फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   खेतों में गन्ने के साथ सूख रहे किसान के अरमान

खेतों में गन्ने के साथ सूख रहे किसान के अरमान

Wed, 28 Mar 2018 09:19 PM IST
Updated Wed, 28 Mar 2018 09:19 PM IST
विज्ञापन
खेतों में गन्ने के साथ सूख रहे किसान के अरमान
खेतों में गन्ने के साथ सूख रहे किसानों के अरमान
विज्ञापन

सरकारी आंकड़े कह रहे कि अभी 35 लाख क्विंटल गन्ना खेतों में है खड़ा
वास्तविकता इससे कहीं ज्यादा, पर्चियों और भुगतान का टोटा
फोटो-21
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां (शाहजहांपुर)।
गर्मी बढ़ने के साथ ही खेतों में खड़ा गन्ना भी सूखने लगा है। गन्ने के साथ ही किसान के अरमान भी सूखने लगे हैं। जिस गन्ने को बोते समय किसान ने बिटिया के हाथ पीले करने, बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने में धन खर्च करने, घर बनवाने, साहूकार का कर्ज उतारने के सपने देखे थे, वह अब मिट्टी में मिलते जा रहे हैं।
सरकारी आंकड़े कह रहे हैं कि पुवायां समिति क्षेत्र में लगभग 35 लाख क्विंटल गन्ना खेतों में खड़ा है, लेकिन वास्तविकता इससे काफी अलग है। एक अनुमान के अनुसार पुवायां समिति क्षेत्र में लगभग 50 लाख क्विंटल गन्ना अभी खेतों में खड़ा है। आंकड़ों में अंतर इस कारण है कि तमाम किसानों के सट्टे ही नहीं बने हैं, जिस कारण उनके गन्ने का लेखा जोखा समिति के पास नहीं है। कई ऐसे किसान भी हैं, जिनका सट्टा तो है, लेकिन धांधली के चलते खेत में गन्ना खड़ा होने के बाद भी उनके सट्टे में गन्ने की एंट्री की ही नहीं गई है। किसानों को पर्चियों का बड़ा संकट है। पर्ची नहीं मिल रही है, जिस कारण गन्ना नहीं बेचा जा सका है।
विज्ञापन

अब बात गन्ना भुगतान की करते हैं। सरकार ने चीनी मिल मालिकों को निर्देश दिए थे कि गन्ना खरीदे जाने के 14 दिन के अंदर किसान के खाते में गन्ना भुगतान पहुंच जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। बजाज चीनी मिल इस मामले में फिसड्डी साबित हो रही है। अभी तक मिल की ओर से 26 दिसंबर तक ही खरीदे गए गन्ने ही भुगतान किया जा सका है। मतलब यह है कि मिल पर 14 दिन के स्थान पर 93 दिन का गन्ना मूल्य बकाया चल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

00
नहीं मिल रहे श्रमिक, कैसे हो छिलाई
पुवायां। गर्मी बढ़ने के साथ ही श्रमिकों ने गन्ने की छिलाई से इंकार करना शुरू कर दिया है। श्रमिकों का कहना है कि गर्मी में छिलाई करना बेहद कठिन काम है। किसान गन्ने का खेत खाली कर गेहूं बोना चाहता था, लेकिन पर्ची नहीं मिल सकीं तो गेहूं बोने से रह गया। इसके बाद अब भी खेत खाली नहीं हो पाने के कारण साठा धान भी नहीं लग पा रहा है।
00
क्रेशर और कोल्हू स्वामी उठा रहे मौके का फायदा
पुवायां। पर्चियां कम जारी होने पर गन्ना खेत में खड़ा रहा गया। गर्मी बढ़ते ही किसान गन्ने को किसी भी प्रकार बेचने के प्रयास में जुट गया तो क्रेशर और कोल्हू स्वामियों ने मौके का लाभ उठाते हुए गन्ने का रेट 170-180 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। क्रेशर पर रेट और भी कम हो जाने की आशंका है। जबकि सरकारी रेट 325 रुपये प्रति क्विंटल का है। क्रेशर और कोल्हू पर गन्ना लेकर जा रहे किसान को दोतरफा घाटा हो रहा है। एक तो गन्ने का वजन कम हो गया और दूसरे रेट बेहद कम मिल रहे हैं, जबकि गन्ने की फसल तैयार होने के समय क्रेशर और कोल्हू पर गन्ना 250 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था।
00
सहकारी चीनी मिल ने किया दो मार्च तक का भुगतान
पुवायां। किसान सहकारी चीनी मिल पुवायां ने दो मार्च तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान कर दिया है। इस प्रकार भुगतान के मामले में यह चीनी मिल अन्य से काफी आगे चल रही है। मिल के प्रधान प्रबंधक कमल रस्तोगी ने बताया कि अब तक 25.15 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की जा चुकी है और कैंलेंडर के हिसाब से मिल क्षेत्र में सात लाख क्विंटल गन्ना शेष है। गत वर्ष मिले ने 23.50 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी। जीएम ने बताया कि क्षेत्र में खड़े गन्ने को पेरा जाएगा। चीनी परता में मिल का प्रदेश में तीसरा और बरेली मंडल में पहला स्थान है।
00
गन्ने के रि-सर्वे का काम जोरों पर चल रहा है। चार से पांच दिन में रि-सर्वे का कार्य पूरा हो जाएगा। अभी मकसूदापुर मिल के क्षेत्र में लगभग 25 लाख और पुवायां चीनी मिल क्षेत्र में 10 लाख क्विंटल गन्ना खड़ा है। रि- सर्वे के बाद नया कैलेंडर जारी किया जाएगा और सभी किसानों की पर्चियां जारी होंगी। शत प्रतिशत गन्ने की पेराई की जाएगी।
मनीष कुमार, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक, पुवायां
00
अब तक 80.61 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की जा चुकी है। 26 दिसंबर तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान कर दिया गया है। मिल 15 मई तक चलने की संभावना है।
धर्मेश मल्होत्रा, सीनियर केन मैनेजर, बजाज चीनी मिल मकसूदापुर
00
फोटो-22,(सतनाम सिंह)
00
किसानों को गन्ने के हिसाब से जल्द से जल्द पर्चियां दी जानी चाहिए और गन्ने का भुगतान भी समय से होना चाहिए। ऐसा हो नहीं रहा है, इस कारण किसान गन्ने का क्षेत्रफल कम करने पर विवश है। इस बार गन्ने में भारी घाटा हुआ है।

सतनाम सिंह, गांव कुइयां महोलिया, बंडा
00
फोटो-23 (पवन सिंह)
00
सरकार को गन्ना किसानों का कर्ज माफ करना चाहिए और बैंक से लिए कर्ज पर ब्याज में छूट देनी चाहिए। चीनी मिलों पर जो बकाया है उस पर ब्याज सहित भुगतान किया जाना चाहिए। मिलें किसान के रुपये से दूसरे उद्योग लगा रही हैं।
पवन सिंह, निवासी बंडा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed