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बालिकाओं को हटाया, पर संस्था को क्लीन चिट
Updated Sat, 11 Aug 2018 12:17 AM IST
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फरवरी माह में रद्द हुई थी बालिका गृह की मान्यता, अधिकारी दे रहे गोलमोल जवाब
सीतापुर। महिला कल्याण निदेशालय स्तर से मान्यता रद्द होने की खबर ‘अमर उजाला’ में छपने के बाद सरकारी मशीनरी हरकत में आई। आननफानन यहां मौजूद बालिकाओं को लखनऊ स्थानांतरित कर दिया है। पर प्रशासन संबंधित बालिका गृह पर कार्रवाई के बजाए उसे क्लीनचिट दे रहा है।
लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर मान्यता रद्द होने के बाद प्रशासन संस्था पर मेहरबान क्यों है? निदेशक के आदेश के बाद भी अब तक बालिकाओं को लखनऊ शिफ्ट क्यों नहीं किया गया था। बता दें कि जिले में उमा महिला उत्थान समिति बालगृह (बालिका) संचालित करती है।
हाल ही में आठ फरवरी को महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक डॉ. अलका टंडन भटनागर ने किशोर न्याय अधिनियम 2000 का हवाला देते हुए समिति का पंजीकरण निरस्त कर दिया था। वहीं इस बालगृह (बालिका) में मौजूद बालिकाओं को तत्काल राजकीय बालगृह (बालिका) मोती नगर लखनऊ में स्थानांतरित किए जाने के आदेश दिए थे।
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बावजूद इसके छह माह तक यह केंद्र अवैध रूप से संचालित होता रहा। यही नहीं यहां के केंद्र में नौ बालिकाएं मौजूद थीं। अमर उजाला में यह खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। आननफानन में लिखा-पढ़ी पूरी करके चार बच्चियों को उनके परिवार को सौंप दिया। जबकि पांच बच्चियों को राजकीय बालगृह (बालिका) लखनऊ भेजा गया।
चौंकाने वाली बात तो यह है कि बच्चियों को तो तत्काल स्थानांतरित कर दिया गया। लेकिन प्रशासन ने संस्था को जिम्मेदार नहीं माना। जबकि मान्यता रद्द होने के छह माह बाद तक उन बच्चियों को इस बालिका गृह में रखा गया। हालांकि जिला प्रोबेशन अधिकारी अश्वनी कुमार इस मामले को लेकर कुछ भी बोलने से कतराते नजर आए।
अचानक कैसे ले लिया परिवार ने
इस बालिका गृह में चार ऐसी बच्चियां थीं, जिनके परिवारीजन मौजूद थे। जब वे इस बालिका गृह की चहारदीवारी में थी, तब तर्क यह था कि उनके परिवारीजन बच्चियों को पालने से इंकार कर रहे हैं। छह महीने से उन बच्चियों को बालिका गृह में ही रखा गया।
फिर अचानक उनके परिवारीजन भी आ गए और बच्चियों को लेकर भी घर चले गए। आखिर खबर छपने के बाद ही परिवारीजन अचानक कहां से प्रकट हो गए और वे उन बच्चियों के पालन पोषण के लिए भी तैयार हो गए, जो बीते छह माह से अपनी बच्चियों की खैर-खबर तक लेने नहीं आते थे।
स्वीकृति के लिए की गई है संस्तुति
उमा महिला उत्थान समिति बालगृह (बालिका) ने अब जो स्थान लिया है। वह पूरी तरह से मानक पर खरा उतरता है। इसके संचालन के लिए शासन को संस्तुति की गई है।
-शीतल वर्मा, डीएम
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सीतापुर। महिला कल्याण निदेशालय स्तर से मान्यता रद्द होने की खबर ‘अमर उजाला’ में छपने के बाद सरकारी मशीनरी हरकत में आई। आननफानन यहां मौजूद बालिकाओं को लखनऊ स्थानांतरित कर दिया है। पर प्रशासन संबंधित बालिका गृह पर कार्रवाई के बजाए उसे क्लीनचिट दे रहा है।
लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर मान्यता रद्द होने के बाद प्रशासन संस्था पर मेहरबान क्यों है? निदेशक के आदेश के बाद भी अब तक बालिकाओं को लखनऊ शिफ्ट क्यों नहीं किया गया था। बता दें कि जिले में उमा महिला उत्थान समिति बालगृह (बालिका) संचालित करती है।
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हाल ही में आठ फरवरी को महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक डॉ. अलका टंडन भटनागर ने किशोर न्याय अधिनियम 2000 का हवाला देते हुए समिति का पंजीकरण निरस्त कर दिया था। वहीं इस बालगृह (बालिका) में मौजूद बालिकाओं को तत्काल राजकीय बालगृह (बालिका) मोती नगर लखनऊ में स्थानांतरित किए जाने के आदेश दिए थे।
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बावजूद इसके छह माह तक यह केंद्र अवैध रूप से संचालित होता रहा। यही नहीं यहां के केंद्र में नौ बालिकाएं मौजूद थीं। अमर उजाला में यह खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। आननफानन में लिखा-पढ़ी पूरी करके चार बच्चियों को उनके परिवार को सौंप दिया। जबकि पांच बच्चियों को राजकीय बालगृह (बालिका) लखनऊ भेजा गया।
चौंकाने वाली बात तो यह है कि बच्चियों को तो तत्काल स्थानांतरित कर दिया गया। लेकिन प्रशासन ने संस्था को जिम्मेदार नहीं माना। जबकि मान्यता रद्द होने के छह माह बाद तक उन बच्चियों को इस बालिका गृह में रखा गया। हालांकि जिला प्रोबेशन अधिकारी अश्वनी कुमार इस मामले को लेकर कुछ भी बोलने से कतराते नजर आए।
अचानक कैसे ले लिया परिवार ने
इस बालिका गृह में चार ऐसी बच्चियां थीं, जिनके परिवारीजन मौजूद थे। जब वे इस बालिका गृह की चहारदीवारी में थी, तब तर्क यह था कि उनके परिवारीजन बच्चियों को पालने से इंकार कर रहे हैं। छह महीने से उन बच्चियों को बालिका गृह में ही रखा गया।
फिर अचानक उनके परिवारीजन भी आ गए और बच्चियों को लेकर भी घर चले गए। आखिर खबर छपने के बाद ही परिवारीजन अचानक कहां से प्रकट हो गए और वे उन बच्चियों के पालन पोषण के लिए भी तैयार हो गए, जो बीते छह माह से अपनी बच्चियों की खैर-खबर तक लेने नहीं आते थे।
स्वीकृति के लिए की गई है संस्तुति
उमा महिला उत्थान समिति बालगृह (बालिका) ने अब जो स्थान लिया है। वह पूरी तरह से मानक पर खरा उतरता है। इसके संचालन के लिए शासन को संस्तुति की गई है।
-शीतल वर्मा, डीएम