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आनंद की अनुभूति कराता है गुरू का सानिध्य
शाहजहांपुर
Updated Mon, 23 Oct 2017 11:38 PM IST
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अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
शाहजहांपुर। बाबा विश्वनाथ यात्री निवास में चल रहे तीन दिवसीय आंतरिक सत्संग समारोह के दूसरे दिन गृहस्थ संत प्रभु दयाल शर्मा (टूंडला) ने देशभर से जुटे सत्संगियों को गुरु ज्ञान दिया। उन्होंने कहा कि गुरू हमारे अंदर के अज्ञान रूपी अंधकार का नाश कर ज्ञान का प्रकाश अंतर्मन में प्रकाशित करता है। उसी से हमारा उद्धार होता है। कहा, परमार्थ पथ पर आगे बढ़ने के लिए गुरू से ही गति और मति मिलती है।
रामाश्रम सत्संग मथुरा के उपकेंद्र में जुटे सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों को गुरु महिमा का महत्व समझाते हुए संत प्रभु दयाल ने कहा कि उनके गुरु डॉ. चतुर्भुज सहाय ने असंख्य लोगों को मानव जीवन का परम लक्ष्य प्राप्त कराया। गुरू स्वरूप चिन्मय होता है। परमात्मा ही उनका स्वरूप है। जिस तरह थका-हारा पथिक सघन छायादार वृक्ष के नीचे बैठकर शांति और सुकून का आनंद प्राप्त करता है, उसी तरह गुरू की शरण में जाकर मन को शांति मिलती हैं। उन्होंने कहा कि हमें परमार्थ पथ पर बढ़ने के लिए गुरू से ही गति और मति प्राप्त होती है। हम चाहें जितने दुर्लभ ज्ञान से परिपूर्ण ग्रंथों का अध्ययन कर लें, लेकिन ज्ञान तो गुरू के सानिध्य में बैठने से ही प्राप्त होता है। प्रभु दयाल ने कहा कि सच्चा गुरू मिलने मात्र से मानव का मोह और संताप दूर होने लगता है।
इससे पूर्व अहमदाबाद से आए राजेंद्र गुप्त ने कहा कि सद्गुरु हमें प्राणमय कोष से ऊपर उठाकर मनोमय कोष में पहुंचा देते हैं, जो उच्च स्थिति में चढ़ने का पहला सोपान होता है। लखनऊ के डॉ. सुभाष शर्मा ने कहा कि जब समाज में कुरीतियों द्वारा हमारा आंतरिक प्रमाद बाहर दिखने लगे, तब संसार में ईश्वर की कृपा से किसी संत का अवतरण होता है। इस अवसर पर राजदेव सिंह, केसी श्रीवास्तव, श्याम मोहन टंडन आदि ने भी गुरु महिमा का बखान किया।
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सत्संग स्थल पर लगा निशुल्क चिकित्सा शिविर
बाबा विश्वनाथ यात्री निवास में सत्संगियों के लिए निशुल्क चिकित्सा शिविर भी लगाया गया है। जिसमें डॉ. मनमोहन गुप्ता, डॉ. पूनम गुप्ता, डॉ. रजत अग्रवाल,डॉ. गौरव कौशल और डॉ. आंचल कौशल ने चिकित्सीय सेवाएं दीं।
इनके कंधाें पर रही व्यवस्था
सत्संग में भोजन, जलपान, आवास आदि व्यवस्था में परमानंद सिंह, अशोक टंडन, पूनम रस्तोगी, रेखा मिश्रा, बबली गुप्ता, सरिता अग्रवाल, धनपाल सिंह, प्रमोद अग्रवाल, हरनाम दास मेहरोत्रा, वीरेंद्र पाल सिंह, श्याम मोहन गुप्ता, प्रेम मोहन गुप्ता, शांति गुप्ता, निर्भय अग्रवाल, शिव कुमार खन्ना, निकेत कुलश्रेष्ठ, सुधा मिश्रा, माया देवी, नेहा मिश्रा, पुष्पा शर्मा, अनीता देवी आदि का योगदान रहा।
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रामाश्रम सत्संग मथुरा के उपकेंद्र में जुटे सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों को गुरु महिमा का महत्व समझाते हुए संत प्रभु दयाल ने कहा कि उनके गुरु डॉ. चतुर्भुज सहाय ने असंख्य लोगों को मानव जीवन का परम लक्ष्य प्राप्त कराया। गुरू स्वरूप चिन्मय होता है। परमात्मा ही उनका स्वरूप है। जिस तरह थका-हारा पथिक सघन छायादार वृक्ष के नीचे बैठकर शांति और सुकून का आनंद प्राप्त करता है, उसी तरह गुरू की शरण में जाकर मन को शांति मिलती हैं। उन्होंने कहा कि हमें परमार्थ पथ पर बढ़ने के लिए गुरू से ही गति और मति प्राप्त होती है। हम चाहें जितने दुर्लभ ज्ञान से परिपूर्ण ग्रंथों का अध्ययन कर लें, लेकिन ज्ञान तो गुरू के सानिध्य में बैठने से ही प्राप्त होता है। प्रभु दयाल ने कहा कि सच्चा गुरू मिलने मात्र से मानव का मोह और संताप दूर होने लगता है।
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इससे पूर्व अहमदाबाद से आए राजेंद्र गुप्त ने कहा कि सद्गुरु हमें प्राणमय कोष से ऊपर उठाकर मनोमय कोष में पहुंचा देते हैं, जो उच्च स्थिति में चढ़ने का पहला सोपान होता है। लखनऊ के डॉ. सुभाष शर्मा ने कहा कि जब समाज में कुरीतियों द्वारा हमारा आंतरिक प्रमाद बाहर दिखने लगे, तब संसार में ईश्वर की कृपा से किसी संत का अवतरण होता है। इस अवसर पर राजदेव सिंह, केसी श्रीवास्तव, श्याम मोहन टंडन आदि ने भी गुरु महिमा का बखान किया।
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सत्संग स्थल पर लगा निशुल्क चिकित्सा शिविर
बाबा विश्वनाथ यात्री निवास में सत्संगियों के लिए निशुल्क चिकित्सा शिविर भी लगाया गया है। जिसमें डॉ. मनमोहन गुप्ता, डॉ. पूनम गुप्ता, डॉ. रजत अग्रवाल,डॉ. गौरव कौशल और डॉ. आंचल कौशल ने चिकित्सीय सेवाएं दीं।
इनके कंधाें पर रही व्यवस्था
सत्संग में भोजन, जलपान, आवास आदि व्यवस्था में परमानंद सिंह, अशोक टंडन, पूनम रस्तोगी, रेखा मिश्रा, बबली गुप्ता, सरिता अग्रवाल, धनपाल सिंह, प्रमोद अग्रवाल, हरनाम दास मेहरोत्रा, वीरेंद्र पाल सिंह, श्याम मोहन गुप्ता, प्रेम मोहन गुप्ता, शांति गुप्ता, निर्भय अग्रवाल, शिव कुमार खन्ना, निकेत कुलश्रेष्ठ, सुधा मिश्रा, माया देवी, नेहा मिश्रा, पुष्पा शर्मा, अनीता देवी आदि का योगदान रहा।