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राष्ट्रीय लोक अदालत में 7180 मामले निपटे
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Feb 2018 11:43 PM IST
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राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंकों के स्टाल पर अपने मामले का निपटारा कराते लोग।
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संतकबीरनगर। दीवानी न्यायालय परिसर में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत में विभिन्न विभागों के 8572 मामलों में से 7180 मामलों का निस्तारण कर दिया गया। इस दौरान जुर्माना व सेटलमेंट के रूप में दो करोड़ 78 लाख 71 हजार 223 रुपये वसूल किए गए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत का उद्घाटन जिला जज उमेश चंद शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों का निपटारा होना चाहिए। इसमें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व आम जनता का सहयोग जरूरी है। विभागों को चाहिए कि वे अपने वहां पर मामलों को लंबित न रखें। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव शैलेंद्र यादव ने बताया कि कुल 8572 मामलों में से 7180 का निस्तारण हुआ।
बैंकों से संबंधित 541 मामलों में 240 का निस्तारण कर 1,99,54,441 रुपये का सेटलमेंट किया गया। जिला जज के न्यायालय में 17 वाद में 10 का निस्तारण किया गया। जिसमे छह मामले मोटर दुर्घटना प्रतिकर से संबंधित था। 262500 रुपये प्रतिकर देने का आदेश दिया गया। एफटीसी प्रथम की अदालत में 73 में 39 मामले का निस्तारण हुआ। प्रतिकर के रूप में दो हजार रुपये अर्थदंड तथा मोटर दुर्घटना के मामले में एक लाख 30 हजार क्षतिपूर्ति का आदेश हुआ।
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परिवार न्यायालय में 29 में से 19 मामले का निस्तारण हुआ व तीन जोड़ों की विदाई हुई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में 1025 में से 313 मामले निस्तारित हुए। 57575 रुपये जुर्माना वसूला गया। सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में 257 में 100 मामले निस्तारित हुए। 4590 रुपये जुर्माना व 43,50, 938 रुपये का उत्तराधिकार का प्रमाण पत्र दिया गया।
सिविल जज जूनियर डिविजन की अदालत में 271 में 193 मामले आए। इनमें 31,550 रुपये जुर्माना वसूला गया। इस अवसर पर एफटीसी प्रथम प्रफुल्ल कमल, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय में विनोद बर्नवाल, सीजेएम दीपकांत मणि, सिविल जज सीनियर डिविजन संजय कुमार गोंड, सिविल जज जूनियर डिविजन रणविजय सिंह, बृजेश कुमार, जय प्रकाश यादव, दीपक, नागेंद्र, देवकी नंदन, शमीम आदि मौजूद रहे।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत का उद्घाटन जिला जज उमेश चंद शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों का निपटारा होना चाहिए। इसमें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व आम जनता का सहयोग जरूरी है। विभागों को चाहिए कि वे अपने वहां पर मामलों को लंबित न रखें। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव शैलेंद्र यादव ने बताया कि कुल 8572 मामलों में से 7180 का निस्तारण हुआ।
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बैंकों से संबंधित 541 मामलों में 240 का निस्तारण कर 1,99,54,441 रुपये का सेटलमेंट किया गया। जिला जज के न्यायालय में 17 वाद में 10 का निस्तारण किया गया। जिसमे छह मामले मोटर दुर्घटना प्रतिकर से संबंधित था। 262500 रुपये प्रतिकर देने का आदेश दिया गया। एफटीसी प्रथम की अदालत में 73 में 39 मामले का निस्तारण हुआ। प्रतिकर के रूप में दो हजार रुपये अर्थदंड तथा मोटर दुर्घटना के मामले में एक लाख 30 हजार क्षतिपूर्ति का आदेश हुआ।
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परिवार न्यायालय में 29 में से 19 मामले का निस्तारण हुआ व तीन जोड़ों की विदाई हुई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में 1025 में से 313 मामले निस्तारित हुए। 57575 रुपये जुर्माना वसूला गया। सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में 257 में 100 मामले निस्तारित हुए। 4590 रुपये जुर्माना व 43,50, 938 रुपये का उत्तराधिकार का प्रमाण पत्र दिया गया।
सिविल जज जूनियर डिविजन की अदालत में 271 में 193 मामले आए। इनमें 31,550 रुपये जुर्माना वसूला गया। इस अवसर पर एफटीसी प्रथम प्रफुल्ल कमल, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय में विनोद बर्नवाल, सीजेएम दीपकांत मणि, सिविल जज सीनियर डिविजन संजय कुमार गोंड, सिविल जज जूनियर डिविजन रणविजय सिंह, बृजेश कुमार, जय प्रकाश यादव, दीपक, नागेंद्र, देवकी नंदन, शमीम आदि मौजूद रहे।