुई थी। इस योजना के तहत 4.31 लाख लाभार्थियों का चयन किया गया है। यह लाभार्थी 2011 की सामाजिक आर्थिक जनगणना के आधार पर चयनित किए गए है। इन सभी को चयन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से चिट्ठी भेजी गई है। इसके बाद इनको गोल्डन कार्ड बनवाना है।
बिना गोल्डन कार्ड के इनका इलाज शुरू नहीं हो सकता है। डेढ़ बरस बाद महज 96 हजार लाभार्थियों के पास ही गोल्डन कार्ड उपलब्ध हो सके है। जबकि 3.35 लाख लाभार्थी बिना गोल्डन कार्ड के ही घूम रहे है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि गोल्डन कार्ड बनने पर ही लाभ दिया जाएगा।
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इसके पीछे काफी हद तक लाभार्थी व स्वास्थ्य विभाग दोनों जिम्मेदार है। लाभार्थियों का कहना है कि इसकी जानकारी नहीं दी गई है। स्वास्थ्य विभाग कहता है शिविर लगाए जा रहे हैं फिर भी लोग रुचि नहीं दिखा रहे है। इससे यह जरूरत के समय इलाज से वंचित हो सकते हैं।
गांव में नहीं लगा कैंप
बसंतलाल तिवारी का कहना है कि योजना में चयन होने की जानकारी मिली थी। उसके बाद घर पर पीएम का पत्र भी आ गया है। रही बात गोल्डन कार्ड की तो इसकी जानकारी नहीं हो सकी है। कमल शुक्ला ने बताया कि गोल्डन कार्ड को लेकर किसी स्वास्थ्य कर्मी ने जानकारी नहीं दी है। गांव में कोई कैम्प भी नहीं हुआ।
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अप्रैल 2018 से जिले में आयुष्मान योजना शुरू हुई थी। इस योजना के तहत 4.31 लाख लाभार्थियों का चयन किया गया है। यह लाभार्थी 2011 की सामाजिक आर्थिक जनगणना के आधार पर चयनित किए गए है। इन सभी को चयन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से चिट्ठी भेजी गई है। इसके बाद इनको गोल्डन कार्ड बनवाना है।
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बिना गोल्डन कार्ड के इनका इलाज शुरू नहीं हो सकता है। डेढ़ बरस बाद महज 96 हजार लाभार्थियों के पास ही गोल्डन कार्ड उपलब्ध हो सके है। जबकि 3.35 लाख लाभार्थी बिना गोल्डन कार्ड के ही घूम रहे है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि गोल्डन कार्ड बनने पर ही लाभ दिया जाएगा।
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इसके पीछे काफी हद तक लाभार्थी व स्वास्थ्य विभाग दोनों जिम्मेदार है। लाभार्थियों का कहना है कि इसकी जानकारी नहीं दी गई है। स्वास्थ्य विभाग कहता है शिविर लगाए जा रहे हैं फिर भी लोग रुचि नहीं दिखा रहे है। इससे यह जरूरत के समय इलाज से वंचित हो सकते हैं।
गांव में नहीं लगा कैंप
बसंतलाल तिवारी का कहना है कि योजना में चयन होने की जानकारी मिली थी। उसके बाद घर पर पीएम का पत्र भी आ गया है। रही बात गोल्डन कार्ड की तो इसकी जानकारी नहीं हो सकी है। कमल शुक्ला ने बताया कि गोल्डन कार्ड को लेकर किसी स्वास्थ्य कर्मी ने जानकारी नहीं दी है। गांव में कोई कैम्प भी नहीं हुआ।