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रनालाल को घर ले गया इंद्र कुमार, पुलिस ने की बेटे की काउंसलिंग
सार
पिता के जीवित मिलने पर 12 दिन के बाद इंद्र कुमार वार्ड में लौटा था। उसके अगले दिन शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया था। 30 अगस्त को इंद्र कुमार को जानकारी हुई कि उसके पिता रनालाल राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती है।
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विस्तार
रनालाल घर पहुंचे, पुलिस ने की बेटे की काउंसलिंग
-पिता को मृत मानकर अज्ञात व्यक्ति का कर दिया था अंतिम संस्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती रनालाल को उनका बेटा इंद्र कुमार घर ले गया। पिता के जीवित मिलने पर 12 दिन के बाद इंद्र कुमार वार्ड में लौटा था। इस दौरान पुलिस ने उसकी काउंसलिंग की है, साथ ही चेताया कि रनालाल को परेशान किया तो जेल भेज देंगे।
22 अगस्त को बरेली मोड़ पर सड़क किनारे पड़े मिले शव को इंद्रकुमार ने अपने पिता रनालाल निवासी गांव जिंदपुरा थाना पसगवां जिला लखीमपुर बताकर पहचान की थी। उसके अगले दिन शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया था। इंद्र कुमार ने पिता के हुलिये से मिलते शव को घर ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया। निधन के बाद की अन्य परंपराएं भी पूर्ण कर दी। 30 अगस्त को इंद्र कुमार को जानकारी हुई कि उसके पिता रनालाल राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। पुलिस तक मामला पहुंच गया। पिता के जीवित होने के 24 घंटे के बाद इंद्र कुमार अस्पताल के वार्ड में पहुंचा और अगले दिन चला गया।
रनालाल फिर अकेले पड़ गए। उन्होंने बेटे को कई लोगों से खबर भिजवाई। इस बीच रनालाल ने बताया कि बेटा उन्हें खाने को नहीं देता था। तभी वह साधू बन गए थे। रनालाल का बेटा इंद्र कुमार सोमवार को आया और उन्हें अपने साथ ले गया। इंद्रकुमार ने बताया कि तबीयत खराब होने के कारण वह नहीं आ सका था। इससे पहले पुलिस को सूचना भी दी। पुलिस ने इंद्र कुमार को पिता को परेशान न करने की चेतावनी दी है। सीओ सिटी अखंड प्रताप सिंह ने बताया कि रनालाल के पुत्र की काउंसलिंग की गई, ताकि वह अपने पिता को परेशान नहीं करें।
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-पिता को मृत मानकर अज्ञात व्यक्ति का कर दिया था अंतिम संस्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती रनालाल को उनका बेटा इंद्र कुमार घर ले गया। पिता के जीवित मिलने पर 12 दिन के बाद इंद्र कुमार वार्ड में लौटा था। इस दौरान पुलिस ने उसकी काउंसलिंग की है, साथ ही चेताया कि रनालाल को परेशान किया तो जेल भेज देंगे।
22 अगस्त को बरेली मोड़ पर सड़क किनारे पड़े मिले शव को इंद्रकुमार ने अपने पिता रनालाल निवासी गांव जिंदपुरा थाना पसगवां जिला लखीमपुर बताकर पहचान की थी। उसके अगले दिन शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया था। इंद्र कुमार ने पिता के हुलिये से मिलते शव को घर ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया। निधन के बाद की अन्य परंपराएं भी पूर्ण कर दी। 30 अगस्त को इंद्र कुमार को जानकारी हुई कि उसके पिता रनालाल राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। पुलिस तक मामला पहुंच गया। पिता के जीवित होने के 24 घंटे के बाद इंद्र कुमार अस्पताल के वार्ड में पहुंचा और अगले दिन चला गया।
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रनालाल फिर अकेले पड़ गए। उन्होंने बेटे को कई लोगों से खबर भिजवाई। इस बीच रनालाल ने बताया कि बेटा उन्हें खाने को नहीं देता था। तभी वह साधू बन गए थे। रनालाल का बेटा इंद्र कुमार सोमवार को आया और उन्हें अपने साथ ले गया। इंद्रकुमार ने बताया कि तबीयत खराब होने के कारण वह नहीं आ सका था। इससे पहले पुलिस को सूचना भी दी। पुलिस ने इंद्र कुमार को पिता को परेशान न करने की चेतावनी दी है। सीओ सिटी अखंड प्रताप सिंह ने बताया कि रनालाल के पुत्र की काउंसलिंग की गई, ताकि वह अपने पिता को परेशान नहीं करें।
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