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गन्ना बुआई में कारगर साबित होगी एसटीपी विधि
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sun, 05 Mar 2017 11:59 PM IST
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गन्ना बुआई करता किसान।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में गेहूं काटकर गन्ना बुवाई करने वाले किसानों के लिए एसटीपी विधि वरदान साबित हो सकती है। इस विधि में पहले गन्ने की पौध तैयार कर ली जाती है और गेहूं कटने के बाद कूंड बनाकर इसको लगा दिया जाता है। इससे गन्ने की पैदावार के साथ ही शुगर रिकवरी भी बढे़गी।
जिले में गन्ने के कुल क्षेत्रफल के 60 प्रतिशत में गेहूं काटकर गन्ने की बुवाई की जाती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर और मेरठ जैसे गन्ना उत्पादक जिलों में भी कमोबेश यही स्थिति है।
किसान गन्ना-गेहूं-गन्ना का फसल चक्र अपना रहे हैं। इससे न सिर्फ मृदा की उर्वरा शक्ति घट रही है, बल्कि वह कई रोगों के लिए अनुकूल भी हो गई है। इसलिए गन्ने की एसटीपी यानी सिंगल ट्रांसप्लांट विधि बढ़िया विकल्प है।
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इस विधि में एक आंख के टुकड़ों से पहले गन्ने की पौध तैयार कर ली जाती है। जिसे गेहूं कटाई के बाद कूंड निकालकर सीधे क्यारी में रोप दिया जाता है। यह पौध पौलीथीन के बैग में भी तैयार हो सकती है और क्यारी में भी। इसके लिए गन्ने की प्लांटिंग से 30-35 दिन पहले एक आंख के टुकड़ों से नर्सरी तैयार की जाती है।
जिस दिन नर्सरी से पौध निकालना हो उसके एक दिन पहले हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए।
नर्सरी से निकालने के बाद पौधों को ऊपर से एक तिहाई पत्तियों को काट देना चाहिए।
पौधों को पहले से तैयार किए गए कूंडों मेें एक-एक फीट की दूरी पर रोपा जाए।
पौधरोपण के तुरंत बाद पानी लगाना चाहिए।
एक माह तक खेत में पर्याप्त नमी रखी जाए, ताकि पौधे सूखे न।
गेहूं काटकर गन्ना बोने वाले किसानों के लिए एसटीपी विधि बेहद कारगर है। इससे फसल करीब एक महीने अगेती हो जाती है। जिससे न सिर्फ गन्ना उत्पादन बढ़ता है बल्कि चीनी रिकवरी में बढ़ोतरी होगी। गेहूं काटकर गन्ना बुवाई करने वाले किसानों को इस विधि की जरूर अपनाना चाहिए।
- डॉ. आरडी द्विवेदी, जिला गन्ना अधिकारी।
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जिले में गन्ने के कुल क्षेत्रफल के 60 प्रतिशत में गेहूं काटकर गन्ने की बुवाई की जाती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर और मेरठ जैसे गन्ना उत्पादक जिलों में भी कमोबेश यही स्थिति है।
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किसान गन्ना-गेहूं-गन्ना का फसल चक्र अपना रहे हैं। इससे न सिर्फ मृदा की उर्वरा शक्ति घट रही है, बल्कि वह कई रोगों के लिए अनुकूल भी हो गई है। इसलिए गन्ने की एसटीपी यानी सिंगल ट्रांसप्लांट विधि बढ़िया विकल्प है।
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इस विधि में एक आंख के टुकड़ों से पहले गन्ने की पौध तैयार कर ली जाती है। जिसे गेहूं कटाई के बाद कूंड निकालकर सीधे क्यारी में रोप दिया जाता है। यह पौध पौलीथीन के बैग में भी तैयार हो सकती है और क्यारी में भी। इसके लिए गन्ने की प्लांटिंग से 30-35 दिन पहले एक आंख के टुकड़ों से नर्सरी तैयार की जाती है।
जिस दिन नर्सरी से पौध निकालना हो उसके एक दिन पहले हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए।
नर्सरी से निकालने के बाद पौधों को ऊपर से एक तिहाई पत्तियों को काट देना चाहिए।
पौधों को पहले से तैयार किए गए कूंडों मेें एक-एक फीट की दूरी पर रोपा जाए।
पौधरोपण के तुरंत बाद पानी लगाना चाहिए।
एक माह तक खेत में पर्याप्त नमी रखी जाए, ताकि पौधे सूखे न।
गेहूं काटकर गन्ना बोने वाले किसानों के लिए एसटीपी विधि बेहद कारगर है। इससे फसल करीब एक महीने अगेती हो जाती है। जिससे न सिर्फ गन्ना उत्पादन बढ़ता है बल्कि चीनी रिकवरी में बढ़ोतरी होगी। गेहूं काटकर गन्ना बुवाई करने वाले किसानों को इस विधि की जरूर अपनाना चाहिए।
- डॉ. आरडी द्विवेदी, जिला गन्ना अधिकारी।