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Shahjahanpur News: टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में दिल्ली में धरना चार अप्रैल को
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शहर के एक होटल में पत्रकारों से बातचीत करते टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्य
- फोटो : 1
शाहजहांपुर। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष व उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री संजय सिंह ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता थोपना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। इससे पूरे देश के 20 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। इसके विरोध में पूरे देश के लाखों शिक्षक चार अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। आंदोलन की दिल्ली प्रशासन ने अनुमति दे दी है। प्रदर्शन में 19 प्रदेशों के शिक्षक शामिल होंगे।
मंगलवार को शहर के एक होटल में हुई पत्रकार वार्ता में संजय सिंह ने बताया कि जिले से दो हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं प्रदर्शन में शामिल होने के लिए तैयार हैं। प्रत्येक विकासखंड से एक बस भेजना अनिवार्य किया गया है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना के माध्यम से शिक्षक टीईटी को अनिवार्य किया है।
किंतु उससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस अनिवार्यता से छूट प्रदान की गई है। विभिन्न राज्यों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम अलग-अलग तिथियों में लागू हुआ। ऐसे में पूर्व नियुक्त शिक्षकों को भी टीईटी से छूट मिलनी चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अधिक संख्या में दिल्ली पहुंचकर आंदोलन को सफल बनाएं।
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इस मौके पर टीएफआई के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सरताज अली, शिक्षक नेता मुनीश मिश्र, रविंद्र पाल प्रजापति, राजकुमार तिवारी, ब्रजेश कुमार वर्मा, राजकुमार सिंह, सरताज अली, यशपाल सिंह, डॉ. विनय गुप्ता, विजय प्रताप सिंह, महेंद्र सिंह, अरुण भदौरिया, अश्विनी अवस्थी, अरविंद त्रिपाठी, अरविंद गौतम आदि मौजूद रहे।
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13 को जिला मुख्यालय पर होगा धरना
अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की बैठक रोटी गोदाम में हुई। इसमें लखनऊ के ईको गाॅर्डन में राज्य स्तरीय शिक्षक हुंकार महारैली पर चर्चा की गई।
रोटी गोदाम परिसर में बैठक में जिलाध्यक्ष ऋषिकांत पांडेय ने कहा कि आरटीई एक्ट में एनसीईटी ने अगस्त 2017 में गोपनीय तरीके से किए गए अनुचित संशोधन को निरस्त कराने के लिए देश भर के शिक्षक सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हैं। 13 अप्रैल को सभी जिला मुख्यालयों पर सांकेतिक धरना देने के साथ मशाल जुलूस निकाला जाएगा। उसके बाद तीन मई को लखनऊ में रैली भी होगी। बैठक में राजकमल आर्य, अनीस अहमद, धनपाल, सतीश सिंह, अनंत बाजपेई, रत्नाकर दीक्षित आदि मौजूद रहे। संवाद
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मंगलवार को शहर के एक होटल में हुई पत्रकार वार्ता में संजय सिंह ने बताया कि जिले से दो हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं प्रदर्शन में शामिल होने के लिए तैयार हैं। प्रत्येक विकासखंड से एक बस भेजना अनिवार्य किया गया है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना के माध्यम से शिक्षक टीईटी को अनिवार्य किया है।
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किंतु उससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस अनिवार्यता से छूट प्रदान की गई है। विभिन्न राज्यों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम अलग-अलग तिथियों में लागू हुआ। ऐसे में पूर्व नियुक्त शिक्षकों को भी टीईटी से छूट मिलनी चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अधिक संख्या में दिल्ली पहुंचकर आंदोलन को सफल बनाएं।
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इस मौके पर टीएफआई के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सरताज अली, शिक्षक नेता मुनीश मिश्र, रविंद्र पाल प्रजापति, राजकुमार तिवारी, ब्रजेश कुमार वर्मा, राजकुमार सिंह, सरताज अली, यशपाल सिंह, डॉ. विनय गुप्ता, विजय प्रताप सिंह, महेंद्र सिंह, अरुण भदौरिया, अश्विनी अवस्थी, अरविंद त्रिपाठी, अरविंद गौतम आदि मौजूद रहे।
13 को जिला मुख्यालय पर होगा धरना
अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की बैठक रोटी गोदाम में हुई। इसमें लखनऊ के ईको गाॅर्डन में राज्य स्तरीय शिक्षक हुंकार महारैली पर चर्चा की गई।
रोटी गोदाम परिसर में बैठक में जिलाध्यक्ष ऋषिकांत पांडेय ने कहा कि आरटीई एक्ट में एनसीईटी ने अगस्त 2017 में गोपनीय तरीके से किए गए अनुचित संशोधन को निरस्त कराने के लिए देश भर के शिक्षक सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हैं। 13 अप्रैल को सभी जिला मुख्यालयों पर सांकेतिक धरना देने के साथ मशाल जुलूस निकाला जाएगा। उसके बाद तीन मई को लखनऊ में रैली भी होगी। बैठक में राजकमल आर्य, अनीस अहमद, धनपाल, सतीश सिंह, अनंत बाजपेई, रत्नाकर दीक्षित आदि मौजूद रहे। संवाद