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रिश्वत लेते लेखपाल गिरफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला, नकुड़
Updated Sun, 07 Aug 2016 01:50 AM IST
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नकुड़ में रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा गया लेखपाल।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हाईवे में गई जमीन का मुआवजे पर रिपोर्ट लगाने के लिए किसान से पांच हजार रुपये रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन की टीम ने लेखपाल को रंगेहाथ पकड़कर जेल भेज दिया है। शनिवार को समाधान दिवस के दौरान हुई कार्रवाई से हड़कंप मच गया।
शनिवार को कोतवाली में समाधान दिवस चल रहा था। कोतवाली में मौजूद जगैहता नजीब का हल्का लेखपाल निर्मल गुप्ता कोतवाली के सामने सड़क के पार जगैहता नजीब के किसान इखलाख से पांच हजार रुपये लेने पहुंचा। लेखपाल ने जैसे ही रुपये हाथ में लिए वहां पहले से ही मौजूद विजिलेंस टीम ने लेखपाल को रंगेहाथ पकड़ लिया और कोतवाली ले आए।
इखलाख ने बताया कि उसकी तीन बीघा जमीन नेशनल हाईवे में चली गई लेकिन उसे मात्र एक बीघा जमीन का ही मुआवजा दिया गया। दो बीघा जमीन का मुआवजा दिलाए जाने के लिए उसने अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया था। जिस पर अधिकारियों ने तहसीलदार नकुड़ को जांच कर रिपोर्ट देने को निर्देशित किया गया। तहसीलदार ने हल्का लेखपाल निर्मल गुप्ता को पैमाइश कर रिपोर्ट देने को कहा था।
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किसान ने बताया कि लेखपाल ने पैमाइश में उसकी शिकायत को सही पाया और रिपोर्ट लगाने के लिए दस हजार रुपये की मांग की। जिस पर उसने बीते शुक्रवार को एंटी करप्शन मेरठ को सूचना दी। एंटी करप्शन की टीम शनिवार को ही कोतवाली पहुंच गई और किसान से पांच हजार रुपये लेकर उन पर केमिकल लगा दिया गया। रुपये कोतवाली के बाहर लेखपाल को बुलाकर देने की बात तय हो गई थी।
समाधान दिवस में मौजूद लेखपाल को मोबाइल पर काल कर किसान ने बाहर बुलाया एवं उसको रुपये थमा दिए। जैसे ही लेखपाल ने रुपये पकड़े विजिलेंस टीम ने उसे दबोच लिया और कोतवाली में लाकर रिपोर्ट दर्ज करा अपने साथ मेरठ ले गई। इखलाख ने बताया कि लेखपाल से रिपोर्ट लगाने के बदले दस हजार रुपये तय हुए थे। जिसमें पांच पहले और पांच हजार रुपये काम होने के बाद दिए जाने थे।
लेखपाल के रिश्वत लेते पकड़े जाते ही कोतवाली में मौजूद लेखपालों में हड़कंप मच गया। विजिलेंस टीम में इंस्पेक्टर अशोक राणा, इंसपेक्टर जितेंद्र काजला, उदयवीर सिंह सिरोही, एएसआईएन अरविंद कुमार तथा हेड कांस्टेबल शारदा, आनंद शर्मा, वसीम आदि मौजूद रहे। उधर रिश्वत लेते पकड़े गए लेखपाल निर्मल गुप्ता ने बताया कि उसने रिश्वत मांगी ही नहीं, उसे साजिश के तहत फंसाया गया है।
मुआवजे के नाम पर चल रहा है खेल
जिले में कई योजनाओं में किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है। अधिग्रहण में मुआवजे में किसानों के साथ बड़ा खेल किया जा रहा है। ऐसे में रिपोर्ट के नाम पर किसानों का शोषण हो रहा है।
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शनिवार को कोतवाली में समाधान दिवस चल रहा था। कोतवाली में मौजूद जगैहता नजीब का हल्का लेखपाल निर्मल गुप्ता कोतवाली के सामने सड़क के पार जगैहता नजीब के किसान इखलाख से पांच हजार रुपये लेने पहुंचा। लेखपाल ने जैसे ही रुपये हाथ में लिए वहां पहले से ही मौजूद विजिलेंस टीम ने लेखपाल को रंगेहाथ पकड़ लिया और कोतवाली ले आए।
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इखलाख ने बताया कि उसकी तीन बीघा जमीन नेशनल हाईवे में चली गई लेकिन उसे मात्र एक बीघा जमीन का ही मुआवजा दिया गया। दो बीघा जमीन का मुआवजा दिलाए जाने के लिए उसने अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया था। जिस पर अधिकारियों ने तहसीलदार नकुड़ को जांच कर रिपोर्ट देने को निर्देशित किया गया। तहसीलदार ने हल्का लेखपाल निर्मल गुप्ता को पैमाइश कर रिपोर्ट देने को कहा था।
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किसान ने बताया कि लेखपाल ने पैमाइश में उसकी शिकायत को सही पाया और रिपोर्ट लगाने के लिए दस हजार रुपये की मांग की। जिस पर उसने बीते शुक्रवार को एंटी करप्शन मेरठ को सूचना दी। एंटी करप्शन की टीम शनिवार को ही कोतवाली पहुंच गई और किसान से पांच हजार रुपये लेकर उन पर केमिकल लगा दिया गया। रुपये कोतवाली के बाहर लेखपाल को बुलाकर देने की बात तय हो गई थी।
समाधान दिवस में मौजूद लेखपाल को मोबाइल पर काल कर किसान ने बाहर बुलाया एवं उसको रुपये थमा दिए। जैसे ही लेखपाल ने रुपये पकड़े विजिलेंस टीम ने उसे दबोच लिया और कोतवाली में लाकर रिपोर्ट दर्ज करा अपने साथ मेरठ ले गई। इखलाख ने बताया कि लेखपाल से रिपोर्ट लगाने के बदले दस हजार रुपये तय हुए थे। जिसमें पांच पहले और पांच हजार रुपये काम होने के बाद दिए जाने थे।
लेखपाल के रिश्वत लेते पकड़े जाते ही कोतवाली में मौजूद लेखपालों में हड़कंप मच गया। विजिलेंस टीम में इंस्पेक्टर अशोक राणा, इंसपेक्टर जितेंद्र काजला, उदयवीर सिंह सिरोही, एएसआईएन अरविंद कुमार तथा हेड कांस्टेबल शारदा, आनंद शर्मा, वसीम आदि मौजूद रहे। उधर रिश्वत लेते पकड़े गए लेखपाल निर्मल गुप्ता ने बताया कि उसने रिश्वत मांगी ही नहीं, उसे साजिश के तहत फंसाया गया है।
मुआवजे के नाम पर चल रहा है खेल
जिले में कई योजनाओं में किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है। अधिग्रहण में मुआवजे में किसानों के साथ बड़ा खेल किया जा रहा है। ऐसे में रिपोर्ट के नाम पर किसानों का शोषण हो रहा है।