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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   This village is deprived of facilities like no electricity, no water, no education.

ग्राउंड रिपोर्ट: सीएम साहब! बिजली-पानी, शिक्षा के लिए तरस रहा ये गांव, ब्रिटिश काल में बसा था कालूवाला टोंगियो

Wed, 20 Sep 2023 07:40 PM IST
मेरठ ब्यूरो मुकेश गुप्ता, अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर
मुकेश गुप्ता, अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Wed, 20 Sep 2023 07:40 PM IST
सार

Saharanpur News : सहारनपुर में एक ऐसा गांव है, जहां के लोग बिजली-पानी और शिक्षा के लिए तरस रहे हैं। बताया गया कि गांव कालूवाला टोंगियो ब्रिटिश शासनकाल में बसाया गया था। इस गांव के लोग बार-बार सरकार से इन सुविधाओं की मांग करते हैं।

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This village is deprived of facilities like no electricity, no water, no education.
कुएं से पानी लाती गांव की महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सहारनपुर में तहसील मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1933 में शिवालिक तलहटी के जंगल में बसाए गांव कालूवाला टोंगियो के ग्रामीण आजादी के 76 वर्ष बाद भी बिजली, पानी, शिक्षा और चिकित्सा की मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। स्कूल में पढ़ाई करने के लिए बच्चों को छह किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

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वर्ष 2005 में वनाधिकार कानून बनने के बाद वर्ष 2018 से इस टोंगिया गांव में कालूवाला पहाड़ीपुर उर्फ जहानपुर ग्राम पंचायत के तहत विकास कार्य शुरु होने तो हुए, लेकिन वे अभी भी अपर्याप्त हैं। गांव में अभी मात्र 19 परिवारों के ही पक्के मकान और 25 परिवारों को टीन शेड मिल सके हैं, जबकि 30 परिवार अभी भी छप्पर में गुजर बसर कर रहे हैं।

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This village is deprived of facilities like no electricity, no water, no education.
गांव का हाल। - फोटो : अमर उजाला

बताया गया कि गांव में सौर ऊर्जा की प्लेट लगाकर बिजली आपूर्ति की व्यवस्था की गई थी, लेकिन एक बार बैटरियां खराब होने के बाद किसी ने इन्हें नहीं बदलवाया। पीने के पानी के लिए ग्रामीण वर्ष 1985 में बने शिवालिक जल श्रोत के कुएं पर निर्भर है। अपनी और मवेशियों की प्यास इसी से पानी लाकर बुझाते हैं। बरसात में इसकी भी पाइप लाइन बहने पर जलापूर्ति ठप हो जाती है। भीषण गर्मी में जल स्रोत का पानी सूखने के बाद दूर-दराज से खोल (नदी) का गंदा पानी लाकर दैनिक कार्यों की पूर्ति की जाती है।

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This village is deprived of facilities like no electricity, no water, no education.
कुएं से पानी लाती गांव की महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला

राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने पर कराए जा रहे विकास कार्य
ग्राम प्रधान रानी देवी ने बताया कि शिवालिक जंगल में जब इस गांव को बसाया गया था, तब वन विभाग ने प्रति परिवार छह बीघा जमीन आवंटित की थी। इसमें ही आवास की जमीन भी थी। अनुसूचित बाहुल्य इस गांव को जंगलों को विकसित करने के लिए गांव अब्दुल्लापुर से लाकर बसाया गया था। अब 600 की आबादी वाले इस गांव में 50 परिवार निवास करते हैं। यहां बसे ग्रामीणों की आय का स्रोत वन विभाग के पौधरोपण अभियान में मजदूरी, पहाड़ियों पर उगने वाली भाभड़ घास काट कर बान बनाने व जंगल से जलावनी लकड़ी बीनकर बेचना है। पहले वन विभाग की जमीन होने की वजह से यहां विकास कार्य संभव नहीं थे लेकिन, अब राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने पर विकास कार्य कराए जा रहे हैं।

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This village is deprived of facilities like no electricity, no water, no education.
छप्पर में रहता है परिवार। - फोटो : अमर उजाला

- 70 वर्षीय फूल देवी का कहना है पहले बैलगाड़ी में पीने का पानी कई किमी से लाते थे। पूरा जीवन फूंस की झोपड़ी में बीत गया। गरीब की कोई सुनने वाला नहीं है।

This village is deprived of facilities like no electricity, no water, no education.
इसी कुएं से पानी लाते हैं ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला

- 93 वर्षीय प्रकाश चंद का कहना है कि पूरी जिंदगी सुविधाओं के अभाव में बिता दी। यहां से पहले सहंश्रा खोल में रहे। उसके बाद यहां आए और अपने पूर्वजों के साथ पौधारोपण किया। अब कुछ उम्मीद जगी है।

- 80 वर्षीय प्रकाशी का कहना है कि उनके गांव के बच्चों को कम से कम अब सिर छुपाने के लिए पक्की छत तो मिली जो शेष रह गए हैं उनको भी जल्द मकान मिलने की उम्मीद जगी है।

- गांव के 78 साल के मुल्तान सिंह का कहना है कि उन्होंने आज तक जलता हुआ बल्ब नहीं देखा। रात में जंगल के सन्नाटे के बीच लकड़ियों को जलाकर उनकी रोशनी में खाना बनाते हुए 50 साल बीत गए।

- वनाधिकार कानून समिति के ग्राम अध्यक्ष शेर सिंह कहते हैं कि सुविधाओं की आस में उनकी उम्र बीत गई है। राजस्व गांव का दर्जा मिलने के बाद भी कोई खास विकास नहीं हो पाया है।

- महिला कला देवी ने बताया कि अधिकार पत्र मिलने के बाद उन्हें 625 वर्ग मीटर जगह प्रति परिवार आवंटित की गई है। वह भी समाज की मुख्यधारा से जुड़ेंगे खुशी हुई थी परंतु छह वर्ष से ज्यादा बीतने के बाद निराशा ही हाथ लगी है।

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- केंद्र सरकार के हर घर जल योजना के तहत पूरे गांव में पेयजल आपूर्ति कराई जाएगी। जंगल की भूमि होने की वजह से विकास नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी गांव के विद्युतीकरण के लिए वार्ता हुई थी। जल्द ही सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी। नरेश सैनी, पूर्व विधायक

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