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दस दिन में 6.09 करोड़ खर्च करने में जुटे अफसर
शाहजहांपुर
Updated Fri, 20 Mar 2015 12:11 AM IST
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वित्त वर्ष 2014-15 के लिए बनाई गई 1.72 अरब रुपये की जिला योजना में अनुमोदित बजट के सापेक्ष कई विभाग काम कराने में पिछड़ गए। अब वे विभाग वर्ष की अंतिम मार्च माह के बाकी बचे दस कार्य दिवसों में 6.09 करोड़ रुपये खर्च करने को लेकर कई महकमों में आपाधापी का माहौल है। बजट की धनराशि को ठिकाने लगाने की इसी मुहिम के चलते कई विभागों ने साल भर के काम एक माह में करा डाले हैं।
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शासन से मिले सिर्फ 50.61 करोड़ रुपये
जिला योजना में शासन से विभिन्न विभागों को 50.61 करोड़ रुपये मिले। यह रकम अनुमोदित बजट की तुलना में केवल 29.42 फीसदी है। इस धनराशि में अभी तक 44.52 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। संबंधित विभाग अवमुक्त धनराशि के सापेक्ष 87.97 फीसदी खर्च को ही उपलब्धि मानकर अपनी पीठ ठोंक रहे हैं। विकास विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक धनराशि ज्यादा मिली होती तो संबंधित कर्मचारियों की लापरवाही छिपाए नहीं छिपती।
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एक माह में निपट गए तीन करोड़ के काम
बीते माह जिला योजना की शासन को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार पंचायती राज, पशुपालन, खादी ग्रामोद्योग, पर्यावरण, प्रादेशिक विकास दल आदि कई विभागों का दिसंबर तक व्यय विवरण शून्य दर्शाया गया। मगर फरवरी पूरी होने तक इन सभी महकमों के कामों का ग्राफ एकाएक बढ़ गया। बहुउद्देश्यीय पंचायत भवन, सीसी रोड, केसी ड्रेन आदि कामों पर सबसे ज्यादा 3.22 करोड़ रुपये पंचायत राज विभाग ने खर्च किए। जबकि दिसंबर तक प्राप्त 1.55 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए थे। खादी ग्रामोद्योग और पर्यावरण जैसे काम भी एक माह में निपटा दिए गए।
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इन विभागों को नहीं मिली बजट धनराशि
शासन से उद्यान विभाग, राजकीय लघु सिंचाई, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, खेलकूद, होम्योपैथिक चिकित्सा, आयुर्वेदिक चिकित्सा, ग्रामीण पेयजल, अनुसूचित जाति कल्याण, पिछड़ी जाति कल्याण, समाज कल्याण सामान्य जाति से जुड़ी योजनाओं के लिए करीब 10.49 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, लेकिन मिला कुछ नहीं।
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इन सभी कामों में पड़ गई रुकावट
बजट की धनराशि नहीं मिलने के कारण उद्यान विभाग की राज्य औद्यानिक मिशन योजना, पपीता खेती का प्रसार, ईको फ्रैंडली पार्क, स्कूलों में प्रेक्टिकल लैब, नए होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी अस्पतालों की स्थापना, मछली पालन के तालाबों में सुधार, नलकूप विभाग की गूलों और पाइप लाइनों की मरम्मत, गांवों में इंडिया मार्क हैंड पंप आदि कामों में रुकावट पड़ी।
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शासन से मिले सिर्फ 50.61 करोड़ रुपये
जिला योजना में शासन से विभिन्न विभागों को 50.61 करोड़ रुपये मिले। यह रकम अनुमोदित बजट की तुलना में केवल 29.42 फीसदी है। इस धनराशि में अभी तक 44.52 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। संबंधित विभाग अवमुक्त धनराशि के सापेक्ष 87.97 फीसदी खर्च को ही उपलब्धि मानकर अपनी पीठ ठोंक रहे हैं। विकास विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक धनराशि ज्यादा मिली होती तो संबंधित कर्मचारियों की लापरवाही छिपाए नहीं छिपती।
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एक माह में निपट गए तीन करोड़ के काम
बीते माह जिला योजना की शासन को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार पंचायती राज, पशुपालन, खादी ग्रामोद्योग, पर्यावरण, प्रादेशिक विकास दल आदि कई विभागों का दिसंबर तक व्यय विवरण शून्य दर्शाया गया। मगर फरवरी पूरी होने तक इन सभी महकमों के कामों का ग्राफ एकाएक बढ़ गया। बहुउद्देश्यीय पंचायत भवन, सीसी रोड, केसी ड्रेन आदि कामों पर सबसे ज्यादा 3.22 करोड़ रुपये पंचायत राज विभाग ने खर्च किए। जबकि दिसंबर तक प्राप्त 1.55 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए थे। खादी ग्रामोद्योग और पर्यावरण जैसे काम भी एक माह में निपटा दिए गए।
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इन विभागों को नहीं मिली बजट धनराशि
शासन से उद्यान विभाग, राजकीय लघु सिंचाई, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, खेलकूद, होम्योपैथिक चिकित्सा, आयुर्वेदिक चिकित्सा, ग्रामीण पेयजल, अनुसूचित जाति कल्याण, पिछड़ी जाति कल्याण, समाज कल्याण सामान्य जाति से जुड़ी योजनाओं के लिए करीब 10.49 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, लेकिन मिला कुछ नहीं।
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इन सभी कामों में पड़ गई रुकावट
बजट की धनराशि नहीं मिलने के कारण उद्यान विभाग की राज्य औद्यानिक मिशन योजना, पपीता खेती का प्रसार, ईको फ्रैंडली पार्क, स्कूलों में प्रेक्टिकल लैब, नए होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी अस्पतालों की स्थापना, मछली पालन के तालाबों में सुधार, नलकूप विभाग की गूलों और पाइप लाइनों की मरम्मत, गांवों में इंडिया मार्क हैंड पंप आदि कामों में रुकावट पड़ी।