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गोद लेकर मिटाएंगे कुपोषण का दाग
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अतिकुपोषित को गोद लेकर अधिकारी मिटाएंगे ‘कुपोषण’ का दाग
संतकबीरनगर। पिछले दिनों धनघटा क्षेत्र के दुघरा कलां में कुपोषण से दो भाइयों की हुई मौत और तीसरे के जिंदगी और मौत से संघर्ष करने की घटना सामने आने पर प्रशासन सकते में है। जिले में अधिकारी कुपोषण से जंग तो लड़ रहे हैं। लेकिन इधर प्रभारी मंत्री के जरिए अतिकुपोषित एक बच्चे को खुद और अफसरों को एक-एक बच्चों को गोद लेने के दिए गए सुझाव पर भी प्रशासन गंभीर है। वैसे जिले में 20599 बच्चे कुपोषित चिन्हित किए गए है।
दरअसल, सितंबर में जिले में 157844 बच्चों की जांच की गई गई थी, जिसमें 137245 बच्चे सामान्य पाए गए थे। जबकि 20599 बच्चे कुपोषित मिले थे। इसमें से 3868 बच्चे अतिकुपोषित मिले हैं। सर्वाधिक अतिकुपोषित 916 बच्चे सांथा ब्लॉक में पाए गए। जबकि दूसरे नंबर पर बेलहर कला में 483, तीसरे नंबर पर नाथनगर 429 और चौथे नंबर पर खलीलाबाद 368 बच्चे पहचान किए गए हैं।
34 अधिकारियों ने गांवों को लिया है गोद
जिले में 34 अधिकारियों ने दो-दो अतिकुपोषित वाले गांवों को गोद लिया है। 68 गांवों में से 35 गांवों को कुपोषण मुक्त घोषित कर दिया गया है। जबकि 33 गांवों में अब भी उसकी जद में है। इधर, हाल में ही प्रभारी मंत्री रवींद्र जायसवाल जिले में आए थे। बैठक के दौरान खुद एक अतिकुपोषित बच्चे को गोद लेने की इच्छा जाहिर की थी। साथ ही डीएम समेत अन्य जिलास्तरीय अधिकारियों को सुझाव दिया था कि एक-एक अतिकुपोषित बच्चे को गोद लें। ताकि कुपोषण को मिटाया जा सके।
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डीपीओ विजय श्री ने बताया कि कुपोषण को रोकने के लिए शासन गंभीर है। इस दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एके शर्मा का कहना है कि कुपोषण बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इनके मानसिक और शारीरिक विकास पर बुरा प्रभाव डालता है। बच्चो का दिमाग 80 फीसदी तक पहले तीन साल में ही विकसित हो जाता है। यदि बच्चा कुपोषित होगा तो उसकी बौद्घिक क्षमता कम होगी। बौनापन और कमजोर होने की प्रबल आशंका रहती है।
वर्जन
डीपीओ से अतिकुपोषित बच्चों की सूची मांगी गई है। सभी सुपरवाइजर को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। साथ ही निर्देश दिए गए है कि समय- समय पर आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों का वजन कराकर ऐसे बच्चों को चिहिन्त किया जाए। शासन की ओर से मिलने वाली सुविधाओं से कुपोषित बच्चों को लाभ पहुंचाएं।
- बब्बन उपाध्याय, सीडीओ
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संतकबीरनगर। पिछले दिनों धनघटा क्षेत्र के दुघरा कलां में कुपोषण से दो भाइयों की हुई मौत और तीसरे के जिंदगी और मौत से संघर्ष करने की घटना सामने आने पर प्रशासन सकते में है। जिले में अधिकारी कुपोषण से जंग तो लड़ रहे हैं। लेकिन इधर प्रभारी मंत्री के जरिए अतिकुपोषित एक बच्चे को खुद और अफसरों को एक-एक बच्चों को गोद लेने के दिए गए सुझाव पर भी प्रशासन गंभीर है। वैसे जिले में 20599 बच्चे कुपोषित चिन्हित किए गए है।
दरअसल, सितंबर में जिले में 157844 बच्चों की जांच की गई गई थी, जिसमें 137245 बच्चे सामान्य पाए गए थे। जबकि 20599 बच्चे कुपोषित मिले थे। इसमें से 3868 बच्चे अतिकुपोषित मिले हैं। सर्वाधिक अतिकुपोषित 916 बच्चे सांथा ब्लॉक में पाए गए। जबकि दूसरे नंबर पर बेलहर कला में 483, तीसरे नंबर पर नाथनगर 429 और चौथे नंबर पर खलीलाबाद 368 बच्चे पहचान किए गए हैं।
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34 अधिकारियों ने गांवों को लिया है गोद
जिले में 34 अधिकारियों ने दो-दो अतिकुपोषित वाले गांवों को गोद लिया है। 68 गांवों में से 35 गांवों को कुपोषण मुक्त घोषित कर दिया गया है। जबकि 33 गांवों में अब भी उसकी जद में है। इधर, हाल में ही प्रभारी मंत्री रवींद्र जायसवाल जिले में आए थे। बैठक के दौरान खुद एक अतिकुपोषित बच्चे को गोद लेने की इच्छा जाहिर की थी। साथ ही डीएम समेत अन्य जिलास्तरीय अधिकारियों को सुझाव दिया था कि एक-एक अतिकुपोषित बच्चे को गोद लें। ताकि कुपोषण को मिटाया जा सके।
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डीपीओ विजय श्री ने बताया कि कुपोषण को रोकने के लिए शासन गंभीर है। इस दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एके शर्मा का कहना है कि कुपोषण बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इनके मानसिक और शारीरिक विकास पर बुरा प्रभाव डालता है। बच्चो का दिमाग 80 फीसदी तक पहले तीन साल में ही विकसित हो जाता है। यदि बच्चा कुपोषित होगा तो उसकी बौद्घिक क्षमता कम होगी। बौनापन और कमजोर होने की प्रबल आशंका रहती है।
वर्जन
डीपीओ से अतिकुपोषित बच्चों की सूची मांगी गई है। सभी सुपरवाइजर को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। साथ ही निर्देश दिए गए है कि समय- समय पर आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों का वजन कराकर ऐसे बच्चों को चिहिन्त किया जाए। शासन की ओर से मिलने वाली सुविधाओं से कुपोषित बच्चों को लाभ पहुंचाएं।
- बब्बन उपाध्याय, सीडीओ