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VIBE Movie Review: पहले हाफ में जमती है कॉमेडी, लेकिन दूसरे हाफ में फीकी है कुणाल खेमू की 'वाइब'
सार
Vibe Movie Review In Hindi: प्रीति जिंटा और कुणाल खेमू स्टारर कॉमेडी फिल्म ‘वाइब’ रिलीज हो चुकी है। कैसी है इसकी कहानी? आइए फटाफट जान लेते हैं।
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वाइब मूवी रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला
Movie Review
वाइब
कलाकार
कुणाल खेमू
,
प्रीति जिंटा
,
स्पर्श श्रीवास्तव
,
यशपाल शर्मा
और
दिनेश लाल यादव
लेखक
कुणाल खेमू
निर्देशक
कुणाल खेमू
निर्माता
कुणाल खेमू
और
चिराग निहलानी
रिलीज डेट
18 सितंबर 2026
रेटिंग
3/5
विस्तार
कुणाल खेमू की फिल्म ‘वाइब’ का ट्रेलर देखकर पहली नजर में लगता है कि ऐसी कहानी पहले भी देखी जा चुकी है। दो आम लड़के, जिन्हें एक सरकारी एजेंसी एक खतरनाक मिशन के लिए चुनती है। कहानी का यह आधार हॉलीवुड फिल्म ‘द इंटरव्यू’ की याद दिलाता है। हालांकि ‘वाइब’ जल्द ही अपनी अलग कॉमेडी और किरदारों के जरिए अपनी पहचान बनाने की कोशिश करती है।
कुणाल खेमू ने फिल्म लिखने के साथ इसका निर्देशन भी किया है। ‘मडगांव एक्सप्रेस’ के बाद बतौर निर्देशक उनकी कॉमेडी पर पकड़ एक बार फिर दिखाई देती है। फिल्म की शुरुआत से ही यह साफ हो जाता है कि इसे बहुत गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए।
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कुणाल खेमू ने फिल्म लिखने के साथ इसका निर्देशन भी किया है। ‘मडगांव एक्सप्रेस’ के बाद बतौर निर्देशक उनकी कॉमेडी पर पकड़ एक बार फिर दिखाई देती है। फिल्म की शुरुआत से ही यह साफ हो जाता है कि इसे बहुत गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए।
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वाइब एक्स रिव्यू
- फोटो : सोशल मीडिया
क्या है कहानी?
कहानी हार्दिक (कुणाल खेमू) की है, जो ड्रग रिहैब से बाहर आया है और अपनी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। उसका दोस्त बग्स (स्पर्श श्रीवास्तव) उसे अपनी टेक कंपनी में काम करने के लिए बुलाता है। कंपनी में हार्दिक की नजर इंटर्न करीना (वंशिका धीर) पर पड़ती है और वह उसे पसंद करने लगता है।
बग्स उसे करीना से दूर रहने की सलाह देता है, लेकिन हार्दिक उसकी बात नहीं मानता और करीना को डेट पर पूछ लेता है। इसके बाद हालात तेजी से बदलते हैं।
कहानी में मैडम एच (प्रीति जिंटा गुडइनफ) की एंट्री होती है, जो एक सरकारी एजेंसी के लिए काम करती हैं। उनकी टीम एक खतरनाक गैंगस्टर को पकड़ने की कोशिश कर रही है। देखते ही देखते हार्दिक और बग्स भी इस मिशन का हिस्सा बन जाते हैं। यहीं से दो सीधे-सादे लड़कों की जिंदगी एक अजीबोगरीब जासूसी मिशन में बदल जाती है।
कहानी हार्दिक (कुणाल खेमू) की है, जो ड्रग रिहैब से बाहर आया है और अपनी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। उसका दोस्त बग्स (स्पर्श श्रीवास्तव) उसे अपनी टेक कंपनी में काम करने के लिए बुलाता है। कंपनी में हार्दिक की नजर इंटर्न करीना (वंशिका धीर) पर पड़ती है और वह उसे पसंद करने लगता है।
बग्स उसे करीना से दूर रहने की सलाह देता है, लेकिन हार्दिक उसकी बात नहीं मानता और करीना को डेट पर पूछ लेता है। इसके बाद हालात तेजी से बदलते हैं।
कहानी में मैडम एच (प्रीति जिंटा गुडइनफ) की एंट्री होती है, जो एक सरकारी एजेंसी के लिए काम करती हैं। उनकी टीम एक खतरनाक गैंगस्टर को पकड़ने की कोशिश कर रही है। देखते ही देखते हार्दिक और बग्स भी इस मिशन का हिस्सा बन जाते हैं। यहीं से दो सीधे-सादे लड़कों की जिंदगी एक अजीबोगरीब जासूसी मिशन में बदल जाती है।
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'वाइब' मूवी रिव्यू
- फोटो : इंस्टाग्राम- @kunalkemmu
कैसा है अभिनय?
- कुणाल खेमू: कुणाल खेमू बतौर अभिनेता पूरी फिल्म को संभालकर रखते हैं। वह सहज तरीके से कॉमेडी करते हैं और फिल्म के कमजोर हिस्सों में भी दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखने की कोशिश करते हैं।
- स्पर्श श्रीवास्तव: स्पर्श श्रीवास्तव ने बग्स के किरदार में अच्छा काम किया है। उनकी कॉमिक टाइमिंग कुणाल की शैली के साथ अच्छी तरह मेल खाती है। दोनों की जोड़ी फिल्म के सबसे मनोरंजक हिस्सों में से एक है।
- प्रीति जिंटा: प्रीति जिंटा का प्रदर्शन हालांकि कुछ अलग महसूस होता है। उनकी संवाद अदायगी कई जगह काफी टिपिकल लगती है। इसके चलते कुछ सीन उतने स्वाभाविक नहीं लगते जितने होने चाहिए थे।
- बाकी स्टारकास्ट: यशपाल शर्मा और दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ भी मैडम एच की टीम के अधिकारियों के किरदार में अपनी भूमिका ठीक-ठाक निभा जाते हैं। वंशिका धीर करीना के किरदार में स्क्रीन पर अच्छी लगती हैं और उनका डेब्यू ठीक-ठाक है।
'वाइब' मूवी रिव्यू
- फोटो : इंस्टाग्राम@kunalkemmu
कैसा है निर्देशन?
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका पहला हाफ है। यह शुरुआत से ही अपने हल्के-फुल्के और बिंदास अंदाज को बनाए रखती है। कुणाल अपने वॉइसओवर से ही बता देते हैं कि इसे गंभीरता से नहीं लेना है। पहले हाफ में डायलॉग और वन-लाइनर्स लगातार हंसाते हैं। कुणाल खेमू ने खुद इसके संवाद लिखे हैं और उनकी कॉमिक टाइमिंग कई जगह बेहतरीन है।
लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म की यही सहजता कमजोर पड़ने लगती है। दूसरे हाफ में ‘वाइब’ अचानक मिस हो जाती है। कॉमेडी कम होने लगती है और कहानी को आगे बढ़ाने के चक्कर में इसमें जरूरत से ज्यादा ट्विस्ट और परतें जोड़ दी जाती हैं। जो कहानी पहले दो साधारण लड़कों और उनके अजीब हालात पर केंद्रित थी, वह धीरे-धीरे एक उलझे हुए स्पाई गेम में बदल जाती है।
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका पहला हाफ है। यह शुरुआत से ही अपने हल्के-फुल्के और बिंदास अंदाज को बनाए रखती है। कुणाल अपने वॉइसओवर से ही बता देते हैं कि इसे गंभीरता से नहीं लेना है। पहले हाफ में डायलॉग और वन-लाइनर्स लगातार हंसाते हैं। कुणाल खेमू ने खुद इसके संवाद लिखे हैं और उनकी कॉमिक टाइमिंग कई जगह बेहतरीन है।
लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म की यही सहजता कमजोर पड़ने लगती है। दूसरे हाफ में ‘वाइब’ अचानक मिस हो जाती है। कॉमेडी कम होने लगती है और कहानी को आगे बढ़ाने के चक्कर में इसमें जरूरत से ज्यादा ट्विस्ट और परतें जोड़ दी जाती हैं। जो कहानी पहले दो साधारण लड़कों और उनके अजीब हालात पर केंद्रित थी, वह धीरे-धीरे एक उलझे हुए स्पाई गेम में बदल जाती है।
'वाइब' मूवी रिव्यू
- फोटो : इंस्टाग्राम@kunalkemmu
देखें या नहीं?
टाइमपास के लिए देख सकते हैं। कुणाल खेमू के निर्देशन या अभिनय के फैन हैं तो देख सकते हैं। बस ‘मडगांव एक्सप्रेस’ जैसी उम्मीदें लेकर ना देखें।
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टाइमपास के लिए देख सकते हैं। कुणाल खेमू के निर्देशन या अभिनय के फैन हैं तो देख सकते हैं। बस ‘मडगांव एक्सप्रेस’ जैसी उम्मीदें लेकर ना देखें।
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