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अवैध खनन की बजाय जिला पंचायत की वसूली पर लगा दी रोक
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 24 Oct 2016 12:55 AM IST
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अवैध खनन
- फोटो : amar ujala
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सहारनपुर में कागजी घोड़े दौड़ाने में माहिर अधिकारियों ने अवैध खनन के खेल को एनजीटी से छिपाने के लिए अब सरकारी राजस्व तक को नुकसान पहुंचाने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं।
नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) के खनन पर पूरी तरह के आदेश को अमल में लाने की बजाय खेल कर कागजों में खनन बंद दिखाने का फुलप्रूफ प्लान बनाया जा रहा है।
जिला पंचायत के खनन अभिवहन शुल्क के जरिये सामने आ रही अवैध खनन की हकीकत को छिपाने के लिए प्रशासनिक अमले ने जिला पंचायत की वसूली पर ही रोक लगा दी।
एनजीटी ने पूरी तरह से खनन पर रोक लगा रखी है और जिला पंचायत के अभिवहन शुल्क के आंकड़ों के मुताबिक जिले में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है।
ऐसे में बाकायदा आदेश जारी कर वसूली केन्द्रों पर लगे जिला पंचायत के कर्मचारियों को हटा दिया गया और राजस्व को नुकसान पहुंचाते हुए वसूली बंद करा दी गई।
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राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने सहारनपुर में खनन पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है और इसकी जांच के लिए टीमों का भी गठन किया है। प्रशासन भी लगातार खनन पर पूरी तरह से रोक का दावा करता रहा है।
इससे उलट जिला पंचायत के खनन अभिवहन शुल्क में प्रशासन के दावों की पोल खुल रही थी। वर्ष 2016 में अब तक 80 हजार 844 खनन वाहनों से एक करोड़ 30 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है।
अक्तूबर 2016 में अब तक 2895 खनन वाहनों से चार लाख 61 हजार 390 रुपये का राजस्व अर्जित किया। आपको बता दें कि उच्च न्यायालय ने जिला पंचायत को अपने संसाधनों से खनन वाहनों के वसूली का आदेश दिया था।
इसके बाद जिला पंचायत के कर्मचारी खनन केंद्रों से खनन का परिवहन कर रहे वाहनों से शुल्क वसूल रहे थे। एनजीटी के खनन पर रोक के आदेश के बाद भी जिला पंचायत केन्द्रों को मिल रहे राजस्व से यह साफ होरहा था कि प्रशासन की रोक प्रभावी नहीं है।
ऐसे में अब जिला पंचायत के वसूली केन्द्रों कोही पूरी तरह से बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया। इससे अवैध खनन के सबूत समाप्त हो जाएंगे, लेकिन जिला पंचायत को नुकसान होगा।
खनन अभिवहन वाहनों पर प्रशासन की रोक के बाद अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत ने मंडलायुक्त को पत्र भेजकर इस वसूली को शुरू कराने की मांग की है। जिसमें स्पष्ट किया है कि रायपुर, नानौली, ताल्हापुर और धौलाकुआं वसूली केन्द्रों पर चेकिंग के दौरान खनन अभिवहन करने वाले वाहनों से वसूली प्राप्त हो रही है।
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नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) के खनन पर पूरी तरह के आदेश को अमल में लाने की बजाय खेल कर कागजों में खनन बंद दिखाने का फुलप्रूफ प्लान बनाया जा रहा है।
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जिला पंचायत के खनन अभिवहन शुल्क के जरिये सामने आ रही अवैध खनन की हकीकत को छिपाने के लिए प्रशासनिक अमले ने जिला पंचायत की वसूली पर ही रोक लगा दी।
एनजीटी ने पूरी तरह से खनन पर रोक लगा रखी है और जिला पंचायत के अभिवहन शुल्क के आंकड़ों के मुताबिक जिले में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है।
ऐसे में बाकायदा आदेश जारी कर वसूली केन्द्रों पर लगे जिला पंचायत के कर्मचारियों को हटा दिया गया और राजस्व को नुकसान पहुंचाते हुए वसूली बंद करा दी गई।
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राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने सहारनपुर में खनन पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है और इसकी जांच के लिए टीमों का भी गठन किया है। प्रशासन भी लगातार खनन पर पूरी तरह से रोक का दावा करता रहा है।
इससे उलट जिला पंचायत के खनन अभिवहन शुल्क में प्रशासन के दावों की पोल खुल रही थी। वर्ष 2016 में अब तक 80 हजार 844 खनन वाहनों से एक करोड़ 30 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है।
अक्तूबर 2016 में अब तक 2895 खनन वाहनों से चार लाख 61 हजार 390 रुपये का राजस्व अर्जित किया। आपको बता दें कि उच्च न्यायालय ने जिला पंचायत को अपने संसाधनों से खनन वाहनों के वसूली का आदेश दिया था।
इसके बाद जिला पंचायत के कर्मचारी खनन केंद्रों से खनन का परिवहन कर रहे वाहनों से शुल्क वसूल रहे थे। एनजीटी के खनन पर रोक के आदेश के बाद भी जिला पंचायत केन्द्रों को मिल रहे राजस्व से यह साफ होरहा था कि प्रशासन की रोक प्रभावी नहीं है।
ऐसे में अब जिला पंचायत के वसूली केन्द्रों कोही पूरी तरह से बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया। इससे अवैध खनन के सबूत समाप्त हो जाएंगे, लेकिन जिला पंचायत को नुकसान होगा।
खनन अभिवहन वाहनों पर प्रशासन की रोक के बाद अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत ने मंडलायुक्त को पत्र भेजकर इस वसूली को शुरू कराने की मांग की है। जिसमें स्पष्ट किया है कि रायपुर, नानौली, ताल्हापुर और धौलाकुआं वसूली केन्द्रों पर चेकिंग के दौरान खनन अभिवहन करने वाले वाहनों से वसूली प्राप्त हो रही है।