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Shahjahanpur News: रामगंगा में उफान जारी रहने से पिटारमऊ मार्ग पर धंस गई दूसरी पुलिया
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मिर्जापुर नर्सरी के पास नई बस्ती के रामलाल के घर में घुसा पानी।
जलालाबाद (शाहजहांपुर)। बहगुल नदी को अपने साथ लेकर बह रही रामगंगा में शुक्रवार को भी उफान जारी रहने से तमाम तटीय गांव बाढ़ से चौतरफा घिर गए हैं। पानी के तेज बहाव में मिट्टी कटने से पिटारमऊ मार्ग पर दूसरी पुलिया भी धंस गई है। चारों तरफ पानी और आवागमन के रास्ते बंद होने से तटीय गांवों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और लोग दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कड़ी मशक्कत से जूझ रहे हैं। इस बीच, एसडीएम मधुसूदन गुप्ता ने तहसीलदार के साथ शुक्रवार को दोपहर मोटरबोट से बाढ़ प्रभावित कई गांवों का जायजा लिया।
सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष से बताया गया कि बृहस्पतिवार को रात आठ बजे की तुलना में शुक्रवार को शाम चार बजे तक अल्हागंज के डबरी घाट पर रामगंगा का जलस्तर नौ सेमी बढ़कर 137.77 मीटर हो गया है और वहां नदी खतरे के निशान से 47 सेमी ऊपर पहुंच गई है। पानी का फैलाव अब नगर के पास गांव याकूबपुर और रौली बौरी के निचले इलाके तक हो गया है। शुक्रवार की शाम बरेली-फर्रुखाबाद हाईवे से नूरपुर करही जाने वाले पर दो जगह पानी सड़क के आर-पार बहने लगा है।
इसे देखते इस रास्ते से होकर मंझरा, कटरिया, नूरपुर करही सहित अन्य गांवों को जाने वाले लोग पिटारमऊ होकर निकलने लगे, लेकिन इस मार्ग पर भी आसपास पानी भरने से पिटारमऊ गांव से आगे बनी पुलिया कई स्थानों पर धंस गई। उसके आगे बनी एक अन्य पुलिया पानी के तेज बहाव से पहले ही पूरी तरह टूट चुकी है।
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नूरपुर करही के ऋषिपाल वर्मा और दानिश, मंझारा के ओमकार, खिलावन आदि ने बताया कि कोला मार्ग पर बनी पुलिया के पाइप में कई दिन पहले जलकुंभी फंस जाने से पानी तेजी से नहीं निकल पा रहा है। इस वजह से पानी का बहाव गांव की तरफ मुड़ गया है।
एसडीएम मधुसूदन गुप्ता ने बताया कि कई गांवों के रास्तों पर पानी भर गया है, लेकिन वहां के घर पूरी तरह सुरक्षित हैं। प्रभावित परिवारों को खाद्य रसद, पशुओं का चारा और आवश्यकता की अन्य वस्तुएं मुहैया कराने को अलग-अलग राजस्व टीमें लगाई गई हैं। नाव अथवा मोटरबोट उपलब्ध कराई जा रही है। कसारी गांव में चिकित्सा शिविर लगाया गया है।
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प्रसव पीड़ा होने पर क्षतिग्रस्त पुलिया से पहुंची एम्बुलेंस
जलालाबाद। रामगंगा की बाढ़ से घिरे मंझारा गांव में शुक्रवार को सुबह एक महिला के प्रसव पीड़ा होने पर उसके घरवाले आसपास बाढ़ की विकट स्थिति देखकर परेशान हो उठे। सूचना देने पर काफी इंतजार के बाद भी कोई राहत नहीं मिलने पर महिला के पति राजकिशोर ने एंबुलेंस के लिए काॅल की। बाद में काफी मुश्किल से एंबुलेंस बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई पुलिया से होकर गांव तक पहुंच गई। गनीमत रही कि महिला को उसके घर वाले एंबुलेंस से उसी पुलिया से होकर अस्पताल ले गए। संवाद
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गंगा का जलस्तर बढ़ने से तटीय गांवों में बाढ़ ने लिया विकराल रूप
मिर्जापुर। पहाड़ों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक हो रही बारिश और बैराजों से अतिरिक्त पानी की निकासी नहीं थमने से गंगा के जलस्तर में शुक्रवार को भी वृद्धि जारी रही। जलालाबाद-शमसाबाद स्टेट हाईवे का चौरा और बसोला गांव के पास करीब 200 मीटर हिस्सा चाैथे दिन भी डूबा रहा। हाईवे पर दो से ढाई फुट पानी तेजी से बहने से कई गांवों के संपर्क मार्ग कट चुके हैं और अब पानी तटीय गांवों सहित कस्बे की बस्ती और नई बस्ती के तमाम घरों में भर जाने से लोगों का जीवनयापन कठिन हो गया है।
सिंचाई विभाग की बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर बृहस्पतिवार रात की तुलना में शुक्रवार को शाम चार बजे तक दो सेमी बढ़कर 143.50 मीटर हो गया है। वहां गंगा खतरे के निशान से सिर्फ 15 सेमी नीचे रह गई है। इससे गंगा के किनारे बसे पैलानी उत्तरी, इस्लामनगर, आजादनगर, मस्जिदनगला आदि गांवों के तराई वाले हिस्से में बने कई घरों के अंदर पानी घुस गया। इन गांवों के संपर्क मार्गों पर पहले से पानी होने और कई रास्ते बाढ़ के तेज बहाव में कट जाने से लोग बाहर से भी खान-पान की वस्तुएं नहीं ला पा रहे हैं।
नई बस्ती के रामलाल ने बताया कि उनके घर में लगभग दो फुट से ज्यादा बाढ़ का पानी भर जाने से खाने-पीने की वस्तुएं भीग गई हैं। इस कारण भोजन आदि की दिक्कत हो रही है। उन्होंने बताया कि दूसरे गांव में रहने वाले उनके परिवार के लोग और रिश्तेदार सुबह-शाम खाना भेज रहे हैं।
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गर्रा में बाढ़ घटने के साथ तेजी से कटने लगीं तटीय गांवों की जमीनें
तिलहर। गर्रा नदी में बाढ़ घटने के साथ जिकड़ीपुर, आजमाबाद, बिहारीपुर, रटा रटी आदि कई तटीय गांवों में उपजाऊ जमीनें एक बार फिर तेजी से कटने लगी हैं। इससे फसली क्षति का सामना कर चुके अपनी जमीनें नदी में कटती देख किसान बेहद दुखी हैं। पशुपालकों को पशुओं के भरण-पोषण की चिंता भी सता रही है क्योंकि आसपास के गांवों में भी हरा चारा नहीं मिल रहा है। एसडीएम आदित्य श्रीवास्तव ने बताया कि राजस्व विभाग की टीमें बाढ़ प्रभावित गांवों में फसल, मकान और भूमि कटान का सर्वे कर रही हैं। सर्वे के आधार पर ग्रामीणों के नुकसान का विवरण पोर्टल पर दर्ज कराकर उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाएगा। संवाद
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गोमती में बारिश के पानी से डूबी फसलें
पुवायां। कई दिन की बारिश के बाद मौसम शुष्क हो गया है, लेकिन गोमती नदी में बारिश का पानी आने से खुटार और पुवायां क्षेत्र में नदी के आसपास फसलें डूब गई हैं।
नदी में तीन दिन से जलस्तर बढ़ रहा था। शुक्रवार को खुटार-पुवायां मार्ग पर गुटैया घाट के पास नदी के उत्तर की ओर से एक किमी तक पानी भरने से धान, गन्ना सहित अन्य फसल डूब गई हैं। किसानों ने बताया कि गन्ने को ज्यादा नुकसान नहीं होगा, लेकिन पानी ज्यादा दिन तक रुका तो धान की फसल खराब हो सकती है। नदी किनारे बने अंत्येष्टि स्थल जाने वाले रास्ते पर कई फुट पानी भर गया है।
नदी के दक्षिणी ओर ऊंचाई ज्यादा होने से फसलों को कम नुकसान हुआ है। बंडा से लेकर लखीमपुर जनपद की सीमा तक फसलें डूबने से किसान परेशाान हैं। किसानों ने नुकसान की आकलन कराने की मांग की है। संवाद
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सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष से बताया गया कि बृहस्पतिवार को रात आठ बजे की तुलना में शुक्रवार को शाम चार बजे तक अल्हागंज के डबरी घाट पर रामगंगा का जलस्तर नौ सेमी बढ़कर 137.77 मीटर हो गया है और वहां नदी खतरे के निशान से 47 सेमी ऊपर पहुंच गई है। पानी का फैलाव अब नगर के पास गांव याकूबपुर और रौली बौरी के निचले इलाके तक हो गया है। शुक्रवार की शाम बरेली-फर्रुखाबाद हाईवे से नूरपुर करही जाने वाले पर दो जगह पानी सड़क के आर-पार बहने लगा है।
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इसे देखते इस रास्ते से होकर मंझरा, कटरिया, नूरपुर करही सहित अन्य गांवों को जाने वाले लोग पिटारमऊ होकर निकलने लगे, लेकिन इस मार्ग पर भी आसपास पानी भरने से पिटारमऊ गांव से आगे बनी पुलिया कई स्थानों पर धंस गई। उसके आगे बनी एक अन्य पुलिया पानी के तेज बहाव से पहले ही पूरी तरह टूट चुकी है।
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नूरपुर करही के ऋषिपाल वर्मा और दानिश, मंझारा के ओमकार, खिलावन आदि ने बताया कि कोला मार्ग पर बनी पुलिया के पाइप में कई दिन पहले जलकुंभी फंस जाने से पानी तेजी से नहीं निकल पा रहा है। इस वजह से पानी का बहाव गांव की तरफ मुड़ गया है।
एसडीएम मधुसूदन गुप्ता ने बताया कि कई गांवों के रास्तों पर पानी भर गया है, लेकिन वहां के घर पूरी तरह सुरक्षित हैं। प्रभावित परिवारों को खाद्य रसद, पशुओं का चारा और आवश्यकता की अन्य वस्तुएं मुहैया कराने को अलग-अलग राजस्व टीमें लगाई गई हैं। नाव अथवा मोटरबोट उपलब्ध कराई जा रही है। कसारी गांव में चिकित्सा शिविर लगाया गया है।
प्रसव पीड़ा होने पर क्षतिग्रस्त पुलिया से पहुंची एम्बुलेंस
जलालाबाद। रामगंगा की बाढ़ से घिरे मंझारा गांव में शुक्रवार को सुबह एक महिला के प्रसव पीड़ा होने पर उसके घरवाले आसपास बाढ़ की विकट स्थिति देखकर परेशान हो उठे। सूचना देने पर काफी इंतजार के बाद भी कोई राहत नहीं मिलने पर महिला के पति राजकिशोर ने एंबुलेंस के लिए काॅल की। बाद में काफी मुश्किल से एंबुलेंस बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई पुलिया से होकर गांव तक पहुंच गई। गनीमत रही कि महिला को उसके घर वाले एंबुलेंस से उसी पुलिया से होकर अस्पताल ले गए। संवाद
गंगा का जलस्तर बढ़ने से तटीय गांवों में बाढ़ ने लिया विकराल रूप
मिर्जापुर। पहाड़ों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक हो रही बारिश और बैराजों से अतिरिक्त पानी की निकासी नहीं थमने से गंगा के जलस्तर में शुक्रवार को भी वृद्धि जारी रही। जलालाबाद-शमसाबाद स्टेट हाईवे का चौरा और बसोला गांव के पास करीब 200 मीटर हिस्सा चाैथे दिन भी डूबा रहा। हाईवे पर दो से ढाई फुट पानी तेजी से बहने से कई गांवों के संपर्क मार्ग कट चुके हैं और अब पानी तटीय गांवों सहित कस्बे की बस्ती और नई बस्ती के तमाम घरों में भर जाने से लोगों का जीवनयापन कठिन हो गया है।
सिंचाई विभाग की बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर बृहस्पतिवार रात की तुलना में शुक्रवार को शाम चार बजे तक दो सेमी बढ़कर 143.50 मीटर हो गया है। वहां गंगा खतरे के निशान से सिर्फ 15 सेमी नीचे रह गई है। इससे गंगा के किनारे बसे पैलानी उत्तरी, इस्लामनगर, आजादनगर, मस्जिदनगला आदि गांवों के तराई वाले हिस्से में बने कई घरों के अंदर पानी घुस गया। इन गांवों के संपर्क मार्गों पर पहले से पानी होने और कई रास्ते बाढ़ के तेज बहाव में कट जाने से लोग बाहर से भी खान-पान की वस्तुएं नहीं ला पा रहे हैं।
नई बस्ती के रामलाल ने बताया कि उनके घर में लगभग दो फुट से ज्यादा बाढ़ का पानी भर जाने से खाने-पीने की वस्तुएं भीग गई हैं। इस कारण भोजन आदि की दिक्कत हो रही है। उन्होंने बताया कि दूसरे गांव में रहने वाले उनके परिवार के लोग और रिश्तेदार सुबह-शाम खाना भेज रहे हैं।
गर्रा में बाढ़ घटने के साथ तेजी से कटने लगीं तटीय गांवों की जमीनें
तिलहर। गर्रा नदी में बाढ़ घटने के साथ जिकड़ीपुर, आजमाबाद, बिहारीपुर, रटा रटी आदि कई तटीय गांवों में उपजाऊ जमीनें एक बार फिर तेजी से कटने लगी हैं। इससे फसली क्षति का सामना कर चुके अपनी जमीनें नदी में कटती देख किसान बेहद दुखी हैं। पशुपालकों को पशुओं के भरण-पोषण की चिंता भी सता रही है क्योंकि आसपास के गांवों में भी हरा चारा नहीं मिल रहा है। एसडीएम आदित्य श्रीवास्तव ने बताया कि राजस्व विभाग की टीमें बाढ़ प्रभावित गांवों में फसल, मकान और भूमि कटान का सर्वे कर रही हैं। सर्वे के आधार पर ग्रामीणों के नुकसान का विवरण पोर्टल पर दर्ज कराकर उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाएगा। संवाद
गोमती में बारिश के पानी से डूबी फसलें
पुवायां। कई दिन की बारिश के बाद मौसम शुष्क हो गया है, लेकिन गोमती नदी में बारिश का पानी आने से खुटार और पुवायां क्षेत्र में नदी के आसपास फसलें डूब गई हैं।
नदी में तीन दिन से जलस्तर बढ़ रहा था। शुक्रवार को खुटार-पुवायां मार्ग पर गुटैया घाट के पास नदी के उत्तर की ओर से एक किमी तक पानी भरने से धान, गन्ना सहित अन्य फसल डूब गई हैं। किसानों ने बताया कि गन्ने को ज्यादा नुकसान नहीं होगा, लेकिन पानी ज्यादा दिन तक रुका तो धान की फसल खराब हो सकती है। नदी किनारे बने अंत्येष्टि स्थल जाने वाले रास्ते पर कई फुट पानी भर गया है।
नदी के दक्षिणी ओर ऊंचाई ज्यादा होने से फसलों को कम नुकसान हुआ है। बंडा से लेकर लखीमपुर जनपद की सीमा तक फसलें डूबने से किसान परेशाान हैं। किसानों ने नुकसान की आकलन कराने की मांग की है। संवाद

मिर्जापुर नर्सरी के पास नई बस्ती के रामलाल के घर में घुसा पानी।

मिर्जापुर नर्सरी के पास नई बस्ती के रामलाल के घर में घुसा पानी।

मिर्जापुर नर्सरी के पास नई बस्ती के रामलाल के घर में घुसा पानी।

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