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Shahjahanpur News: धूल बना रही अस्थमा रोगी, बच्चे भी चपेट में आ रहे
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डाॅ. राजेश कुमार।
शाहजहांपुर। धूल और धुएं के कण अंदर जाकर लोगों को अस्थमा का रोगी बना रहे हैं। टूटी सड़कों से उठने वाली धूल भी अस्थमा का कारण बन सकती है। वहीं गेहूं की कटाई करने वालों को भी सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। इसकी चपेट में सिर्फ बड़े ही नहीं, बल्कि बच्चे भी आ रहे हैं। डॉक्टर के अनुसार, अस्थमा में सांस की नली सख्त या सिकुड़ जाती है और उसमें सूजन आ जाती है। इससे सांस लेते समय परेशानी महसूस होती है।
विश्व अस्थमा दिवस पांच मई को मनाया जाता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि इस दिवस का मकसद दमा को लेकर जागरूकता और रोकथाम के लिए प्रयास बढ़ाना है। अस्थमा रोग फेफड़ों से संबंधित है। कफ बना रहना, बलगम आना, सांस लेने में आवाज करना और सीने में खिंचाव पैदा होना इसका लक्षण है।
उन्होंने बताया कि गेहूं की कटाई करने वाले लोगों और प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहने के कारण ज्यादातर लोग अस्थमा से ग्रसित हो जाते हैं। बुजुर्गों के साथ ही यह बीमारी अब युवाओं और बच्चों को भी अपना शिकार बना रही है। अस्थमा के मरीज को सांस लेने और सांस छोड़ने में दिक्कत आती है।
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श्वास नली व अन्य नलिकाओं में सूजन व सिकुड़न आती है, जिसकी वजह से मरीज का दम फूलने लगता है। छाती में जकड़न महसूस हो सकती है और सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज भी आती है। धूल वाली चीजों से दूर रहें। इनहेलर उपचार का सबसे अच्छा माध्यम है। इनहेलर लेने के बाद कुल्ला जरूर करें।
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ये अपनाएं उपाय
- निर्माण स्थल या प्रदूषित इलाके में जाने से पहले मास्क आदि सुरक्षा उपायों को अपनाएं।
- अगर परिवार में कोई धूम्रपान करता है तो पैसिव स्मोकिंग से अस्थमा की समस्या बढ़ेगी, सावधान रहें।
- पालतू जानवरों और पक्षियों से एलर्जी रहती है, तो उनसे दूर रहें।
- बाहर निकलते समय मास्क पहनें।
(जैसा कि राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया)
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विश्व अस्थमा दिवस पांच मई को मनाया जाता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि इस दिवस का मकसद दमा को लेकर जागरूकता और रोकथाम के लिए प्रयास बढ़ाना है। अस्थमा रोग फेफड़ों से संबंधित है। कफ बना रहना, बलगम आना, सांस लेने में आवाज करना और सीने में खिंचाव पैदा होना इसका लक्षण है।
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उन्होंने बताया कि गेहूं की कटाई करने वाले लोगों और प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहने के कारण ज्यादातर लोग अस्थमा से ग्रसित हो जाते हैं। बुजुर्गों के साथ ही यह बीमारी अब युवाओं और बच्चों को भी अपना शिकार बना रही है। अस्थमा के मरीज को सांस लेने और सांस छोड़ने में दिक्कत आती है।
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श्वास नली व अन्य नलिकाओं में सूजन व सिकुड़न आती है, जिसकी वजह से मरीज का दम फूलने लगता है। छाती में जकड़न महसूस हो सकती है और सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज भी आती है। धूल वाली चीजों से दूर रहें। इनहेलर उपचार का सबसे अच्छा माध्यम है। इनहेलर लेने के बाद कुल्ला जरूर करें।
ये अपनाएं उपाय
- निर्माण स्थल या प्रदूषित इलाके में जाने से पहले मास्क आदि सुरक्षा उपायों को अपनाएं।
- अगर परिवार में कोई धूम्रपान करता है तो पैसिव स्मोकिंग से अस्थमा की समस्या बढ़ेगी, सावधान रहें।
- पालतू जानवरों और पक्षियों से एलर्जी रहती है, तो उनसे दूर रहें।
- बाहर निकलते समय मास्क पहनें।
(जैसा कि राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया)